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Tuesday, July 20, 2010

साप्ताहिक काव्य मंच --- ९ ( संगीता स्वरुप ) चर्चा मंच - 220

नमस्कार ,  आज इस साप्ताहिक काव्य मंच पर आप सबको बेहतरीन कवियों से मिलाने पर हर्ष हो रहा है अपार …सजा दिया है मैंने रचनाकारों का संसार… मनोज जी की शनिवार की चिटठा चर्चा देख लग गया है ताला मौन का…इसीलिए आज तैयार की है सबके चित्रों से एलबम …यहाँ आप उनके नाम और चित्र से परिचित होइए और उनके सृजन को उनके घर ( ब्लॉग ) जा कर पढ़िए…बस  आप चित्र पर क्लिक करिये और उनका घर संसार घूम आइये….
 रमेश प्रजापति की तीन कविताएँ…. मेरा फोटो
गिरीश पंकज जी
की ग़ज़ल
image
करण समस्तीपुरी के
खुली आँखों के सपने
My Photo

रमा  सिंह की कविता - तू बस एक कहानी बन जा
मेरा फोटो






अरुण चन्द्र राय की
छत
My Photo
जी.के. अवधिया जी  का   आज का आदमी
My Photo
राजेश  त्रिपाठी जी का  
My Photo
एम० वर्मा जी की कविता - शिनाख़्त करो खुद की
 My Photo
एम० ए० शर्मा का
सांझ का बादल
My Photo महेंद्र आर्य की
खिड़की के बाहर की दुनिया
My Photo
      सोनी राजकुमार जी की कविता…
 My Photo
 अशोक व्यास की सोच
कैसा रिश्ता है उम्मीद से मेरा
virendra jain वीरेन्द्र जैन
वीरेन्द्र जैन की हास्य कविता 
नेताओं के रथ के साथ
My Photo
अनामिका के 
ज़िन्दगी के भरम ..
ओम आर्य
ओम् आर्य क्या कहते है पढ़िए

उनकी शक्लें ढह गयी हैं आँखों में

 My Photo
मुदिता  के क़दमों के निशाँ
My Photo दीपाली …बस
की खिडकी से झांकती हुई
My Photo
अपराजिता का कहना, कुछ भी तो अमर नहीं
My Photoसोनल रस्तोगी अपने बारे में बता रही  हैं   रजनीगंधा बन महक उठूँ

रोली पाठक की रचना 

श्रमिक...

मेरा फोटोवंदना जी की 

खुले विचारों वाली औरत

मेरा फोटोरश्मि प्रभा जी का धरती + आकाश ... क्षितिज
My Photo
रावेंद्र रवि कह रहे हैं कि
तुम्हीं बता दो
मेरा फोटोसाधना वेद कह रही हैं
मैं एकाकी कहाँ
मेरा फोटो
स्वप्निल के  
ये चाँद तारे , हसीं नज़ारे,
मेरा फोटोरेखा श्रीवास्तव की  उँगलियों पर छाले अमिताभ- कुछ खास हैअमिताभ श्रीवास्तव की 
बारिश?
My Photo
अख्तर खान सिमटे हैं  
धूप के डर से
My Photo
बीना शर्मा दिखा रही हैं

डॉ.प्रिया सैनी की दो कविताएँ

My Photoअविनाश कह रहे हैं सुनो स्वेद... My Photoदेवेन्द्र जी की 
एक अभागी सड़क
My Photo
वर्तिका की 
रिश्वतखोर खला की परतें ..

वीणा जी की
संवादहीनता...
My Photo
मीतली पुनिथा …

प्रेम मेँ...

12012010005
मनोज जी की 
फ़ुरसत में …. एक गज़ल
 मेरा फोटो
डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की कविता 
“हमने झूला झूला!”
 My Photo
नीरज जी की 
कोयले की आंच पे रोटी
मेरा फोटो
चलते चलते …. समीर लाल जी की
कठपुतलियाँ:
उम्मीद है आज की एलबम पसंद आई होगी …आपसे नए सुझावों की अपेक्षा है…बस इसी तरह स्नेह बनाये रखियेगा…मिलते हैं फिर अगले मंगलवार को…तब तक के लिए….नमस्कार |

35 comments:

  1. साप्ताहिक काव्य मंच का इंतजार सप्ताह भर रहता है और फिर पठन से छूटे हुए को पढने का अवसर भी मिल जाता है
    बहुत सुन्दर

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  2. संगीता जी ,
    ना जाने क्यूँ आप मुझे बहुत अपनी सी लगती है |आपका रचना चयन बहुत सुन्दर और बहु आयामी होता है |बहुत अच्छी लिंक दी है इस बार भी |
    बधाई
    आशा

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  3. आपकी लगन और आपका श्रम चर्चा में साफ झलक रहा है!
    --
    बहुत बहुत आभार तथा शुभकामनाएँ!

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा लग रही है ! सभी लिंक्स को पढ़ पाऊँ यही प्रयत्न रहेगा ! मुझे चर्चा में शामिल करने के लिये धन्यवाद !

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  5. hamesha ki tarah bahut sundar charcha..
    bahuaayami charcha hai yah..
    aapka aabhaar..!!

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  6. बहुत सुन्दर चर्चा!

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  7. काफी अच्छे अच्छे लिंक्स दिए हैं आपने :)

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  8. चर्चामंच में प्रतिष्ठित ब्लोगरों के बीच पाकर अच्छा लगा! चर्चा में शामिल करने के लिए आभार! इस चर्चा का अब इन्तजार रहता है.. हिंदी ब्लॉग्गिंग के प्रतिनिधि हस्ताक्षरों से मिलने का सुअवसर मिल जाता है.. आभार सहित!

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  9. सभी की रचनाओं का आनंद ले नही पाता। जाना है ऑफिस। बहुत ही नये नये तरीके से आप इस मंच पर रखती हैं रचनाकारों के लिंक। आनंद आ जाता है। शुक्रिया। फिर पढ़ेंगे फुर्सत से।

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  10. चर्चा स्तम्भ विस्तृत है

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  11. आदरणीया संगीता जी आपका बहुत आभार जो आपने डॉ. प्रिया जी की रचना को इस सार्थक चर्चा में स्थान देकर उनके सृजन को मान दिया..
    सम्पूर्ण चर्चा बहुत ही गहनता से की हुई, सार्थक बन पड़ी है..बहुत से नए-नए और प्रतिष्ठित लेखन शिल्पियों को भी पढने को अवसर मिला..धन्य हुवा...आभार !!

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  12. Sangeeta ji

    Aapki rachnatmakta ne mere 'saanjh ke akaash' ko aur bhe rangeen bana diya ..:)

    sundar sankalan !

    Bahut umda rachnayen padhne ka saubhagy mila .

    Shukriya evam Bahut abhaar !!

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  13. ये अन्दाज़ भी भा गया……………।मेहनत से लगाई गयी बहुत ही सुन्दर और सार्थक चर्चा।

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  14. अरे वाह ये तो अनूठा अंदाज रहा ..और बहुत ही व्यवस्थित और सुरुचुपूर्ण.

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  15. आपके अनूठे अंदाज़ का जवाब नहीं...
    नीरज

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  16. sangeeta ji,
    aapne charchamanch par meri rachnayaon ko jo samman diya hai uske liye main aapki shukraguzar rahungi... Charchamanch par mangalwar ka din har bar alag alag roop me pesh hota hai... Iske liye aapko abhar...

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  17. एक साथ बेहद खूबसूरत लिंक्स ...शानदार चर्चा ...!

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  18. Saarthak charcha aur links ke liye haardik shubhkamnayne aur aabhar

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  19. ख़ूबसूरत सफ़र कि तरह है आपका साप्ताहिक काव्य मंच. सभी रचनाएं मील का पत्थर मालूम होती हैं. आपका धन्यवाद.

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  20. abhi-abhi net par aaya aur aap tak pahunchaa. dhanyvaad, ki aapne iss nacheez ko charchaa ke layak samajhaa. any link bhisundar-sarthak hain. aabhar.

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  21. देरी के लिए माफ़ी चाहती हू...आज हर एक लिंक जा कर देखा.

    बहुत ही अच्छा संकलन है.

    बहुत से नए और अच्छे लिंक्स मिले.

    और चर्चा की ख़ूबसूरती तो लाजवाब है आज.

    चर्चा दिन पे दिन खूबसूरत और आकर्षक होती जा रही है.

    आभार अच्छे लिंक्स देने के लिए.

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  22. Sangeeta ji,
    mainy aapka Charcha manch pahli baar dekha hai...Sachmoch yahan aa kar bahut si achhi rachnayon ko ak saath pa kar behadd achha laga...!!! Etne sunder manch ke liye BADHAI...!!! Mujhe apne manch main shamil karne ka bahut bahut Shukria...!!!

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  23. दीदी,
    बहुत सुन्दर सजाया है यह मंच...अच्छा लगा ..पढ़ नहीं पायी अभी सबको.. मुझे यहाँ स्थान देने का शुक्रिया

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  24. इतने अच्छे लोगों के बीच अपनी चर्चा को पाकर भला किसे अच्छा नहीं लगेगा
    हमेशा की तरह शानदार चर्चा
    एक बात और वह यह कि अब लोग इस चर्चा का इन्तजार करने लगे हैं
    मुझे भी रहता है.
    आज एक जरूरी काम से उलझ गया था इसलिए विलंब हुआ.
    क्या करूं -मैं देर करता नहीं देर हो जाती है.

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  25. संगीताजी
    बहुत प्यारा सजा है "चर्चा मंच "बस पढना अभी बाकि है \
    धन्यवाद

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  26. आपने आज मौन धारण किया तो एक बात याद आई
    मौन में शब्दों की अपेक्षा अधिक वाक-शक्ति होती है।
    मेरी ग़ज़ल को सम्मान देने के लिए आभार।

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  27. और हां देर से आने के लिए क्षमा करेंगी।

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  28. charcha manch ek accha prayaas hai yahi kahoongi.... samay aur mehnat dono hi kaafi lagti hogi chunindaa rachnaon ko chantne aur unhein yahan tak laane ke liye.... aur aap sab charchakaar yeh bahut achce se karte hain....charcha thodi aur vistrit hoti to aur accha lagtaa.... infact charcahaa shayad tab hi ho paati...abhi sankalan jaisa lag raha hai... yeh ek sujhaav matra hai...kitnaa possoiuble hogaa aisaa karnaa yeh aap log hi behtar jaate hain... kaafi logon ko aaj pehli baar padhaa.... naye logo se milne kaa maukaa milaa....so yahan aana aaccha lagaa...

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  29. सभी पाठकों का आभार ,

    वर्तिका ,

    इस मंच पर तुम्हारा आना अच्छा लगा...और सुझाव भी...दरअसल पहली बार आई हो इसलिए शायद ऐसा लगा कि यहाँ चर्चा नहीं होती....हाँ इस बार तुम इसको संकलन कह सकती हो...कुछ परिवर्तन होते रहना चाहिए इस लिए ऐसा किया...तुम्हारे सुझाव को ध्यान में रखा जायेगा..सुझाव के लिए आभार....

    शुभकामनायें

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  30. bahut der ho gayi aate aate..sorry bade wala..par kal sare din lyt nahi thi ....barish aandhi me sab gadbad ho gaya tha.... kai sari poems padh chuka tha..kuch padhni baki hain ..humesha ki tarah mast charcha...

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  31. Sangitaji.
    aapne meri kavita ko charcha manch par sthan diya uske liye aapko sadhuwad. Aasha hai bhavisy me bhi aap meri rachnawo ko pathko ke samksh rakhati rahengi. AApki tipni ke liye ek bar phir se aapko dhanywad.

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  32. बहुत प्यारा सजा है "चर्चा मंच ".

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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