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Friday, July 09, 2010

"चर्चा मंच - 209" (अनामिका की सदायें..)

हाज़िर हूँ मैं आज एक बार फिर आपके सामने नए नए रंगों के साथ .....और आज मेरे मन की बात जो जुबा पे एक गाने के रूप में ढल रही है...आप की पेशे खिदमत है..
रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं
ये मुरादों की हँसी रात किसे पेश करू...
क्युकी...
मैंने जज़्बात निभाए हैं उसूलों की जगह
अपने अरमान पिरो लायी हूँ फूलों की तरह..

और आगे..

कौन कहता है की लिंक पे सिर्फ एक का हक है..
तुम जिन्हें चाहो, उन लिंक्स पे तुम्हारा हक है..
और अंत में..
सुंदर रंगों से भरी ये चर्चा मुबारक हो तुम्हे..
तुम्हारी नज़रे – इनयात के ख्वाब देखती हूँ मैं..

सबसे पहले कविताओं की बारी....
सबसे पहली पोस्ट शास्त्री जी की जिसे पढ़ कर आप सब का मन कमल सा खिल जाये..यही प्रयास है..
"पंक में खिला कमल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

पंक में खिला कमल,
किन्तु है अमल-धवल!
बादलों की ओट में से,
चाँद झाँकता नवल!!
आज संगीता स्वरुप 'गीत' जी को किसी परिचय की जरुरत नहीं..इस बार पढ़िए इनकी यात्रा काव्य सृजन की... और एक यात्रा मन के भीतर की..
कविता यूँ बनती है..
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भावों की सरिता
बह कर जब
मन के सागर में
मिलती है....
डा.कविता किरण जी की एक रचना...
चट्टानों पर जब पानी बरसा होगा
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चट्टानों पर जब पानी बरसा होगा मिटटी का दामन कितना तरसा होगा सागर भरकर भी ना प्यासी रह जाऊं गागर के भीतर कोई डर-सा होगा बादल सोच रहा है अबके बारिश में जाने कितनी बूंदों का खर्चा होगा

स्वार्थ in कविता, कृष्ण बिहारी,

पुलिस, डॉक्टर और मास्टर

वो नाक की सीध में बढ़ते हुये अध्यापक हैं उन्हे पढ़ानी है ट्यूशन फेल करते हैं बच्चों को एक एक नम्बर से हर वीकली टैस्ट में डर जाते हैं माँ-बाप डर जाता है पूरा समाज और पढ़ने लगता है ट्यूशन
और एक समीकरण
अनकही... पर My Voices
पानी को कभी अहंकार करते देखा है? बस बहता है समंदर से एक होने की फ़िराक में रहता है न सूखने से डरता है न बरसने से इंसान फिर भी बाज़ नहीं आता तरसने से जमीं नहीं ...

डा.अरुणा कपूर जी...कितनी सादगी से छोटी छोटी उन बातों को कविता में ढाल देती है..जो हमारी जिंदगी के यथार्थ से जुडी हैं...पढ़िए..

My Photo

मेरी माला,मेरे मोती..

दूरियां बढाती है, आपस का प्यार!

पास आने से मिलती है खुशियाँ...
आपस की सुख- दुःख की बातों कों...

सीमा गुप्ता जी बताती हैं ख्वाब देखिये तो कहाँ कहाँ मिलते हैं मुझसे आकार..
सिरहाने पे आ मिलते हैं "

\

उजालों के बदन पर अक्सर उम्मीदों के आँचल जलते हैं जाने कितनी ख्वाइशों के छाले पल पल भरते पिघलते हैं


शोभना चौरे जी लिखती हैं..
मैं वेदना तो हूँ पर संवेदना नहीं, सह तो हूँ पर अनुभूति नहीं, मौजूद तो हूँ पर एहसास नहीं, ज़िन्दगी तो हूँ पर जिंदादिल नहीं, मनुष्य तो हूँ पर मनुष्यता नहीं , विचार तो हूँ पर अभिव्यक्ति नहीं..और अब पढ़िए इनकी नयी कविता..

रिश्ते की आस
बहुत तपिश होती है
मन में
सिर्फ
तुम्हारे ख्याल से ही
ठंडी फुहार
बरसने लगती है
.
मेरी दुनिया में(१) - शोभा गुप्त
हिंदी कुञ्ज पर यह रचना शोभा गुप्ता द्वारा लिखी गयी है। ये Eight Star Child Care Society की अध्यक्ष है। इनकी स्वतंत्र रूप से पत्र -पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है।

कभी फुर्सत मिले तो आना मेरी दुनिया में।
मेरी खातिर भी मुस्कुराना मेरी दुनिया में॥
तुम्हें हम याद कभी भूल कर नहीं आए।
फिर भी चर्चा है मगर तेरा मेरी दुनिया में॥
बरसना न भूल जाऊं थोडा थोडा बरस जाता हूँ.
My Photo
Khuch baatein unkahi... पर Satyendra Gupta जी की बादलों पर कविता पदिये..
तू मुझे न भूल जाए इसलिए नज़र आता हूँ
चलते चलते तुझ पर अहसान कर जाता हूँ।
बादल ने सहरा से मुस्कराकर कुछ यूं कहा
बरसना न भूल जाऊं थोडा थोडा बरस जाता हूँ।
अरविन्द श्रीवास्तव के janshabd पर देखिये..
शहंशाह आलम का ‘वितान’ http://janshabd.blogspot.com/2010/07/blog-post_07.html
डा. रमाकांत शर्मा के अनुसार ‘डिप्रेशन के इस महादौर में शहंशाह आलम की कविताएं विश्वास को टूटने नहीं देती, बल्कि खूबसूरत दुनिया का ख़्वाब बनाए रखती है।’ बतौर बानगी प्रस्तुत है वितान से ‘स्त्रियां’ शीर्षक कविता -
स्त्रियां हैं इसलिए
फूटता है हरा रंग वृक्षों से
उड़ रहे सुग्गे से..
सच ही कहा है किसी ने जहाँ न पहुचे रवि...वहाँ पहुचे कवी..देखिये हमारी कब्यित्री राजवंत राज जी की सोच कहाँ जा पहुंची है..

लकड़ी की चौकी
मै दालान में पड़ी बरसों पुरानी लकड़ी की चौकी हूँ
धूप और बारिश दोनों मेरी हमजोली हैं|

कभी पुरुषों के ठहाकों का हिस्सा बनती हूँ
कभी औरतो की गोष्ठियों का रस पीती हूँ
उलाहनों और नाराजगियों को भी देखा है
रूठना और मनाना भी अब जान गयी हूँ

मौत से बड़ी सौगात मिली हो जिसे

मेरा फोटो
posted by वन्दना at ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र -
चाँदनी से झुलसे जिस्म को
जब चाँदनी भी जलाने लगे
रूह पर पड़ते फालों पर
आहों की सुइयाँ गुबने लगें
पाँव में छाले पड़ने लगें

ग़ज़ल ' ख़्वाब क्या नींद तो मयस्सर हो ' ग़ज़ल 'नीं गाज्यो नीं बरस्यो मेह '

My Photo
शस्वरम ब्लॉग पर पढ़िए बीकानेर, राजस्थान के राजेंदर स्वर्णकार की गज़ल..
ख़्वाब क्या नींद तो मयस्सर हो
फ़िर… ज़मीं , टाट , नर्म बिस्तर हो
सब्र दरिया से क्या मिलेगा उसे
जिसकी ज़द में अगर समंदर हो
अब गुफ्तगूँ कुछ लेखों पर.....

भावनाओं की कथाकार मन्नू भंडारी मन्नू भण्डारी

तिरुमिशि... पर तिरुमिशि

भावनाओं की कथाकार मन्नू भंडारी मन्नू भण्डारी हिन्दी की सुविख्यात बहुपठित अत्यंत महत्वपूर्णऔर बहुत सारी भाषाओं की रचनाकार हैं। जीवन जीने, उसे संभालने ...

मनोज ब्लॉग पर पढ़िए.. आचार्य परशुराम जी का ताजा ताजा एक लेख..जो ज्ञान देता है..


आँच-25 :: गीत का कायिक विवेचन

गीत के ‘मुखड़े’ को बन्द माना जाय या न माना जाय। इस मुद्दे पर कुछ प्रसिद्ध गीतकारों और साहित्यकारों से भी चर्चा की कि हमारी सोच उनसे मेल खाती है या नहीं। कुछ निरुत्तर होकर सहमत हो गये। तो कुछ न सहमत हुए और न ही असहमत। पर कुछ ने असहमति भी जताई। इस चर्चा के दौरान जो परिणाम आए हैं उनका विवरण संक्षेप में.....

नहीं मरेगी टिन्नी?( लघुकथा ) अशोक लव

अशोक लव... जी के ब्लॉग पर पढ़िए ये लघु कथा.. My Photo
प्रिय गौतम उसे बचा सकूँगी नहीं जानती ? वह जिस स्थिति में है हर पल आशंका बनी रहती है , वह कहीं आत्महत्या न कर ले। उसे समझा-समझकर परेशान हो चुकी हूँ।
विधाता तैने क्या-क्या रचा--- तेरी माया तू ही जाने
संजू भगत :पेट में दो जुड़वाँ बच्चे
संजू भगत का पेट कभी ऐसा था जैसे कि वह ९ महीने के गर्भ से हों.उनका पेट ऐसा सूझा हुआ था कि उन्हें सांस लेने में भी मुश्किल होती थी.संजू नागपुर के रहने वाले हैं.डॉक्टर मेहता ने जब उनका पेट देखा तो उन्हें लगा कि.....
प्रज्ञा जी का एक लेख पढ़िए ...
मेरा फोटो
स्त्री- देह का सच
स्त्री की यादों में बहुत कुछ ऐसा होता है जो उसके मन को बेधता है ! .. स्त्री देह ऐसी है कि मात्र १३- १४ वर्ष की उम्र आते आते ही प्रश्न खड़े लगती है .प्रश्न चौराहों से होते जाते हैं .. लोगों के सवाल और सवाल बनती देह कुछ इस तरह उलझते हैं कि ताजिंदगी उनके जवाब संजीदा नहीं होने पाते...

आचार्य ब्लॉग पर पढ़िए..

कुछ इस पार की बातें..
क्या आप अरुंधती राय को जानते हैं?
क्या आप यह जानते हैं कि उन्हें खुद को भारतीय कहने में शर्म आती है। हैरानी हो रही है न, पर यह सच है। यही नहीं, वह भारतविरोधी मुहिम भी चला रखी है, जिसमें उनका साथ दे रहे हैं कई एनआरआई भारतीय।


Gagan Sharma, Kuchh Alag sa ने कहा
शाकाहारी, सब पर भारी
1, हाथी :- स्थल का सबसे भारी जीव।
वजन करीब 6 टन।
ऊंचाई 15-16 फुट।
आहार - घास, पत्तीयां, फल इत्यादि।

गीतालेख”. अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी..

गिरीश पंकज... पर .... My Photo
___यह गीतालेख प्रवक्ता में भी प्रकाशित है. मुझे लगा, हो सकता है, कुछ पाठक वहां न पहुंचे हों, यही सोच कर अपने ब्लॉग में देने की गुस्ताखी कर रहा हूँ.
अबला गैया हाय तुम्हारी है यह दुखद कहानी,
माँ कह कर भी कुछ लोगों, ने कदर न तेरी जानी..
मैं एक लेखक की तरह नहीं जी पाया

प्रस्तुत है पंकज बिष्ट के आत्म-तर्पण का तीसरा भाग

सोनिया के इर्दगिर्द सिमटती कांग्रेस की धुरी

· कांग्रेस में कोई नहीं जो अध्यक्ष बन पाए

· झा ही ला सकते हैं उमा के जीवन में प्रभात

· तेल की कीमतें और सांसदों का वेतन बढाना जरूरी था!

· सूदखोरी का नायब तरीका

· भाजपा भी बरी नहीं है गैस हादसे से

· फिर निकला राम मंदिर का जिन्न

फिर मर गई इन्सानियत

परिस्थिति... पर हरीश कुमार तेवतिया
My Photo
आज के इस दौर में, हम लोग अपनी अंतर आत्मा का बलात्कार करते ही जा रहे है | जिसका एक उदाहरण मैं लिख रहा हूँ |
देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार : नेताओं
कड़वा सच... पर नरेश चन्द्र बोहरा
देश की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार : नेताओं के लिए यह मुद्दा क्यों नहीं बनता हमारे नेता कितनी ही बेतुकी बातों और फ़ालतू के मुद्दों को जोर शोर से उठाकर संसद ...

हमारे देश में सामाजिक चेतना का अभाब क्यों है ?

मेरे बलोग... पर vinay
हमारे देश भारत में सामाजिक चेतना का अभाव क्यों है, समझ नहीं आता क्या यह अशिक्षा का प्रभाव है ?, या स्वार्थ की भावना है ? या इन दोनों का मिला,जुला प्रभाव है ?.....
और तो और जागरण में नाम ले लेकर पुकारा जाता है, इसकी इतने रूपये की अरदास,क्या भगवान गरीबों का नहीं हैं,इसको व्यापर क्यों बनाते हो?

कांग्रेसी की मौत से खत्म होगा नक्सलवाद.....

कलमबंद...... पर शशांक शुक्ला जी को पढ़िए..
मेरा फोटो
केंद्र सरकार भले ही नक्सल जैसे कोढ़ को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्प दिखे लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि वो इस समस्य़ा स्थाई हल नहीं
दुश्मन भगवान (प्रथम भाग)
ये कहानी लेखन भी बखूबी करते हैं...ये है इनकी एक कहानी का प्रथम भाग...

भविष्य-दर्शन : लघुकथा : रावेंद्रकुमार रवि जी को पढ़िए..

रवि मन... पर रावेंद्रकुमार रवि
भविष्य-दर्शनमैं शिब्बू की दुकान पर बैठा अख़बार पढ़ रहा था । वह मेरे लिए चाय बना रहा था । तभी एक झटके के साथ नए खुले मॉडर्न इंग्लिश स्कूल की वैन उसकी दुकान के ...

औरत का एकान्त

40 मिनट पूर्व नया जमाना... पर jagadishwar chaturvedi
पोर्न का प्रभाव उन पर भी होता है जो शिक्षित हैं। पोर्न को जो देखेगा वह प्रभावित होगा। अमेरिका की नारीवादी लेखिका और आंदोलनकारी आंद्रिया द्रोकिन ने ‘‘स्त्री रचनाकार और पोर्नोग्राफी’’ (1980) नामक निबंध में इस तथ्य को रेखांकित किया है। द्रोकिन ने लिखा है ‘मैं अपने समय की कुछ सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, बुद्धिमान तथा दृढ़ महिलाओं को जानती हूँ जो पोर्नोग्राफी से प्रभावित रहीं हैं।

|

और अब यहीं बंद करती हूँ अपनी सुंदर चर्चाओं का पिटारा.. और इंतज़ार करती हूँ आपके बहुमूल्य उपहारों
का आपकी टिप्पणियों के रूप में..............इज़ाज़त दें...............................अनामिका

17 comments:

  1. परिश्रम के साथ की गई उपयोगी चर्चा के लिए आपका आभारी हूँ!

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  2. धन्यवाद अनामिका जी,
    आपका कार्य सराहनीय है।
    आशा है रचनाकार इससे प्रेरित होकर और अच्छा लिखेंगे

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  3. सुंदर चर्चाओं का पिटारा..में बड़ी मेहनत से आपने ढेर सारे मोती सजा के रखे हैं।

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  4. सुन्दर प्रस्तुती

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  5. अनामिका जी रंगों से भरी ये चर्चा बेहद ही रोचक और सुन्दर लगी और आपका परिश्रम साफ़ झलक रहा है. , कितने ही सारे नये लिंक भी मिले जिन्हें अभी पढ़ा नहीं है. मेरी कविता को इस मंच पर शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार.
    regards

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  6. काफी जानकारी भरे लिंक्स, बढ़िया चर्चा!

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  7. सुन्दर और उपयोगी चर्चा ...आभार

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  8. thanks anamika meri kvita ko chrcha me shamil krne ke liye .
    mnnu bhandariji our mrinal pande dono hi ne mujhe bhut prbhavit hi nhi aakrshit bhi kiya hai enhe pdna our sunna dono bhut hi sukhd anubhv hota hai mnnubhandari ji ki haliya tsveerse lga ki vo bilkul samne hai .

    ye mnch sflta ki uchi se uchi udan bhre.bhut sari shubhkamnaye .

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  9. This comment has been removed by the author.

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  10. धन्यवाद अनामिका जी,मेरे लेख को चर्चा मंच पर लेने
    के लिये,हो सके तो मेरे लेख को पड़ने वाले,सामाजिक
    चेतना का प्रयास करें,विशेशकर अक्षिक्षत लोगों के लिये ।
    धन्यवाद
    अपने राष्ट्र को जगाने की इच्छा रखता हूँ ।

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  11. बहुत मेहनत से चर्चा लगाई है …………।काफ़ी नये लिंक्स पढने को मिले ………आभार्।

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  12. अनामिका जी
    सर्वप्रथम आभार आपका !
    आपकी मेहरबानी से शस्वरं आज चर्चामंच में शामिल है ।
    एक बार पहले वंदनाजी ने भी सम्मिलित करके मान बढ़ाया था ।

    आपका प्रस्तुत करने का अंदाज़ बहुत अच्छा लगा …
    रंग और नूर की बारात …
    वाह !
    शानदार मोती पिरोए हैं आपने ।
    कुछ से परिचय है ।
    जिनसे नहीं है , आगामी कुछ दिनों में उन सब ब्लॉग्स पर मेरी टिप्पणियां जाने वाली हैं । और अन्य सभी का भी शस्वरं पर हार्दिक स्वागत है ।
    आपके माध्यम से मैं कहना चाहूंगा कि शस्वरं पर आकर आप कभी निराश नहीं होंगे ।

    …और , आपके प्रयास वंदनीय हैं , स्तुत्य हैं । चर्चामंच के भावी आयोजनों में सहभागिता निभाने का अवसर मेरे लिए हर्ष और सौभाग्य की बात होगी ।

    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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  13. साहित्य की विधाओ से भरपूर है आज का चर्चा मंच |इसके अतिरिक्त कई अलग विषयों पर विविधता किये आलेख भी है |आभार
    मेरी कविता शामिल करने का धन्यवाद .

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  14. बहुत बढ़िया!
    --
    मेरी लघुकथा को शामिल करने के लिए
    आभारी हूँ!

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  15. वाह उत्तम चर्चा...!!

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