चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Saturday, June 18, 2011

"खूब लड़ी मर्दानी वह तो..." (चर्चा मंच-549)

लीजिए जनाब!
शनिवार की भी चर्चा लेकर मैं ही हाजिर हूँ!
क्योंकि सत्यम शिवम् जी का आदेश मिला है-
namaskaar shastri ji..
kal ki charcha dekh lijiyegaa..
mai kaam se pune ja raha hu...
1 hafte me laut jaungaa
दिनेश की दिल्लगी में देखिए!
चालबाज, ठग, धूर्तराज सब, पकडे बैठे डाली - डाली |
आज बाज को काज मिला जो करता चिड़ियों की रखवाली |
हम सारी दुनिया भूल जाते हैं .
यह आँखें देख कर ..
मेरा फोटो
कॉलेज की वे यादें
आज भी भूल नहीं पाती
मन में ऐसी बसी हैं
अक्सर याद आती हैं |.....
कहते हैं
My Photo
सागर के बारे में
ऐ सागर तू कैसा हैं,
सब को समा लेता है,

हर किसी को अपना लेता है,
इसीलिए तुझे सागर कहते हैं,....
तुम किसी खोह - खन्दक से उभरी हो,
या गहरे पाताल से निकली हो।
किसी व्यक्ति पर ऐसी बुराई का आरोप लगाए
जो उसमें न पाई जाती हो दोषारोपण कहलाता है.
मेरे विचार से आचार्य परशुराम राय जी की गणना
संस्कृत वाङ्मय के मनीषियों में कीजाती है
मनोज ब्लॉर पर देखिए!
Dr Nutan Gairola जी दिखा रहीं हैं
अमृतरस में चंद्रग्रहण के नज़ारे!
वीर बहुटी पर पढ़िए
निर्मला कपिला जी लेकर आईं हैं
यह बढ़िया गज़ल
हालात कुछ ऐसे नहीं कि कुछ कह सकूं , बस आपने भेजा औरमैंने आप लोगों के सामने रख दिया। इससे अधिक कुछ भीकहने लायक नहीं। आपके अनुभव प्रस्तुति में विलम्ब हो सकताहै इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। लेकिन अपना स्नेह बनाये रखें औरमुझे भेज अवश्य दें।

रश्मि प्रभा:
गर्मी की छुट्टियां ???????????
--

लिखें या टाइप करें

इस विषय में कोई संशय नहीं कि लिखित साहित्य ने पूरे विश्व की मानसिक चेतना का स्तर ऊपर उठाने में एक महत योगदान दिया है। सुनकर याद रखने के क्रम की परिणति कालान्तर में भ्रामक हो जाती है और बहुत कुछ परम्परा के वाहक पर भी निर्भर करती है। व्यासजी ने भी यह तथ्य समझा और स्मृति-ज्ञान को लिखित साहित्य बनाने के लिये गणेशजी को आमन्त्रित किया। व्यासजी के विचारों की गति गणेशजी के द्रुतलेखन की गति से कहीं अधिक थी अतः प्रथम लेखन का यह कार्य बिना व्यवधान सम्पन्न.....।
पृथ्वी पर ब्लॉगिंग का नशा देख कर कर
स्वर्ग वासियों को भी ब्लॉग का चस्का लग गया.
और उन्होंने भी इन्द्रलोक में ब्लॉगिंग... शुरू कर दी है...

अब देखिए ये दो कार्टून!
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Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com)

कार्टून: ये चलेगी??

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Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com)
कभी इस देश का हाल यह था कि रानी लक्ष्मीबाई ने ज़नाना लिबास उतार कर मर्दाना लिबास पहन लिया और घोड़े पर बैठकर दुश्मन की तरफ़ हमला करने भागीं और आज यह आलम है कि जो लड़ने निकला था भ्रष्टाचारियों से वह मर्दाना लिबास उतार ज़नाना लिबास में लड़ाई के मैदान से ही भाग निकला और फिर औरतों की ही तरह वह रोया भी।...
अमर वीरांगना झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई के
बलिदान-दिवस पर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि समर्पित करते हुए
श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान की
यह पूरी अमर कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ।
सिंहासन हिल उठे, राजवंशों ने भृकुटि तानी थी,
बूढ़े भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,
गुमी हुई आजादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,
चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।....
न चाहते हुए भी आज
चर्चा कुछ लम्बी हो गई है!
जिससे कि आपको सत्यम् जी की कमी न खले!
सभी सुधि पाठकों को प्रणाम!
बाकी को राम-राम!

33 comments:

  1. आज की चर्चा और मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. बेहतरीन कोशिश महत्वपूर्ण चिट्ठों को एकत्रित करने की.
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  3. अच्छी चर्चा रही.

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  4. ‘धार्मिकता की सच्ची कसौटी‘ शीर्षक से आपने मेरा लेख अपनी चर्चा में शामिल किया, शुक्रिया !
    यह मंच नियमित रूप से इतने अच्छे लिंक देता है कि पढ़कर वाक़ई मज़ा आ जाता है।

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  5. सार्थक ,व मनोहारी चर्चा , सफल संकलन & संपादन को बधाई /

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  6. hindi blogign kon aek sutr me pirokar usme is knkar ko bhi sthan diyaa bahut bahut shukriyaa jnaab dr sahb u r the great .akhtar khan akela kota rajsthan

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  7. सुन्दर लिंक्स, पढ़कर नयापन मिला।

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  8. सारे महत्वपूर्ण लिंक्स ...
    आभार !

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  9. बहुत बढ़िया चर्चा ....आभार

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  10. अति सुन्दर
    लिन्क बाहर खोलने का उपाय करे..

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  11. सच में आपने तो सत्यम जी के स्टाइल की चर्चा कर दी है। बहुत अच्छे लिंक्स दिए हैं। जाता हूं एक-एक कर।

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  12. namaskar Shastri ji ,

    बहुत बढ़िया लिंक्स ...चर्चा क्या है ..चर्चा का अम्बार है ...!!
    आज तो दिन भर का काम है ...!!

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  13. सार-संक्षेपिका के सुंदर प्रस्तुतिकरण में आपकी तत्परता और तन्मयता साफ़ झलकती है.कई अच्छे चिट्ठों की चर्चा आकर्षित करती है. मेरी कविता को भी आपने जगह दी. बहुत-बहुत आभार.

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  14. मेरी पोस्ट को यहाँ शामिल कर सम्मान देने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

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  15. इस चर्चा में 'साइंस ब्लौगर्स असोसिएशन' की मेरी पोस्ट 'खोया - खोया चाँद' को शामिल करने का आभार.

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  16. Respected sir ji,
    आज की चर्चा मे मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार. पढ़कर वाक़ई मज़ा आया है।

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  17. ्बहुत ही सुन्दर और सार्थक चर्चा। सुन्दर लिंक संयोजन्।

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  18. मेरी कविता को भी आपने जगह दी. बहुत-बहुत आभार.

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  19. बहुत बहुत आभार .. मेरी पोस्ट को चर्चा में रखने योग्य समझा ..चर्चा भी रंगबिरंगी कई ब्लोग्स और सुन्दर पोस्ट मिली हैं ..आभार

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  20. सुन्दर लिंक्स, अच्छी चर्चा रही.

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  21. सुंदर और महत्वपूर्ण लिंक्स से सजी सार्थक चर्चा|
    समस्या पूर्ति मंच को स्थान देने के लिए आभार|

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  22. ब्लागर का सागर |
    आभार ||

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  23. सुन्दर लिंक्स से सजी सार्थक चर्चा..

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  24. सार्थक व पठनीय लिंक चयन से सज्जित चर्चा हेतु आभार...

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  25. shastri ji aapne charcha manch ko aaj apne naye dhang se prabhavit kiya hai bahut sundar charcha .aabhar.

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  26. बहुत अच्छी और विस्तृत चर्चा ... आभार

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  27. मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

    दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

    मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

    मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

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  28. कई महीनों बाद लौटा हूं इस ब्लॉग पर। अच्छी चर्चाएं हैं। भाषा,शिक्षा और रोज़गार ब्लॉग की पोस्ट लेने के लिए भी आभार।

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  29. बहुत बढ़िया चर्चा.आभार मुझे भी स्थान देने का.

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