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Saturday, December 17, 2011

आँचल में उसके सिमटा है संसार! (चर्चा मंच : 731)

दिसम्‍बर का महीना शबाब पर है और इसी के साथ शबाब पर है ठंड। हमारा देश भी किसम किसम के रंग लिए है। कहीं पारा शून्‍य से नीचे जा पहुंचा है तो कहीं ठंड की शुरूआत हो रही है... पर इस मौसम में सबसे प्‍यारा कोई चीज यदि लगता है तो वो है सूरज...किसी ने सच कहा है, इस मौसम में सूरज की आग में जलेबी की मिठास होती है....... कितनी प्‍यारी लगती है एक मुट्ठी धूप 

और रात में...... रात में सबसे प्‍यारा लगता है अलाव  

 दिसम्‍बर बीतता है और आता है नया साल। और फिर सब कुछ नया। बता रहे हैं शरद की जुन्‍हाई में 
ठंड के मौसम में ओस की बूंदें किसे नहीं भातीं। इस मौसम में प्‍यार का अहसास कितना मजा देता है, आँचल में उसके सिमटा है संसार!
क्‍या कहें ना जाने ऐसा ये क्यों हो रहा है?
लम्‍हों का है ये सफर जाने कहाँ गई वो लड़की...
आखिर किसने चाहा, मिट्टी की सेज
किसकी है ये प्रीत 
जिंदगी क्‍या है.....??  जिंदगी कहां अंकगणित......??? 
क्‍या आपने कभी लिखा है प्रेमगीत
क्‍या आपके दिलो दिमाग में है कुंठाओं ने डाला डेरा  
या फिर  क्या कल आप हमे भूल जाओगे ??? 
वर्ना मेरे गाँव में इतनी वीरानियाँ नहीं होती...... 
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0 आपके लिए क्‍या मायने  हैं जिंदगी के
एटीएम पर आप ऐसे भी ठगे जा सकते हैं... 

0 आपका इंटरनेट कितनी तेज गति से चलता है, क्‍या आपने देखा है एक सेकेंड में 186 Gbps वाला इंटरनेट!
सोनिया को नहीं जानती मुनिया  
0 आप जानते हैं क्‍या है 16‍ दिसम्‍बर का इतिहास
0 छत्‍तीसगढी फिल्‍मों को जानिए झमाझम छालीवुड


 0 दीजिए बधाईयां ये मना रही हैं शादी की सालगिरह
 0 सीखिए गजल की गहराई
0 छत्‍तीसगढ की समृध्‍द विरासत पर कुछ बातें टांगीनाथ
0 सीखिए बोलना और लिखना बोलते शब्‍द   
और ..........
0 आखिर में श्रध्‍दांजलि ब्लागर डा0 सन्ध्या गुप्ता जी को

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