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Tuesday, December 13, 2011

"बैठकर के धूप में सुस्ताइए" (चर्चा मंच-727)

मंगलवार के लिए
हमारी पसंद के कुछ लिंक!

पत्थर दिल इंसान....

झील के किनारे टहलते टहलते...तुम उठाकर थाम लेती हाथ में एक पत्थर और कुछ अलग से अंदाज में फेंकती झील के ठहरे पानी में...

पत्थर झील के पानी की सतह टकराता और डूबने की बजाये फिर उछलता...

क्या जीवन की रेला पेली है.
कुछ चलती है कुछ ठहरी है.
जब मौन प्रखर हो व्यक्त हुआ
कहा वक्त ने हो गई देरी है.
सोचिये अगर देश की बागडोर राहुल गाँधी ,दिग्विजय सिंह ,कपिल सिब्बल , उमर अब्दुल्ला , अन्ना हजारे या बाबा रामदेव जी के हाथ में दी जाए तो स्थिति क्या होगी ?...
यूँ देखो तो जीवन में हर जगह आपको सभी तरह के लोग मिल जाएँगे कुछ अच्छे, कुछ बुरे, अच्छे और बुरे लोग आखिर कहाँ नहीं होते।
सिल्क की पार्श्वभूमी है इस भित्ती चित्र में.
झरना बना है एक सिल्क की चोटी से
जिसे मैंने कंघी से खोल दिया!
रंगीन सिल्क के टुकड़ों में से छोटे छोटे पत्ते काट ...
यूँ तो हालात ने हमसे दिल्लगी की है
जीने का शउर सिखाना था ,
कुछ इस अन्दाज़ में गुफ्तगू की है
एक चुल्लू चांदनी भी पी नहीं पाए*
*रात भर छलका शरद का चांद
नहीं छलती कल्पना उतना जितना यथार्थ ने छला है
जो सामने है वही एक सच है यह दिखलाने की कला में
न जाने कितनी बार मासूम एक सपना जला है
ओ दिसंबर ! जब से तुम आयेहो नये वर्ष की,
नईजनवरी मेरे दिल में उतर रही है।
ठंडी आई शाल ओढ़कर कोहरा आया
पलकों पर छिम्मी आई.....
लिखना कभी भी मेरी प्राथमिकता नहीं रही है,
मैं तो ढेर सारे लोगों से मिलना चाहता हूँ,
उनसे बातें करना चाहता हूँ...
उनके साथ नयी नयी जगहों पर जाना चाहता हूँ ...
बी जे पी हो या कांग्रेस ये सब के सब है एक जैस
सब दल जनता को भरमाते,
है बदल बदल कर अलग भेष मन बहलाते....
जी, सही पढ़ा आपने !
सकारात्मकता की बातें तो बहुत होती है,
हर पल हर घड़ी, हर नुक्कड़, गली-चौराहे पर !
जिसे देखिये वो सकारात्मकता के ही
उपदेश देता फिरता है !
आ गई हैं सर्दियाँ मस्ताइए।
बैठकर के धूप में सुस्ताइए।।
पर्वतों पर नगमगी चादर बिछी.
नहीं नहीं दिल्ली तो तब से है जब से पृथ्वी है I
जाने कितने युग- काल की साक्षी यहाँ की ज़मीन
और आबो- हवा का अपना वज़ूद रहा है I
भले हीं पहले यहाँ जंगल, पहाड़, खेत- खलिहान रहा हो
या फिर कोई अनजान बेनाम बस्ती रही हो I
नदी के किनारे हीं आबादी बसती है,
तो निःसंदेह यहाँ भी यमुना के किनारे आबादी रही होगी I
कितनी संस्कृति बदली और नाम बदला I
महाभारत काल का इन्द्रप्रस्थ धीरे- धीरे बदलते- बदलते
अंत में देहली और फिर दिल्ली में परिणत हुआ I
न जाने कितने बदलाव और बिखराव को देखा है दिल्ली ने I
धीरे धीरे बसी दिल्ली ने हम सभी को ख़ुद में समाहित कर लिया I
भले हीं हम किसी भी प्रदेश या भाषा के हों,
सभी का स्वागत किया है दिल्ली ने I ....
अन्त में कुछ ताजा कार्टून भी देख लीजिए!
मेरे प्रिय कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा सदा जीवित रहेंगे. नमन. http://kajalkumarcartoons.blogspot.com/

27 comments:

  1. बहुत आभार...उम्दा चर्चा!!

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  2. उम्दा लिंक संयोजन | बहुत बढ़िया चर्चा | आभार शास्त्री जी और विद्या जी | मेरी रचना को जगह देने के लिए धन्यवाद |

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  3. बहुत बढ़िया लिनक्स मिले ...आभार

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  4. बढिया चर्चा।
    सुंदर लिंक्स।

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  5. एक उम्दा चर्चा के लिए आभार शास्त्रीजी !

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  6. आज कार्टूनों ने बर्फ में भी गर्मी भर दी।

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  7. बहुत बढ़िया लिनक्स मिले धन्यवाद|

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  8. बढ़िया चर्चा |
    आभार ||

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  9. निवेदनःऊपर की लाइनें एकदम चिपकी मालूम होती हैं। थोड़ा स्पेस देकर प्रस्तुति की जाए तो अधिक रूचिकर होगा। आभार।

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  10. काफी मशक्कत से जुटाए लिंक आपने हमारे लिए।

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  11. सुन्दर और रोचक चर्चा. मुझे सम्मिलित करने और सूचना देने के लिए आभार.

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  12. तरह तरह की रचनाएं यहां शामिल हैं।
    बहुत सुंदर लिंक्स

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  13. मेरी पोस्ट चर्चा मंच पर रखने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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  14. aabhar sir .......meri post ka yaha lane ka aur itne sare achhe link se parichay karvane ka.....

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  15. उम्दा लिंक्स और बेहतरीन कार्टून ..बहुत आभार शास्त्री जी.

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  16. बहुत ही बढि़या लिंक्‍स संयोजन के लिए आभार .. ।

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  17. bahut achche links diye hain aapne ...fursat se padhne aana hoga ...meri rachna ko shamil karne me aapki sadbhavna mujh tak pahunchi hai ...par pathak gan to apni marji ke maalik hain ...bahut bahut shukriya ...

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  18. बढिया चर्चा... हमेशा कुछ नए लिंक मिल जाते हैं।

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  19. बढ़िया चर्चा... सुन्दर लिंक्स...
    सादर आभार

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  20. बहुत सुन्दर!
    हर तरह के उपयोगी लिन्क्स।

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  21. Bahut badhiya links mile.
    Meree post shamil kee....tahe dil se shukriya!

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  22. बहुत बढ़िया शास्त्रीजी...आपका
    आभार !

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  23. mere blog 'Saajha-sansaar' ko yahan sthan dene ke liy ebahut bahut aabhar Roopchandra ji.

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  24. Hameshakee tarah behad achha...meri rachana shamil kee....bahut,bahut shukriya!

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