चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, December 06, 2013

"विचारों की श्रंखला" (चर्चा मंचःअंक-1453)

आदरणीय सादर नमस्ते
बड़े खेद  के साथ कहना पड़ रहा है की हमारा नेट आज फिर खराब सुबह से चल रहा है.सोचा शाम को चर्चा कर लूँगा पर असमर्थ रहा. किसी तरह मेल कर पा रहा हूँ. बहुत दुःख के साथ यह भी प्रार्थना है जब तक मैं आबु-धाबी लौट नही जाता तब तक के लिए चर्चा मच से छुटी दें.वहाँ जाने  के बाद मैं आपसे सम्पर्क करूंगा। यहाँ नेट का सुधार सम्भव नही दिखता,तब तक के लिए क्षमा चाहता हूँ.
राजेन्द्र कुमार
--

आशा सक्सेना  
हूँ स्वतंत्रता की पक्षधर
पर हाथ बंधे हैं
आजादी का अर्थ जानती हूँ 
पर जीवन की हर सांस...
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"सबके मन को बहलाते हैं" 
बाल कृति "हँसता गाता बचपन" से
एक बालगीत
काँटों में भी मुस्काते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।

नागफनी की शैया पर भी,
ये हँसते-खिलते जाते हैं।
सबके मन को बहलाते हैं।।
हँसता गाता बचपन
--
छोटी सी सलाह
"देखो बेटा बहुत सारे पेरेंट्स नौकरी करते हैं सुबह जल्दी घर से जाते हैं उनके बच्चे भी अपना काम खुद करते हैं , है ना ? फिर खुद काम करना तो अच्छी आदत है आप अपना खुद का ध्यान तो रख ही सकते हो।  आप रोज़ रोज़ सज़ा पाते हो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता। प्रोमिस करो अब से रोज़ अपना बेग जमाओगे सभी कॉपी किताबें लाओगे और साफ सुथरे स्मार्ट बन कर आओगे। " 
चहल-पहल पर kavita verma

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सुनो...
तुम पूछती हो न कि 
तुमसे कितना प्यार करता हूँ मै...??
My Photo
Shabd Setu पर RAJIV CHATURVEDI

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किसी की लकीरों का 
किसी को समझ में आ जाना
कई दिन से देख रहा हूँ  
उसका एक खाली दीवार पर 
कुछ आड़ी तिरछी  
लकीरें बनाते चले जाना 
उसके चेहरे के हाव भाव के अनुसार 
उसकी लकीरों की लम्बाई का बढ़ जाना 
या फिर कुछ सिकुड़ जाना...
उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी

--
बिकाऊ सरकार 
आज मलाड - मुंबई स्थित जैन मंदिर तोड़ने आई बिकाऊ सरकार कई दिनों से देखा जा रहा हे की भारत में जो सब से ज़यादा पवित्र माने जाते हे, जो लोग सब से ज़यादा टैक्स भरते हे, जिनकी वजह से ये देश प्रगति पर हे उन जैन लोगो पे बार बार ये सरकार अत्याचार कर रही हे...
ZEAL

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लिफ़्ट (कहानी) 

Hindi Bloggers Forum International 

(HBFI) 
पर
DR. ANWER JAMAL 
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हाथ घड़ी की तरह पहनिए 
अपना वातानुकूलित संयंत्र 
(Personal AC) 
कबीरा खडा़ बाज़ार में 
पर 
Virendra Kumar Sharma 
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"चालीस साल का सफर" 
कलिका हो मन के उपवन की।
संगी-साथी साथी हो जीवन की।।

तुमसे ही मेरा घर-घर है,
सपनों का आबाद नगर है,
सुख-दुख में हो साथ निभाती,
तुलसी हो मेरे आँगन की।
संगी-साथी साथी हो जीवन की।।
उच्चारण
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ज्यूरी का गर्म पानी का श्रोत 
व 
किन्नौर की खतरनाक सड़के

जाट देवता का सफर पर 
SANDEEP PANWAR
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ज़िन्दगी

तमाशा-ए-जिंदगी पर 

Tushar Raj Rastogi 
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Wristify: Thermal Comfort 
via a Wrist Band

आपका ब्लॉग 

पर 
Virendra Kumar Sharma
 --
हिन्दी इंटरनेट टेक ब्लॉग ने 
लांच किया 
नया ब्लॉग एग्रीगेटर
Hindi Internet Technology
पर
farruq abbas
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अब दो जीमेल 
एक आईडी के साथ 
लॉग इन करना 
हुआ बहुत आसान

MyBigGuide पर Abhimanyu Bhardwaj

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बस ऐसी ही हूँ मैं ..

झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव

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जीतना हारना नहीं होता ...
प्यार बस चाहना नहीं होता 
रात भर जागना नहीं होता 
है तभी तक ख़ुशी ख़ुशी जब तक 
दर्द से सामना नहीं होता...
स्वप्न मेरे...........पर 

Digamber Naswa -
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भूल जाय दुष्कर्म, भक्त की चेते सेना-
पेशी साईँ की इधर, फूल बिछाते फूल | 
सेना है नारायणी, साईँ करो क़ुबूल | 
साईँ करो क़ुबूल, किन्तु नहिं जुर्म कबूला | 
झोंक आँख में धूल, सतत दक्षिणा वसूला ...
रविकर की कुण्डलियाँ

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गुरुमाँ आनंदमूर्ति को समर्पित 
हास्यकवि अलबेला खत्री की 
एक कविता

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कामी संत मलंग, अंग से अंग लगाये-

"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर

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रौशनी है के धुँआ ......

ज्ञानवाणी पर वाणी गीत 

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आंसुओं के मोल

रोना कभी नहीं रोना’, 
अमूमन ऐसा नसीहत देने वालों की कोई कमी नहीं है 
और रोने वाले को हंसाने के सभी कारगर प्रयास किये जाते हैं. 
रोना कोई नहीं चाहता, 
लेकिन रोना मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए 
बहुत अनिवार्य है...
देहात पर 
राजीव कुमार झा
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आँख का पानी...!
रोते हुए... सिसकते हुए...  
जाने क्या क्या कहे जा रहे थे आंसू... 
उन पर कभी नहीं रहा है मेरा वश...
अनुशील पर अनुपमा पाठक
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करिश्मा

ज़रूरत पर Ramakant Singh 

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कार्टून :-  
एग्‍ज़ि‍ट पोल वाले मौज ले रहे हैं 

काजल कुमार के कार्टून

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औरत : 
आदमी की गुलाम मात्र 

भारतीय नारी पर Shalini Kaushik

--
सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Nirjhar Times पर Brijesh Neeraj

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1-15 December 2013

टाबर टोळी 

(बच्चों के लिए देश का पहला अखबार) 
पर 
दीनदयाल शर्मा 
--
अच्छी फ़ोटो कैसे खींचें? 

छींटे और बौछारें 

पर 
Ravishankar Shrivastava 

20 comments:

  1. नेट की समस्या तो आम बात हो गयी हैक्या करें |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. विविध रंग लिये बहुआयामी है आज की चर्चा ! वैवाहिक वर्षगाँठ के लिये शास्त्री जी आपको व भारती जी को हार्दिक शुभकामनायें !

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  3. विविधतापूर्ण चर्चा. मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

    ReplyDelete
  4. शास्त्री जी के विवाह की चालीसवीं वर्षगांठ पर ढेरों शुभकामनाऐं ! आशा करतेहैं राजेंद्र जी फिर से उपस्थिति दर्ज करेंगे! उल्लूक का "किसी की लकीरों का किसी को समझ में आ जाना" को आज की सुंदर चर्चा में स्थान देने पर आभार !

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  5. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....
    आभार!

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  6. सुंदर चर्चा...
    सादर।
    एक मंच[mailing list] के बारे में---

    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
    ज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
    तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।


    एक मंच हम सब हिंदी प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों तथा हिंदी में रूचि रखने वालों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त कर पाएंगे कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    आप यहां क्लिक करें
    या  
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।
    इस समूह में पोस्ट करने के लिए,
    ekmanch@googlegroups.com
    को ईमेल भेजें
    [आप सब से भी मेरा निवेदन है कि आप भी इस मंच की सदस्यता लेकर इस मंच को अपना स्नेह दें तथा इस जानकारी को अपनी सोशल वैबसाइट द्वारा प्रत्येक हिंदी प्रेमी तक पहुंचाएं। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा

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  7. बढ़िया चर्चा -
    आभार आदरणीय-

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  8. "चालीस साल का सफर"
    उच्चारण
    बहुत बहुत शुभकामना, रहें सदा सानन्द |
    वर्षगाँठ चालीसवीं, रचता रविकर छंद |

    रचता रविकर छंद, शिल्प निर्दोष हमेशा |
    भरे कथ्य सद्भाव, कटे अवसाद कलेशा |

    स्वस्थ रहे मन-देह, परस्पर हाथ-थामना |
    पुत्र पौत्र परिवार, बहुत बहुत शुभकामना ||

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  9. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....
    आभार मुक्षे शमिल करने का ....

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  10. बढ़िया सूत्र व प्रस्तुति , मंच को धन्यवाद।

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  11. बहुत बढ़िया,बेहतरीन सूत्र ...!
    ----------------------------------
    Recent post -: वोट से पहले .

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  12. अभिनव प्रतीक नीम्बू से जीवन रस से बाल गीत।

    नीम्बू की कण्टक शाखा पर,
    सुरभित होकर बलखाते हैं।
    सबके मन को बहलाते हैं।।

    काँटों में भी मुस्काते हैं।
    सबके मन को बहलाते हैं।।

    --
    "सबके मन को बहलाते हैं"
    बाल कृति "हँसता गाता बचपन" से

    एक बालगीत
    "सबके मन को बहलाते हैं"

    काँटों में भी मुस्काते हैं।
    सबके मन को बहलाते हैं।।

    नागफनी की शैया पर भी,
    ये हँसते-खिलते जाते हैं।
    सबके मन को बहलाते हैं।।

    ReplyDelete
  13. एक बार जो पा गया, लोकतन्त्र में वोट।
    सात पीढियों के लिए, कमा गया वो नोट।।
    --
    जनसेवक के वास्ते, आजादी है मन्त्र।
    लेकिन जनता के लिए, है ये केवल तन्त्र।।

    वोट तंत्र पर सुन्दर कटाक्ष।

    उच्चारण

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  14. युग बीता चालिस सालों का,
    अब चाँदी सा रँग बालों का,
    प्रणयदिवस के महापर्व पर,
    यादें वाबस्ता यौवन की।


    संगी-साथी साथी हो जीवन की।।



    सुषमा हो कुल घर आँगन की

    मुबारक ये टिकाऊ निस्स्वार्थ दाम्पत्य प्रेम

    कलिका हो मन के उपवन की।
    संगी-साथी साथी हो जीवन की।।

    तुमसे ही मेरा घर-घर है,
    सपनों का आबाद नगर है,
    सुख-दुख में हो साथ निभाती,
    तुलसी हो मेरे आँगन की।
    संगी-साथी साथी हो जीवन की।।
    उच्चारण

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  15. इस अंक में स्थान देने के लिए आपका बहुत आभार!

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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