Sunday, January 28, 2018

"आया बसंत" (चर्चा अंक-2862)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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दोहे  

"देंगे नाम मिटाय"  

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

भारतमाता हाथ में, रखती है त्रिशूल।
टकराने की कभी भी, मत करना तुम भूल।।
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युद्ध हुआ यदि पाक से, देंगे नाम मिटाय।
फिर से वन्देमातरम, नक्शे में हो जाय।। 
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हे ईश्वर 

Purushottam kumar Sinha - 
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दोस्तों इस कथानक को पढ़कर आपको ऐसा ज़रूर लगेगा के संजय लीला भंसाली की फिल्म का शीर्षक पद्मावत क्यों रखा गया अलाउद्दीन खिलजी का पाश्चाताप क्यों नहीं रखा गया। जिसके हाथ सिर्फ आखिर में शहीद प्रेमियों की राख ही लगती है और जो अपने लम्पट मन की गुलामी करते -करते आखिर में ग्लानि से भर आता है और कहता है मनुष्य की वासनाएं अन्नत हैं स्थाई हैं इनका कोई अंत नहीं जबकि ये कायनात खुदा की यह सृष्टि एक मृगमरीचका है माया है छलना है। अफ़सोस यह जान ने से पहले ही वह सुपुर्दे ख़ाक हो जाता है। वह अपनी जीत पर पाश्चाताप करता है। पद्मिनी और नागमणि और राजा रत्न सेन की ख़ाक उसकी मुठ्ठी में होती है।

Virendra Kumar Sharma 
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परछाँई 

Purushottam kumar Sinha  
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प्यारा हिन्दुस्तान 

आजादी मिले समय हुआ
फिर भी भारत न आज़ाद हुआ
माँ भारती है आज भी गुलाम
न बहनो का है सम्मान हुआ
मेरे प्यारे देश में हम हुए है गुलाम
न रोटी है न कपडा है और न ही है मकान... 
aashaye पर garima 
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कानून है तब भी 

girl with dowry image के लिए इमेज परिणाम
लड़की की शादी और उसमे 
दहेज़ एक बहुत बड़ी समस्या है 
जिसके निबटारे के लिए देश में 
बहुत सख्त कानून बना है .जो इस प्रकार है -
दहेज निषेध अधिनियम, 1 9 61 में धारा 3
दहेज देने या लेने के लिए दंड... 

कानूनी ज्ञान पर Shalini Kaushik  

8 comments:

  1. शुभ प्रभात....
    आभार...
    सादर....

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  2. बहुत अच्छी वासंती चर्चा प्रस्तुति

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  3. सुंदर चर्चा, मुझे स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा

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  5. पापा की परियां

    कंधो पर झूलती बेटियों की किलकारियां
    शरारत से जेब से सिक्के चुराती तितलियां
    लेटे हुऐ बाप पर छलांग लगाती शहजादियां
    टांगों पर झूले झूलती यह जन्नत की परियां

    सोचता हूं बार बार सोचता हूं
    बाप बेटियों को कितना प्यार करता होगा
    सुबह सुबह जब काम के लिये निकलता होगा
    दिल में नामालूम सी कसक तो रखता होगा
    उसके जहन में ख्यालात कहर मचाते होंगे
    सुबह देर तक सोई बेटी के माथे को चूमना
    जल्द उठने पर उसको साथ पार्क ले जाना
    कभी उदास मन से बालकनी में तन्हा छोड़ जाना

    बाप कितना प्यार करता होगा आखिर कितना ?
    वक्त ही कितना होता है कितनी तेज है जिंदगी
    वो रुकना चाहता है लेकिन वो रुक नहीं सकता
    कभी कभी तो गली के नुक्कड़ से मुड़ते हुऐ
    एक नजर डालने के लिये भी वो रुक नहीं सकता
    उसे जाना होता है फिर लौट आने के लिये,

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  6. तेरा बाबा

    बूढे बाबा का जब चश्मा टूटा
    बोला बेटा कुछ धुंधला धुंधला है
    तूं मेरा चश्मां बनवा दे,
    मोबाइल में मशगूल
    गर्दन मोड़े बिना में बोला
    ठीक है बाबा कल बनवा दुंगा,
    बेटा आज ही बनवा दे
    देख सकूं हसीं दुनियां
    ना रहूं कल तक शायद जिंदा,
    जिद ना करो बाबा
    आज थोड़ा काम है
    वेसे भी बूढी आंखों से एक दिन में
    अब क्या देख लोगे दुनिया,
    आंखों में दो मोती चमके
    लहजे में शहद मिला के
    बाबा बोले बेठो बेटा
    छोड़ो यह चश्मा वस्मा
    बचपन का इक किस्सा सुनलो
    उस दिन तेरी साईकल टूटी थी
    शायद तेरी स्कूल की छुट्टी थी
    तूं चीखा था चिल्लाया था
    घर में तूफान मचाया था
    में थका हारा काम से आया था
    तूं तुतला कर बोला था
    बाबा मेरी गाड़ी टूट गई
    अभी दूसरी ला दो
    या फिर इसको ही चला दो
    मेने कहा था बेटा कल ला दुंगा
    तेरी आंखों में आंसू थे
    तूने जिद पकड़ ली थी
    तेरी जिद के आगे में हार गया था
    उसी वक्त में बाजार गया था
    उस दिन जो कुछ कमाया था
    उसी से तेरी साईकल ले आया था
    तेरा बाबा था ना
    तेरी आंखों में आंसू केसे सहता
    उछल कूद को देखकर
    में अपनी थकान भूल गया था
    तूं जितना खुश था उस दिन
    में भी उतना खुश था
    आखिर "तेरा बाबा था ना"

    deshwali.blogspot.com

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  7. मेरी प्रस्तुति को स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय शास्त्री जी।

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