Saturday, June 08, 2019

"सांस लेते हुए मुर्दे" (चर्चा अंक- 3360)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

प्रकाशन  

साहित्य सुधा में मेरी बालकविता  

साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019
शिव-शंकर को प्यारी बेल
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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सुट्टे की धमक 

मुकेश कुमार सिन्हा  
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सांस लेते हुए मुर्दे 

उसूलों पर जहाँ आँच आए,  
टकराना ज़रूरी है,  
जो ज़िंदा हो, तो फिर  
ज़िंदा नज़र आना, ज़रूरी है.... 
गोपेश मोहन जैसवाल  
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सूरज और दीया-बाती 

वो डूबते हुए अपनी थाती बाती को सौंप गया।  
बाती ने मिट्टी की काया को आधार किया 
अंधियारे में रोशनी की नाव ने  
यूँ दर्द का सागर पार किया   
अनुशील पर अनुपमा पाठक 

लघुकथा :  

निष्कासन 

झरोख़ा पर 
निवेदिता श्रीवास्तव 
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5 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति 👌
    सादर

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  2. मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  3. बहुत सुंदर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  4. सुन्दर चर्चा

    ReplyDelete

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