समर्थक

Sunday, February 20, 2011

रविवासरीय (20.02.2011) चर्चा

नमस्कार मित्रों!


मैं मनोज कुमार एक फिर हाज़िर हूं चर्चा के साथ।

My Photo

आइए आज पहले बात करें

फिल्‍म समीक्षा : 7 खून माफ की। यह समीक्षा प्रस्तुत की गई है चवन्नी चैप पर।

अजय ब्रह्मात्‍मज

विशाल भारद्घाज की हर फिल्म में एक अंधेरा रहता है, यह अंधेरा कभी मन को तो कभी समाज का तो कभी रिश्तों का होता है। 7 खून माफ में उसके मन के स्याहकोतों में दबी ख्वाहिशें और प्रतिकार है। वह अपने हर पति में संपूर्णता चाहती है। प्रेम, समर्पण और बराबरी का भाव चाहती है। वह नहीं मिलता तो अपने बचपन की आदत के मुताबिक वह राह नहीं बदलती, कुत्ते का भेजा उड़ा देती है। वह एक-एक कर अपने पतियों से निजात पाती है। फिल्म के आखिरी दृश्यों में वह अरूण से कहती है कि हर बीवी अपनी शादीशुदा जिंदगी में कभी-न-कभी आपने शौहर से छुटकारा चाहती है। विशाल भारद्घाज की 7 खून माफ थोड़े अलग तरीके से उस औरत की कहानी कह जाती है, जो पुरूष प्रधान समाज में वंचनाओं की शिकार है।
My Photo

अब

करते बात वही काजल की, जी हम नहीं मनोरमा पर श्यामल सुमन। सुनिए उन्हीं के लफ़्ज़ों में इस बेहतरीन ग़ज़ल के दो शे’र …


किसे खबर है अगले पल की
फिर भी सबको चिन्ता कल की
लड़ी न कोई जंग अभी तक
महिमा गाते खुद के बल की

My PhotoBest collection of short Hindi stories पर Pushpa Saxena बता रही हैं

अप्रत्याशित ऑफ़िस में उसे आता देख, सबकी निगाहें उसी पर टंग जातीं। यानी आज तक सब ठीक है। उन निगाहों में छिपा सवाल पल्लवी को अन्दर तक मथ जाता। पिछले एक-डेढ़ वर्ष में निखिल की हालत बद से बद्तर होती जा रही है। एक-एक करके सब सहानुभूतिपूर्ण स्वर में निखिल का हाल पूछतीं।
बाक़ी की कथा वहीं पढिए।


My Photoस्वास्थ्य-सबके लिए पर कुमार राधारमण ढूंढ लाए हैं

मोटापे की सर्जरी के लिए मची है होड़ । विराट कोहली के भाई रिकी कोहली १४८ किलो का था, सर्जरी के एक साल बाद वह अब ८३ किलोग्राम का हो गया है। चर्बी च़ढ़ने के पहले वह क्रिकेट खेलता था । अब एक बार फिर बल्ला भांजने की इच्छा जगी है।


My Photoचुनाव आयोग को एक सुझाव तो भाई हम नहीं यशवन्त माथुर ही दे सकते हैं। क्यों? चलिए उनसे ही पूछ लेते हैं। जवाब आया है -- जो मेरा मन कहे!! बढते इंटरनेट के प्रयोग के इस दौर में अब चुनाव आयोग को ऑनलाइन वोटिंग के विकल्प पर भी विचार करना चाहिए.
आप मिले हैं Kirtish Bhatt, Cartoonist से? अगर मिलें तो आपके मुंह से निकलेगा .. ‘दुनिया इधर की उधर हो जाए यह तो है

कार्टून: इसको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. देखिए उदाहरण

icc world cup 2011, cricket cartoon, cricket world cup cartoon, common man cartoon, manmohan singh cartoon, congress cartoonMy Photoशिक्षामित्र दे रहे हैं जानकारी

सरकार को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन में दखल का अधिकार नहीं;जैन समुदाय अल्पसंख्यकःपंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट। इस बात में कोई विवाद नहीं है कि हरियाणा में जैन समाज धार्मिक अल्पसंख्यक है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई निर्णयों में कहा है कि जिन शिक्षण संस्थायों को अल्पसंख्यक समाज स्थापित करता है, सरकारें उनके आंतरिक प्रबंधन में दखल नहीं दे सकती। खंडपीठ ने कहा कि प्रबंध समिति के आकार तय करने तथा प्रबंध समिति के निर्णयों पर सरकार ने समीक्षा करने के हरियाणा सरकार के निर्णय को कानूनी रूप से अवैध बताया है।

My Photoशिवम् मिश्रा के

जेहन में बसा है 25 जून 1983 - कपिल देव! मिश्र जी हम सके जेहन में भी।

अहा! वह था ऐसा सुनहरा  पल, आज तक हुआ न जिसका कल।
भारत की पहली 'विश्वविजय' की याद,  रहती है हरदम, हर पल॥


My Photoराकेश रोहित को हो रही है

हिंदी कहानी की रचनात्मक चिंताएं - राकेश रोहित। हिन्दी कहानी में एक शहर होता है जो गांव सा दीखता है, एक गांव होता है जो शहर सा दीखता है  और एक बिहार होता है जो किसी सा नहीं दीखता है. वैसे बिहार वाले चाहें तो इस पर गर्व कर सकते है कि इस 'बिहार' का विकास हिन्दी कहानी में बिहार से बाहर भी बहुत हुआ और नकली जनवाद का आतंक रचने में ये कहानियां अव्वल रहीं.
Sn Mishraपढें श्यामनारायण मिश्र का नवगीत :: गुप्त गोदावरी होकर बहो मुझमें बहो!

गुप्त गोदावरी होकर,

बहो मुझमें

बहो भीतर बहो!

हम उजड़े तट हैं,

अपनी पहचान यही

कंधों पर शव

वक्ष पर चिता है,

पर्वत हैं वे

नदियों को फेंकना-पटकना

आता है इनको

ये पिता हैं,

झरने से झील हो

सर पटकती रहो!

My PhotoSonal Rastogi का कहना है ‘

अपनी चाहत पा जाउंगी’।

सजदा सुबह शाम करो

तो माथे पर भी निशा पड़ते  है

टूटते है जितने ख्वाब

सब मेरे तलवो पे आके गड़ते हैं
मेरा परिचयडॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) जी आप

"बनाओ मन को कोमल" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

महावृक्ष है यह सेमल का,

खिली हुई है डाली-डाली।

हरे-हरे फूलों के मुँह पर,

छाई है बसन्त की लाली।।


My Photoतुम तुम और तुम... (गीत)--- ( डा श्याम गुप्त )


ज्ञान चेतना मान तुम्ही हो ,जग कारक विज्ञान तुम्ही हो |
तुम जीवन की ज्ञान लहर हो,भाव कर्म शुचि लहर तुम्ही हो |

जग कारक जग धारक तुम हो,तुम तुम तुम तुम, तुम ही तुम हो |
तुम तुम तुम तुम, तुम ही तुम हो,तुम ही तुम हो,तुम ही तुम हो |

Aravind Pandey : परावाणी : शाश्वत कविता :The Eternal PoetryAravind Pandey

जम्हूरियत में ताज को समझो न तुम जागीर

अपने ही फैसले से क्यों खुरच रहे हो तुम.

चहरे पे चढ़ा है जो सफेदी का मुलम्मा.

ताकत है बेशुमार दिया जिस अवाम ने.

उसके ही बर-खिलाफ लिख रहे हो फैसले..

My Photoआशा जी की सफलता प्रस्तुति

रश्मि प्रभा... की

बहुत कुछ खोना पड़ता है
एकलव्य की तरह
आगे बढ़ने लिये |
राह चुननी पड़ती है
उस पर चलने के लिये |


IMG_0558Anamika Srivastava की

शरारत


हम हैं कितने दीवाने तेरे ये तुम्हें क्या पता
हमने की जो भी खता उसके लिए अब न सता
जितना तरसा हूँ उसमें थोड़ा सता लेने तो दो
मुझको इक बार शरारत का मज़ा लेने तो दो
मेरा फोटोवन्दना को ज़ख्म…जो फूलों ने दिये तो

बदले अर्थ

न अश्क सच्चे होते हैं 

न रोना अर्थपूर्ण

मगर असर वो भी 

कर ही जाता है

शायद

हकीकत से भी ज्यादा

Om and Kamala DeepakSunil Deepak का डिमांड है

एक खिड़की खुली छोड़ देना। देखो ना कहाँ से कहाँ मन भटक गया है. मुझे लगता है कि जब अधिक स्नेह मिलता है तो ऐसे विचार ही जीवन को कुछ दिशा देने लगते हैं.
मेरा फोटोDR. PAWAN K MISHRA बता रहे हैं दिल्ली में परवेज़ मुशर्रफ होली खेले आय

दिल्ली  में परवेज़ मुशर्रफ होली खेले आय

छोड़ राग कश्मीर का फाग रह्यो सुनाय.

फाग रह्यो सुनाय मनमोहन के आँगन में

गिलानी को लपटाय अडवानी ने बाहन में.
My Photoपवन *चंदन*

पता चला है नुक्‍कड़ पर सांड घुसा : किसने देखा? पता चला कि हुजूर खुद ने बछड़े को पाला पोसा बड़ा सांड़ बनाया और उसके साउथ-एवेन्यू-माल पे त्रिशूल गुदवा दिया था. उसी बछड़े ने सींग उठाए तो अपने ब्लागर भाई बैल्ट कस के कानी-हाउस में बेड़ आए उसे अगर आनंद आना आरंभ हो गया है तो पूरे आनंद के लिए चूहे से कटवाइये
मेरा फोटोसंतोष त्रिवेदी से मित्रता के मायने ! क्या हैं? बहुत ही संवेदनशील और गंभीर विषय पर बात करने जा रहा हूँ.कई दिनों से मेरे मन में एक मंथन चल रहा है जिसे सबके साथ साझा कर रहा हूँ.मित्र शब्द से ज़ेहन में ऐसी तस्वीर बनती है जिसके आगे हम बिलकुल खुल जाते हैं,बिछ जाते हैं.मित्रता में औपचारिकता  नहीं होती,समान विचार कम आलोचना और मतभेद ज्यादा होते हैं.
मेरा फोटोMinakshi Pant का समर्पण

तू - तू , मैं - मैं तो हर कोई करता है 

खुद को साबित करने के लिए ही लड़ता है 

नफ़रत की इस दीवार को जो तुम ढहा दो

तो मैं मानूँ |

My PhotoDr.J.P.Tiwari की तान …

सखी मधुमास आयो री

खेतखलिहान में जुटा कृषक भी

गीत - बासंती गुनगुना रहा है

होली गीत का प्यारा सा मुखड़ा 

हे सखी! किसे ये सुना रहा है ?

देख सखी! मै सच कहती हूँ..,

मधुमास का ऋतु आ गया है.

मेरा फोटोअरविन्द सिसोदिया,कोटा, राजस्थान से बता रहे हैं

केंसर का बचाव : आयुर्वेद से .... । मैथी के पत्तों में ऎसा रासायनिक पदार्थ है जो सूजन एवं मधुमेह रोग प्रतिरोधी है। इसी तरह अश्वगंधा के पौधे में मिलने वाले रसायन कैंसर, अल्जीमर को रोकते हैं।
करण समस्तीपुरी ले बैठे हैं फुर्सत में : खट्टर पुराण। मेरा सौभाग्य है कि मैं खट्टर कका की तमाम रचानाएं पढ चुका हूं। और दावे के साथ कह सकता हूं कि मैथिली/हिन्दी साहित्य में इनके जैसा ह्युमरिस्ट न तो तभी कोई था और न अभी। खट्टर कका का तरंग साहित्यरस पिपासुओं के लिये तो पीयूष स्रोत है ही साथ ही यह ऐसा लाफ़िंग गैस है जिस से कोई नहीं बच सकता। रोते हुए आता है फिर भी हंसना ही पड़ेगा। बहुत दिन हो चुके हैं किन्तु स्मृति पटल में छुपे उनके हास्य-रस के मोती आपको भेंट करने की कोशिश कर रहा हूं।
प्रवीण पाण्डेय के फिर भी जीवन में कुछ तो है! जीवन को पूरा समझ पाना, एक सतत प्रयत्न है, एक अन्तहीन निष्कर्ष भी। पक्ष खुलते हैं, प्रश्न उठते हैं, समस्या आती है, समाधान मिलते हैं। प्रकृति एक कुशल प्रशिक्षक बन आपको एक नये खिलाड़ी की तरह सिखाती रखती है, व्यस्त भी रखती है, जिससे आने वाले खेलों में आप अच्छा प्रदर्शन कर सकें। कोई शब्द नहीं, कोई संप्रेषण नहीं, कोई योजना नहीं, कोई नियम नहीं, बस चाल चल दी जाती है, पाँसे फेक दिये जाते हैं, अब आप निर्धारित कर लें कि आपको क्या करना है?
मेरा फोटोSadhana Vaid की प्रस्तुति छज्जू का चौबारा। आज तो आपको 'छज्जू के चौबारे' में लेकर अवश्य जाना है जहाँ कला और साहित्य की निर्मल धारा अविरल प्रवाहित होती है और वहाँ उपस्थित हर एक व्यक्ति उस ज्ञान गंगा में गोते लगा कर पूर्णत: निर्मल एवं पवित्र हो जाता है !
मेरा फोटोVijai Mathur बता रहे हैं सीता का विद्रोह। महारानी सीता जो ज्ञान-विज्ञान व पराक्रम तथा बुद्धि में किसी भी प्रकार राम से कम न थीं उनकी हाँ में हाँ नहीं मिला सकती थीं.जब उन्होंने देखा कि राम उनके विरोध की परवाह नहीं करते हैं तो उन्होंने ऋषीवृन्द की पूर्ण सहमति एवं सहयोग से राम-राज्य को ठुकराना ही उचित समझा.राम क़े अधिनायकवाद से विद्रोह कर सीता ने वाल्मीकि मुनि क़े आश्रम में शरण ली वहीं लव-कुश को जन्म दिया और उन्हें वाल्मीकि क़े शिष्यत्व में शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया.
My Photoदेखिए यमुना, Kailash C Sharma की नज़र से।


है कहाँ  गया कान्हा तेरा यौवन साथी,
हो गये मौन क्यों आज मधुर बंसी के स्वर।
खो गयी कहाँ पर राधा की वह मुक्त हंसी,
लुट गये कहाँ पर सखियों के नूपुर के स्वर।
मेरा फोटोसंगीता पुरी बता रही हैं

मीन लग्‍नवालों के विभिन्‍न संदर्भों का आपस में सहसंबंध ... | मीन लग्‍न की कुंडली के अनुसार समस्‍त जगत में चमक बिखेरने वाला सूर्य षष्‍ठ भाव का स्‍वामी होता है और यह जातक के रोग , ऋण , शत्रु या अन्‍य प्रकार के झंझट का प्रतिनिधित्‍व करता है। इसलिए अपने नाम यश को फैलाने के लिए मीन लग्‍न के जातक किसी प्रकार के झंझट को हल कर प्रभाव बढाने में विशेष दिलचस्‍पी रखते हैं।
मेरा फोटोDr (Miss) Sharad Singh का एक और शोधपूर्ण आलेख - प्राचीन भारत में देह-शोषित स्त्रियां। प्राचीन भारत के समाज में गणिकाओं और देवदासियों का भी विशिष्ट स्थान था। ये गणिकाएं और देवदासियां नृत्य, संगीत तथा वादन  द्वारा जनसाधारण का मनोरंजन किया करती थीं। गणिकाओं और देवदासियों में अन्तर था, गणिकाएं जिन्हें नगरवधू भी कहा जाता था, नगर के प्रत्येक व्यक्ति के प्रति समर्पित होती थीं जबकि देवदासियां मन्दिर के प्रति समर्पित होती थीं।  सिन्धु घाटी से उत्खनन में प्राप्त नर्तकी की मूर्ति के बारे में कुछ विद्वानों का मत है कि यह राजनर्तकी अथवा गणिका की भी हो सकती है। सिन्धु सभ्यता में नृत्य एवं गायन का प्रचलन था अतः इस तथ्य को मानने में कोई दोष दिखाई नहीं देता है कि सैन्धव युग में सार्वजनिक मनोरंजन के लिए जन को समर्पित नर्तकिएं रही होंगी।


आज बस इतना ही।
अगले हफ़्ते फिर मिलेंगे।

24 comments:

  1. आज की चर्चा बहुत बढ़िया रही!
    मनोज कुमार जी!
    आपकी टिप्पणियाँ बहुत महत्वपूर्ण है!

    ReplyDelete
  2. कई आयाम समेटे अच्छी चर्चा |आभार मेरी कविता
    सम्मिलित करने के लिए |
    आशा

    ReplyDelete
  3. भाई आप नि:संदेह बहुत मेहनत से चर्चा तैयार करते हैं. समग्र. साभार.

    ReplyDelete
  4. आज की चर्चा कुछ हट कर और बहुत आकर्षक लग रही है ! मेरे संस्मरण को आपने इस लायक समझा और इसमें स्थान दिया इसके लिये आपकी आभारी हूँ ! सभी लिंक्स बहुत ही महत्वपूर्ण हैं और सभीको पढने की तीव्र इच्छा है ! धन्यवाद एवं शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  5. एक बार फिर महत्वपूर्ण लिक्न्स से सजी चर्चा प्रस्तुत करने के लिए शुक्रिया मनोज भाई साब
    चर्चा मंच पर आप लोग वाकई काफी मेहनत कर रहे हैं
    साहित्य सेवा के लिए आप सभी का सादर अभिवादन

    ReplyDelete
  6. मनोज जी, नमस्कार!
    आज की चर्चा वाकई कुछ अलग हट कर है और चयन तो लाजवाब... अभी तो केवल एक नजर शीर्षक पर ही डाला है, विधिवत थोड़ी देर बाद पढूंगा. मेरी रचना को स्थान दिया आपने इस मंच पर, इसके लिए बहुत -बहुत आभार !

    ReplyDelete
  7. मनोयोग से की गयी आज की चर्चा अद्भुत है ...लिंक इस प्रकार सजाये हैं जिनको पढ़ कर सारी ही पोस्ट पढने की उत्सुकता हो रही है ...आभार

    ReplyDelete
  8. चुनिन्दा लिंक ले सजी बेहतरीन चर्चा. आबार सहित...

    ReplyDelete
  9. बढ़िया चर्चा ...आभार सहित

    ReplyDelete
  10. बेहद उम्दा चर्चा ... मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार !

    ReplyDelete
  11. बहुत ही सुंदरता से सजाया है आपने आज का चर्चा मंच...बहुत सारे उपयोगी लिंक्सों का संकलन....

    ReplyDelete
  12. आपका यही अन्दाज़ आपको सबसे अलग करता है……………बेहद खूबसूरत लिंक्स सजाये हैं…………सार्थक चर्चा…………आभार्।

    ReplyDelete
  13. Bahut achhe links ke saath bahut badiya saarthak charcha prastuti ke liye aabhar.
    Bahut hi mehnat se aap log charchamanch ko sajate hain, iskeliye aapka bahut bahut dhanyavaad!

    ReplyDelete
  14. मनोज जी ने एक बार फिर मेरे लेख को यहाँ स्थान दिया उसके लिए धन्यवाद.एनी अछे-अछे लिक्स से परिचित करने का आभार.

    ReplyDelete
  15. आज का चर्चा मंच काफी रोचक और आकर्षक बन पड़ा है। साधुवाद।

    ReplyDelete
  16. मनोज जी,
    चर्चा मंच के इस रविवासरीय चर्चा में मेरे लेख को शामिल करके आपने मेरे लेखन को जो स्नेह-मान दिया है उसके लिए मैं आपकी अत्यंत आभारी हूं।

    आपने बहुत श्रम से बहुत जानकारी भरे लिंक्स प्रस्तुत किए है। साधुवाद है आपको।

    चर्चा मंच नि:संदेह एक स्वस्थ-सुंदर वैचारिक धरातल वाला मंच है और इसे यह सुंदर देने का श्रेय आप सभी मंचकारों को है। आपका मंच विभिन्न परिस्थितियों में रहते हुए अभिव्यक्ति प्रकट करने वालों को वैचारिक स्तर पर जोड़ने का पुनीत कार्य कर रहा है। यह यात्रा यूं ही सतत जारी रहे...यही कामना है।

    पुन: आभार।

    ReplyDelete
  17. बहुत सुन्दर चर्चा..सुन्दर लिंक्स मिले...मेरी रचना को चर्चा में शामिल करने के लिए धन्यवाद.

    ReplyDelete
  18. स्वास्थ्य-सबके लिए ब्लॉग का आभार स्वीकार किया जाए।

    ReplyDelete
  19. प्रायः सबकी पसंद का कुछ न कुछ।

    ReplyDelete
  20. बहुत ही प्रभावशाली, सतरंगी और सार्थक चर्चा रही आज की ।.....बहुत सोच समझ कर -अनेक रंग लिए हुए है ...आपका आभार...

    ReplyDelete
  21. मनोज जी ! बहुत सशक्त चर्चा... अच्छे लिंक्स... मनोज जी समयाभाव की वजह से या फिर ब्रोडबेंड की गडबडी से मै समय पर टिपण्णी भी नहीं कर पाती... और देर से पहुँचती हूँ ... लेकिन देर से भी पहुचने के बाद भी हमें लाभ ही मिलता है...

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin