Followers

Friday, December 14, 2012

शुक्रवारीय चर्चामंच (1093) भरें ‘प्रीति’ से ‘प्रान’ रे !


आज की शुक्रवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते आप सब का दिन मंगलमय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 

त्रिवेणी at त्रिवेणी, *माहिया** * *डॉ ज्योत्स्ना शर्मा* *1* *रुत बदली बदली है* *अपना राज लगे** * *अपनी** -सी ढपली है * *2* *हम फिर से गा**एँगे* *बीत गए बरसों** -------इस गुलाबी सर्दी में ज्योत्स्ना जी के माहिया को गुनगुनाइए और  मजा उठाइये 

छत्तीसगढ़ी घनाक्षरी :

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) at अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ) - 
*हेमंत ऋतु* (1) शरद ला बिदा देके , आये हे हेमंत ऋतु कँपकपासी लागथे , भुर्री ला जलावौ जी धान के मिंजाई होगे,रबी के बोवाई होगे नवा मूंगफल्ली आगे, भूँज के खवावौ जी | -----हेमंत ऋतु  में अरुणकुमार जी कितना मजा करते हैं कुछ आपको भी सलाह दे रहे हैं ऋतु का भरपूर आनंद उठाइये।
  

एक मिसाल -मलाला

रश्मि प्रभा... at वटवृक्ष - गिरेबां हो तो देखना कुछ बाकी है क्या .... * ** **रश्मि प्रभा * * ** ** 
जो इतनी सी उम्र में नारी शक्ति के लिए एक बहादुरी की मिसाल बन गई उस मलाला को आज कौन नहीं जानता पढ़िए उसके विषय में बटवृक्ष पर 

विदाई गुडिया की ... सतीश सक्सेना

सतीश सक्सेना at मेरे गीत------सतीश जी  ने  अपनी गुड़िया की विदाई पर उमड़े अहसासों से हमारी यादें भी ताजा कर दी और आँखे नम  हो गई   

मलाल है जिंदगी से ,.....

udaya veer singh at उन्नयन (UNNAYANA) - हमारे समाज की ये एक ऐसी तस्वीर है जिसे देख कर शर्म आती है अपने प्रशासन पर और ऊपर वाले से भी शिकायत होती है |

मुकुर(यथार्थवादी त्रिगुणात्मक मुक्तक काव्य)()ऊँचे रिश्तेप्यारके | () भरेंप्रीतिसेप्रानरे ! (प्रसाद तथाओज गुण का समन्वय)

Devdutta Prasoon at प्रसून - 
प्रीत  बिना जीवन सूना प्रीत बिना जग नाही रे ----कुछ ऐसा ही समझा रहे हैं प्रसून जी चलिए पढ़ते हैं   

"उत्तराखंड के प्रथम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी का निधन"

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) at शब्दों का दंगल - 
दुखद सूचना पर जीवन का अंतिम सच यही है

बीकानेर-जूनागढ़ किले के संग्रहालय में अनमोल चित्रकारी शस्त्रों का जखीरा Bikaner-The great painting and old weapon in Junagarh fort

संदीप पवाँर (Jatdevta) at जाट देवता का सफर-------संदीप भाई नई- नई जगह ही नहीं दिखा रहे हैं वहां की कलाकृतियों से भी परिचय करा रहे हैं जरा देखिये तो सही !!

उपस्थित की उपेक्षा : अनुपस्थित की तलाश

noreply@blogger.com (विष्णु बैरागी) at एकोऽहम् - 
हाँ सच में ऐसा होता है मैंने भी कई बार महसूस किया शादी ब्याह जन्मदिन आदि के आयोजनों में मेजबान सीधे पूछते हैं अरे फंला क्यूँ नहीं आया जैसे हमने आके तो गुनाह ही कर दिया क्या आपको भी कभी ऐसा  महसूस हुआ ??

लो !!! टूट के बिखर गई ...मेरी भी माला ...

यादें....ashok saluja . at यादें.
ये मोती बहुत कीमती होते हैं हर कोई चाहता है की प्रेम रुपी माला में एक साथ रहें यही माला टूट जाएँ मोती बिखर जाएँ तो दिल पर क्या बीतती है आइये पढ़ें 

राधा जानती है

swati at swati - 
राधा साँवले के भाल को सोहे ऐसा चन्दन घिसती है , कभी पन्ना,तो कभी कैनवस पकड़ती है बिरह के गीत गाती

इस अलौकिक प्रेम के क्या कहने जिसमे एक दूसरे  के मन की बात एक दूसरे  का दिल पहले से जानता हो राधा कृष्ण के इस प्रेम के सम्मुख नतमस्तक दुनिया सारी |

हमको रखवालो ने लूटा,

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया at काव्यान्जलि-----
जब अपने ही लूटने लगे रक्षक ही भक्षक बन जाएँ तो किस पर विश्वास करें ।विचारणीय है 

कहो ज़िंदगी...

डॉ. जेन्नी शबनम at लम्हों का सफ़र -
जिंदगी कभी हंसाती कभी रुलाती क्या क्या भेद छुपाती कभी कभी जिंदगी से गुफ्तगू करना अच्छा लगता है पढ़िए जेन्नी शबनम जी जिंदगी से क्या पूछ रही हैं |

क्या आप 31 दिसंबर 2012 की रात को 10 बजे मुझे एक मिनट का समय देंगे?

प्रबोध कुमार गोविल जी काफी वक़्त दे रहे हैं सोचने का सोच समझ कर उत्तर दीजिये कहना पड़ता है  एक एसा ब्लॉग जो फल की इच्छा किये बिना निःस्वार्थ अपनी मंथर गति से आगे बढ़ता रहता है अपने कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाते हैं गोविल जी मुझे उनका ब्लॉग बिना किसी अपेक्षा के पढ़ना  अच्छा लगता है  आप भी पढ़ कर देखिये |

Mayka

Neelima sharrma at WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION - मायका एक ऐसा शब्द जिसको सुनकर ही एक स्त्री की आँखों में चमक जाती है और अपनी पुरानी  यादों   में जीने लगती है देखिये नीलिमा शर्मा जी भी क्या अपने  अतीत में खो गई हैं ??

गूंगा गांव कैसे कहे

रघुनाथसिंह ''यादवेन्द्र'' at मेरे काव् संग्रह - शहरों की सूरत बदली तो गाँव भी बदले पहली सी सूरत पहली सी आवाज़ कहाँ 
  

एक अहम् आलेख - अवश्य पढ़िए

ZEAL at ZEAL
मेरी भी सलाह है अवश्य पढ़िए शायद आपके काम का हो |
  

" कहाँ है आचरण?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ अगले मंगल वार  मिलूंगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय-बाय! 

15 comments:

  1. सुन्दर चर्चा।
    राजेश कुमारी जी आपका आभार।

    ReplyDelete
  2. मुझे नहीं लगता मेरी कवितायेँ /लेख कब , कहाँ, कैसे उधृत /प्रकाशित हुए ,जानने की ललक या जरुरत नहीं समझी | परन्तु आप ने मेरे जीवन को अत्यधिक प्रभावित करने वाले द्रश्य को देख, प्रतिक्रिया देने वाले मेरे उद्दगारों को प्रबुद्ध वर्ग के समक्ष रख मेरी संवेदना को बल दिया है ....जिसके लिए मैं आपको साधुवाद देता हूँ ....शेष आप की प्रतिभा व प्रतिष्ठा के क्या कहने .....

    ReplyDelete
  3. सुंदर लिंक्स से सुसज्जित बढ़िया चर्चा |

    ReplyDelete
  4. सुंदर लिंक्स के साथ दी गयी आपकी टिप्पणिया प्रभावशाली हैं राजेश जी !
    आभार आपका !

    ReplyDelete
  5. आभार आपका राजेश कुमारी जी ...
    खुश रहें!

    ReplyDelete
  6. फल अगम तप तपन खींच बदरा जार बरसाए ।
    सरद सिर हेमंत सींच सीतल सिसिर सुहाए ।।

    ReplyDelete
  7. फल अगम तप तपन खींच बदरा जर बरसाए ।
    सरद सिर हेमंत सींच सीतल सिसिर सुहाए ।।

    ReplyDelete
  8. मेरी रचना को मंच में स्थान देने के लिये आभार,,,राजेश कुमारी जी,,,

    ReplyDelete
  9. अपने ब्‍लॉग को यहॉं देख अच्‍छा लगा। उपकृत हुआ। आभार और धन्‍यवाद।

    ReplyDelete
  10. सुंदर और सुनियोजित चर्चा | अच्छे लिंक्स लेकर आई हैं आप |

    ReplyDelete
  11. @ मलाल है ज़िंदगी से......

    शब्द दिए हैं पीर को, मर्म छू रहे भाव
    तूफानों से किस तरह, लड़ पाएगी नाव ||

    ReplyDelete
  12. @ मलाल है ज़िंदगी से......

    शब्द दिए हैं पीर को, मर्म छू रहे भाव
    तूफानों से किस तरह, लड़ पाएगी नाव ||

    ReplyDelete
  13. @ लो ,टूटके बिखर गई मेरी भी माला.............

    कब मोती लेकर भला , आया था इस देश
    जो मेरा था ही नहीं, उसपर क्यों हो क्लेश ||


    ReplyDelete
  14. Aapne to yah kar tareef kar dee ki "fal" ki ichchha rakhe bina aage badhne waala blog ...lekin yahan to falon se lade ped khade hain, samajh me nahin aa raha,kise chhoden, aur kise padhen? Shukriya.

    ReplyDelete
  15. राजेश कुमारी जी .....मेरी रचना को मंच में स्थान देने के लिये आभार...........देर से आने के लिए क्षमा पार्थी हूँ . बहुत सुन्दर लिंक्स पढने को मिले . तहे दिल से आभारी हूँ

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

जानवर पैदा कर ; चर्चामंच 2815

गीत  "वो निष्ठुर उपवन देखे हैं"  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')     उच्चारण किताबों की दुनिया -15...