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Sunday, December 23, 2012

“महिला पर प्रभुत्व कायम” (चर्चा मंच-1102)

मित्रों!
रविवार के लिए अपनी पसंद के कुछ सामयिक लिंक प्रस्तुत कर रहा हूँ।
ओ देश के कर्णधारों ……अब तो जागो
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
कुम्भकर्णी नींद में सोने वालों अब तो जागो ओ देश के कर्णधारों ……अब तो जागो क्या देश की आधी आबादी से तुम्हें सरोकार नहीं क्या तुम्हारे घर में भी उनकी जगह नहीं क्या तुम्हारा ज़मीर इतना सो गया है जो तुम्हें दिखता ये जुल्म नहीं क्या जरूरी है घटना का घटित होना तुम्हारे घर में ही क्या तभी जागेगी तुम्हारी अन्तरात्मा भी क्या तभी संसद के गलियारों में ये गूँज उठेगी क्या उससे पहले ना किसी बहन, बेटी या माँ की ना कोई पुकार सुनेगी अरे छोडो अब तो सारे बहानों को अरे छोडो अब तो कानून बनाने के मुद्दों को अरे छोडो अब तो मानवाधिकार आदि के ढकोसलों को क्या जिस की इज़्ज़त तार तार हुई जो मौत से दो चार हुयी क्या ...
दरिंदगी
Akanksha

शरीर मैं नासूर सा इस समाज में जन्मा कैसा यह दरिंदा जिसने सारे नियम तोड़ सारी कायनात को शर्मसार कर दिया उसकी सबसे हसीन कृति को उसकी अस्मिता को निर्लज्ज हो दानव की तरह तार तार कर दिया एक पल को भी नहीं सोचा वह भी किसी की कुछ लगती होगी माँ,बहन पत्नी सी होगी प्रेमिका यदि हुई किसी की अस्मत फिर भी महफूज होगी किसी की अमानत होगी बहशियाना हरकत से वह क्या कर गया…
इन्सान बस एक ही डर से डरता है -- मौत का डर !
अंतर्मंथन
दिल्ली में हुई बलात्कार की जघन्य घटना से न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरा हिंदुस्तान आक्रोश में भर गया है। सडकों पर , गलियों में , न्यायालय के सामने यहाँ तक कि राष्ट्रपति भवन के आगे भी युवाओं ने जमकर प्रदर्शन किये हैं। फेसबुक पर, ब्लॉग्स पर , समाचार पत्रों और टी वी चैनलों पर सभी जगह लोग एक जुट होकर इस घटना से इतने क्षुब्ध हैं कि अपराधियों के लिए सब मौत की सज़ा की फरियाद कर रहे हैं। भले ही कानून में फांसी की सज़ा रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर केसिज में ही देने का प्रावधान है। लेकिन इस घटना की गंभीरता को देखते हुए अपराधियों पर किसी तरह का रहम मानवता के विरुद्ध ही होगा
नहीं हूँ मैं माँस-मज्जा का एक पिंड
शब्द-शिखर

नहीं हूँ मैं माँस-मज्जा का एक पिंड जिसे जब तुम चाहो जला दोगे नहीं हूँ मैं एक शरीर मात्र जिसे जब तुम चाहो भोग लोगे नहीं हूँ मैं शादी के नाम पर अर्पित कन्या जिसे जब तुम चाहो छोड़ दोगे नहीं हूँ मैं कपड़ों में लिपटी एक चीज जिसे जब तुम चाहो तमाशा बना दोगे। मैं एक भाव हूँ, विचार हूँ मेरा एक स्वतंत्र अस्तित्व है ठीक वैसे ही, जैसे तुम्हारा अगर तुम्हारे बिना दुनिया नहीं है तो मेरे बिना भी यह दुनिया नहीं है। फिर बताओं तुम क्यों अबला मानते हो मुझे क्यों पग-पग पर तिरस्कृत करते हो मुझे क्या देह का बल ही सब कुछ है आत्मबल कुछ नहीं खामोश क्यों हो जवाब क्यों नहीं देते.....
हर स्तर पर महिला पर प्रभुत्व कायम
कबीरा खडा़ बाज़ार में

हर स्तर पर महिला पर प्रभुत्व कायम करने उसका दमन करने की बलवती इच्छा मर्द पाले रहता है उसी की विकृत परिणिति होता है बलात्कार जिसका मकसद उसका तन मन रौंदना ही नहीं परिपूर्ण दमन है किसी जंगली हिंस्र पशु की तरह बिना किसी उद्देश्य के जब तब टूट पड़ता है उस पर कथित पेशीय बल धारी आधुनिक मानव .और ऐसा जघन्य अपराध करके वह साफ़ बच जाता है लचर कानूनों के चलते जिनका किर्यान्वयन भी कानूनी तौर पर नहीं अपराधी की शक्ल और हैसियत देख के होता है . बलात्कार कोई अकेला अपराध नहीं है औरत के खिलाफ .यह एक लाइलाज दीर्घावधि से चला आरहा घातक रोग है….
Madhu Singh:Bs Ek Bar
Benakab

* बस एक बार * लपटें, खुद-ब- खुद उठ जायगी चिनगारियो से बस,एक बार आप जरा खुद को तो आजमाईए खुद - ब- खुद मुड़ जायगा रुख आन्धिओं का बस,एक बार आप जरा हिम्मत तो दिखाईए बिस्फोट, खुद-ब- खुद हो जायगा चंद लमहों में बस,एक बार आप तीली माचिस की तो जलाईए बेड़ियाँ मजबूरिओं की ख़ुद- ब -ख़ुद खुल जायगी बस, एक बार आप अपने कदमों को तो बढाईए बुज़दिली,खुद -ब -खुद बन कर धुवां उड़ जायगी बस,एक बार आप आग अपने सीने में तो जलाईए खुद-ब-ख़ुद मुड़ जायगा रुख नदी का अपनी तरफ बस,एक बार आप मशालें अपने दिल ..
Tips Hindi Mein / टिप्स हिंदी में

subscribe popup box- एक पॉपअप बाक्स में पायें तीन सबकराईब आप्शन [image: Subscription-popup-box] जैसा कि इस पोस्ट की टाइटल से जाहिर है कि एक ही पॉपअप बाक्स में पायें तीन सब्क...
Tech Prévue · तकनीक दृष्टा

Blogger Posts में Google+ Mention कैसे प्रयोग करें? - How to use Google+ Mention inside Blogger Posts? अब ब्लॉगर (Blogger) पर भी फेसबुक और डिस्कस (Facebook and DISQUS) की तरह आप किसी मित्र का नाम लिखकर उसे अपनी...
बाल सजग
शीर्षक : हो रहा विवाद है 
 हो रहा विवाद है दूर कहीं एक स्थान है । जो देखने में पर्वत के सामान है ।। वहां जाने का अनोखा विचार है । पर उस रास्ते में नहीं कोई इंसान है ।।

काश तुम कंप्यूटर होती।

Vyom ke Paar...व्योम के पार

आप कहाँ हैं ?यूँ मौन क्यूँ हैं?- पिछले कई सालों से शायद २००७ के बाद से उस नामी-गिरामी हस्ती के बारे में कहीं कोई खबर सुनायी नहीं दी तो लगा कि एक आवाज़ मैं भी दे कर देखूं , शायद कोई जवाब...
शस्वरं

सुनेगी जो सच , तिलमिलाएगी दिल्ली ! 
पेश है एक मुसलसल ग़ज़ल चाहें तो ग़ज़लनुमा नज़्म कहलें यहां दिल्ली महज़ दिल्ली नहीं । कभी यह हिंदुस्तान की राजधानी है , कभी एक महानगर…।
अजित गुप्ता का कोना
पुरुषों की स्‍वतंत्रता - अभी एक टिप्‍पणी पढ़ी, “शादी के बाद भी आप हँस रहे हैं, यह क्‍या कम है?” प्रतिदिन ऐसी ही ढेरों बातों से हमारा साक्षात्‍कार होता है। विवाह को बंधन, स्‍वतंन्त्रता..
धान के देश में!
गलती स्वीकारने का वादा किया था, सो निभा रहा हूँ- 23 नवम्बर 2009 को मैंने अपने इसी ब्लोग में एक पोस्ट लिखा था *"क्यों उछाल रही है मीडिया सन् 2012 को? ...."
लालित्यम्
हिन्दी के ब्लागों की क्या यही नियति है? - * कुछ अख़बारों द्वारा विभन्न ब्लागों से सामग्री लेकर नियमित रूप से प्रकाशित की जाती है .पूरे के पूरे आलेख और साहित्यिक रचनायें वे अपनी ओर से अपने अख़बार ...
काव्य का संसार
जूताचोर
जूताचोर * यूरोप के चर्चों में देखा ,
सब जूते पहने जाते है तुर्की की मस्जिद में जूते ,संग थैली में ले जाते है हम तो मंदिर के बाहर ही,है जूते खोर...
टिहरी बाँध : इंजीनियरिंग कार्यकुशलता का अद्भुत नमूना !
मुसाफ़िर हूँ यारों ...
अगर आपके समक्ष ये प्रश्न करूँ कि टिहरी (Tehri) किस लिए मशहूर है तो शायद दो बातें एक साथ मन में उभरें। एक तो सुंदरलाल बहुगुणा का टिहरी बाँध (Tehri Dam) के खिलाफ़ संघर्ष तो दूसरी ओर कुछ साल पहले बाँध बन जाने के बाद पूरे टिहरी शहर का जलमग्न हो जाना। टिहरी एक ऐसा शहर था जो अब इतिहास के पन्नों में दफ़न हो गया है। आज उसकी छाती पर एक भारत का सबसे विशाल बाँध खड़ा है। पर जिसने वो शहर नहीं देखा हो वो (अगर ये विषय आपकी पसंद का है तो पूरा लेख पढ़ने के लिए आप लेख के शीर्षक की लिंक पर क्लिक कर पूरा लेख पढ़ सकते हैं। लेख आपको कैसा लगा इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया आप जवाबी ई मेल या वेब साइट पर जाकर द...
ऐसे समाज को फांसी पर लटका दिया जाये -लघु कथा
भारतीय नारी

* aise [image: Seagull collects a puffin]* *अस्पताल के बाहर मीडियाकर्मियों व् जनता की भीड़ लगी थी .अन्दर इमरजेंसी में गैंगरेप की शिकार युवती जिंदगी व् मौत से जूझ रही थी .मीडियाकर्मी आपस में बातचीत कर रहे थे -''अरे भाई लड़की का नाम व् पता बदलकर छापना ...
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अशोकनामा
नीव
नीव ने कोशिश की गुहार लगाने की कंगूरे के द्वार पर कंगूरे ने कहा ये जुर्रत चलाओ लाठियां नीव हारी नहीं भागी भी नहीं हाँ ! नीव सरक रही है धीरे-धीरे हा !...
फेसबुक में विडियो चैट कैसे करें ?
मास्टर्स टेक टिप्स

कल फ्राइडे अवकाश के बाद आज समय मिला ,आज मै आपको फेसबुक पर विडियो चैट करने का तरीका भी बता देता हूँ। मुमकिन है की बहुत सारे लोगों को इसका पहले से ही पता होगा। लेकिन ये पोस्ट उन लोगों के लिए जरुर फायदेमंद होगी जिन्हें इसका तरीका नही पता। खैर मै आपको स्टेप बाय स्टेप इसका तरीका बता देता हूँ। आप इन स्टेप्स को फ़ॉलो करें।उम्मीद है की आप अपने कंप्यूटर में आसानी से फेसबुक विडियो चैट की सैटिंग कर लेंगे
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मेरा फलसफा और मेरा इम्तिहान
एकोऽहम्
कल अपराह्न, मोबाइल की घण्टी से झपकी खुली। उन्होंने न तो अपना नाम बताया और न ही शहर का। मेरी, कलवाली पोस्ट का हवाला देते हुए बोले - ‘आपकी बातें सच कम और नसीहतें ज्यादा लगती हैं। अच्छी तो लगती हैं लेकिन विश्वास नहीं हो पाता। सच-सच बताइए! आपकी कथनी और करनी में कोई अन्तर नहीं होता?’ मैंने कहा - ‘होता है। किन्तु यथासम्भव कम से कम। किन्तु मैंने ब्लॉग में जो कुछ भी लिखा है, वह सब सच है। लेकिन आपका यह सोचना सही है कि मेरी कथनी-करनी में अन्तर होता है
 एक गृहिणी.......
nayee udaan

एक गृहिणी जब कलम उठाती है ... लिखती है वह खिलते फूलों पर उगते सूरज पर नन्ही किलकारियों पर मासूम मुस्कानों पर ... वह लिखती है ममता की स्याही में कलम को डुबो कर .... लेखनी में उसकी उमड़ पड़ता है ढेर सारा प्यार , दुलार और बहुत सारा स्नेह , सारी प्रकृति खिल उठती है .... एक गृहिणी , एक नारी भी है एक माँ भी है ......
एक बूंद इश्क
मेरा मन पंछी सा

* * *होंठो की खामोशी ने पलकों के * *भीतर आँखों के कोर में * *एक बूंद इश्क बना दिया .....* *आँखों को ठंडक देते उस * *एक बूंद इश्क ने सब कुछ * *धुंधला सा कर दिया .....* *उस धुंधलपन को साफ करने के लिए * *जैसे ही पलकें झपकाई ...* *वो एक बूंद इश्क आँखों से बहकर * *गालों पर से ढुलकते हुए * *धीरे से ना जाने कहाँ खो गया.......
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दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की)
उठे दर्द जब और उमड़े समंदर - लगी आग जलके, हुआ राख मंजर, जुबां सुर्ख मेरी, निगाहें सरोवर, लुटा चैन मेरा, गई नींद मेरी, मुहब्बत दिखाए, दिनों रात तेवर
न दैन्यं न पलायनम्

और बाल कट गये
पिछले शनिवार को बाल कटाने गये, एक नियत दुकान है, वहीं पर ही जाकर कटाते हैं। प्रारम्भ में एक दो बार जाने से परिचय हो गया, कैसे बाल कटाने से चेहरा अच्छा दिखता..
नारद

संजय निरुपम पे इतना हंगामा क्यों ? - आज ये बात कोंग्रेस के ऊपर पूरी तरह चरीतार्थ होती है, बड़े बुजुर्ग कहते हैं जैसा होगा संग वैसा होगा मन, यह बात नैतिकवादी कोंग्रेस के नेता संजय निरुपम ...
Tarun's Diary-"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."

छ: बरस की बिटिया को कैसे समझाऊं : "बलात्कार" क्या है । - दूध मुहे शिशुओं तक से होता है जो अमानुष अप्राकृतिक अनैतिक कृत्य परिभाषाओं और कल्पनाओं तक से परे और देश छोडो शहर में भी दुसरे ही दिन जिसकी खबर ...
'Aah' & 'Lams' Book by Sudheer Maurya 'Sudheer'

ओ ! हिन्द की बेटी दामिनी -सलाम करता हूँ में तेरी हिम्मत को ओ! हिन्द की बेटी 'दामिनी' तुझे लड़ना है मौत से और देना है उसे शिकस्त उठ और बिजली की तरह चमक कर सार्थक कर दे अपना नाम ...
yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं ..............
कौसानी से प्रस्थान - ये जो ​चित्र आप देख रहे हैं ये अगले दिन यानि की यात्रा के दूसरे दिन कौसानी से प्रस्थान का है जब मै अपने होटल से चैक आउट करके चला । वैसे मै रूकना तो नही..
साहित्य प्रसून
‘हविश की दीमक’(मुकुर काव्य के क्रम से अलग )
वैसे आज ही मैं ' पैसठवे वर्ष' को पार कर के कल छियासठवें में प्रवेश करूँगा | कल परसों के अखवारमें दिल्ल्वी की ह्रदय विदारक घटना ने मेरी खुशियों पर ...
फरमान
अपनों का साथ

कुछ सपनों को तोड़ती-मोड़ती हूँ कुछ अपने-आप से ही बाते करती हूँ जिंदगी को बना के महबूब अपना महबूबा बन,रोज़ उस से मुलाकात करती हूँ | सूरज का आना और फिर छिप जाना अपने मन की नैतिकता से रोज़ इस खेल का दीदार करती हूँ विश्वास के आदर के साथ बनाई हर तस्वीर का भीतर की टूटन के साथ कुछ नए होने का हर बार इंतज़ार करती हूँ जिंदगी के रंगों और आर्ट ऑफ लिविंग की सोच से खुद को ढाल लेने का बार-बार प्रयास करती हूँ
लम्हों लम्हों में बस ढलता रहा...
" मेरे जज्बात "

लम्हों लम्हों में बस ढलता रहा ये वक़्त रुका न, फिसलता रहा जिसने न की कभी क़दर इसकी वो उम्र भर बस हाथ मलता रहा गयी रुतें तो, वो पत्ते भी चल दिए सहरा में तन्हा शजर जलता रहा दोस्त समझ के जिसे साथ रखा आस्तीनों में सांप सा पलता रहा
गांधारी के राज में नारी !

पढ़ा है महाभारत में द्रौपदी का चीर हरण हुआ था सभा में सभी मर्द थे ,पर चुप थे ,भय से ,अचरज से , कोई न आया बचाने द्रौपदी को लाज बचाया केवल कृष्ण ने। आज" भारत महान" की राजधानी ......
श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद (४२वीं कड़ी)
Kashish - My Poetry

दसवां अध्याय (विभूति-योग -१०.२९-४२) नागों में मैं शेषनाग हूँ, और वरुण जलचरों में हूँ. पितरों में अर्यमा है जानो नियमपालकों में मैं यम हूँ. (१०.२९) दैत्यों में प्रहलाद है जानो, और समयगणकों में काल हूँ. सिंह सभी पशुओं में जानो, और गरुण सभी पक्षियों में हूँ. (१०.३०) पावन करने वालों में वायु हूँ, राम शस्त्रधारियों में जानो. मगर हूँ मैं सभी मत्स्यों में, नदियों में गंगा तुम जानो. (१०.३१) आदि
अन्त में मेरी भी पोस्ट देख लीजिए!
"जीवन जीना है दूभर"
उच्चारण

छिपा क्षितिज में सूरज राजा,
ओढ़ कुहासे की चादर।
सरदी से जग ठुठुर रहा है,
बदन काँपता थर-थर-थर।।…

24 comments:

  1. आज की लिंक्स सार्थक और सटीक संयोजन के साथ |
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार |

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  2. बहुत ही उपयोगी लिंक्स ... आभार

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  3. अति सुंदर चर्चा सभी की पोस्टें लाजवाब हैं

    Recent Post: Gravatar और About.Me Profile, आपका अपना पहचान पत्र

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  4. विस्तृत सामायिक सार्थक चर्चा।

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  5. बहुत सुन्दर सुन्दर लिंक्स हैं आज की चर्चा में। मोहब्बत नामा और मास्टर्स टैक दोनों की पोस्ट्स शामिल कर सम्मानित करने के लिए शुक्रिया। और साथ ही मुझे इस बात की बहुत ख़ुशी है की चर्चा मंच पर पिछले कुछ दिनों से देख रहा हूँ की एक ना एक तकनिकी पोस्ट भी हर चर्चा में शामिल की जा रही है। हर चर्चा कार को ऐसा करना चाहिए। अक्सर तकनिकी ब्लोग्स को इग्नोर किया जाता रहा है।

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  6. "अन्ना, बाबा-केजरीवाल फ्लॉप" व कार्टून:- भाऽऽऽग, मोदी आया... बेहद पसंद आये | बढ़िया लिंक सयोंजन किया है आपने | मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए धन्यवाद |

    टिप्स हिंदी में की नई पोस्ट : आप भी दिखाएं Neon Light Effect अपने ब्लॉग पर बिना फोटोशाप के

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  7. शानदार लिंक संयोजन

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  8. काफी अच्छा लिंक समायोजन, पर अभी तक मेरी शिकायत का निवारण नहीं हुआ, जीवन मैग की पोस्ट्स को भी चर्चा-मंच में जगह दें, कृपया ये हालिया पोस्ट देखें....
    दिल्ली: कंट्री कैपिटल या रेप कैपिटल? http://www.jeevanmag.blogspot.in/2012/12/blog-post_6080.html

    बाबा नागार्जुन की दो कवितायेँ---संसद को लकवा मार गया है http://www.jeevanmag.blogspot.in/2012/12/blog-post_22.html

    प्रेमगान http://www.jeevanmag.blogspot.in/2012/12/blog-post_20.html

    Jeevan Mag Documentary by Students
    http://www.jeevanmag.blogspot.in/2012/12/jeevan-mag-documentary-by-students.html

    निष्काम भक्ति और निष्काम देशभक्ति http://www.jeevanmag.blogspot.in/2012/12/blog-post.html

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  9. आदरणीय शास्त्री सर नमस्कार, आज की चर्चा बेहद रोचक है मेरे लिए कुछ लिंक्स नए मिले पढने को, मेरी रचना को स्थान दिया हार्दिक आभार.

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  10. कार्टून को भी सम्मिलित करने के लिए आपका आभार

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  11. बहुत ही अच्छे लिंक्स है...
    आभार...

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  12. अच्छे लिंक्स ...सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

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  13. बहुत बढ़िया और सशक्त लिंक्स..आभार

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  14. शानदार लेखन, बधाई !!!

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  15. लगी आग जलके, हुवा खाक मंज़र..,
    निगाह सुर्ख मेरी जबाँ लब-ओ-रु तर..,

    लुटा चैन मेरा, गई नींद मेरी..,
    मोहब्बत दिखाए, रोज-ओ-शब् अख्तर..,

    गिला जिन्दगी से,रहा हर कदम पे..,
    गुजरे वक्त मेरा माहो-साल रोकर..,

    लम्हा-दर लम्हा पहरो-दर-पहर..,
    रही याद तेरी, अमानत बन कर..,

    दिलासा दुआ ना दवा काम आई..,
    उठा दर्द दिल में साहिलों-समंदर.....

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  16. आज की लिंक्स सार्थक और सटीक संयोजन,
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार |
    सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति

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  17. सार्थक सामयिक चर्चा सभी सूत्र शानदार हार्दिक बधाई

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  18. बढ़िया चर्चा | समसामयिक रचनाओं से भरी हुई | आभार |

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  19. आज के समय की पुकार को प्रस्तुत करते सशक्त लिंक्स !

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  20. पोस्ट की प्रस्तुति बहुत ही सुन्दर है.सभी लिंक्स अच्छे हैं.
    मेरी पोस्ट को आप ने चर्चा में शामिल किया ,बहुत-बहुत आभार .

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  21. सभी विषयों पर चर्चा कर सकने हेतु बेहतरीन लिंक्स !

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  22. बड़े ही सुन्दर सूत्र संजोये हैं आपने।

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  23. चिट्ठों की फीड़ के साथ लिंक देने का ये प्रयास बहुत भाया।

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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चर्चा - 2817

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है  चलते हैं चर्चा की ओर सबका हाड़ कँपाया है मौत का मंतर न फेंक सरसी छन्द आधारित गीत   ...