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Tuesday, December 18, 2012

मंगलवारीय चर्चामंच (1097)--ख्याल उमड़ रहे मन में ,उन्हें आने से क्यों रोकूँ


आज की मंगलवारीय   चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते आप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 
  


  
  
  
  
  
   
  
  
  

Life is Just a Life: 

कब तक अंधा इतिहास पढ़ाओगे?

आखिर कब तक  उगते भारत को  अंधा इतिहास पढ़ाओगे?
कब तक बचपन में  कायरता भर  खद्दर के दिए जलाओगे?
कब तक प्रश्न पूँछते  नौनिहाल के सम्मुख गूंगे बन जाओगे,
तुम इस चन्दन को गन्दी माटी कह कैसे अबोध कहलाओगे?

  
  
  
  
  
  
  

रूठना कोई खेल नहीं !

तुम  ही  हो माता ,पिता तुम  ही हो !... 

  

सर्दी

कोहरे के आलिंगन में
है भोर ने आँखे खोली 
चारों ओर देख कुहासा 
न निकली उसकी बोली । 
  



तुम्हारे प्यार को खुश्बू बसा, इस दिल में लाया हूँ
मोहब्बत की हसीं राहों में, यादें छोड़ आया हूँ...

 आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ अगले मंगल वार  मिलूंगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा, बाय-बाय!

23 comments:

  1. बॉक्स में लगी चर्चा अच्छी लग रही है!
    आभार!

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  2. कई लिंक्स पर हो आया। बेहतरीन संकलन।

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  3. एक बार में काफ़ी कुछ पढ़ लिया -शेष भी पढ़नी हैं - धन्यवाद आपको ,लालित्यम् से कुछ लेने के लिये भी

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  4. Adaraniya Rajesh Kumari Ji,
    pratham to aapake sneh va samman ke liye hraday se abhaar !

    Charchamanch par mere jaise nousikhiye aur bahut anubhavi sabako sthan dekar protsahan dene ke abhinav prayaas ko adhikadhik sarahana mile yahi kaamana karata hun.

    Dhanywad Abhivadan sabhi ko!

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  5. अनुपम लिंक्‍स संयोजित किये हैं आपने ... आभार

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  6. मेरा की - बोर्ड खराब हो गया है पहला ही अक्षर नही दब रहा बहुत मुश्किल से वर्चुअल की बोर्ड से काम कर रही हूँ ………बढिया चर्चा

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  7. बढ़िया और सुनियोजित चर्चा । सभी लिंक्स अच्छे हैं ।

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  8. बहुत बहुत धन्यवाद आपका मेरी पोस्ट आज के चर्चा-मंच मैं शामिल करने के लिए /बहुत ही सुंदर चर्चा-मंच सजाया है आपने /बहत बधाई आपको /

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  9. बढिया प्रस्तुति
    मुझे शामिल करने के लिए बहुत बहुत आभार

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  10. सार्थक पोस्‍ट । सार्थक कदम

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  11. बहुत ही सुन्दर सूत्र संजोये हैं।

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  12. अच्छा चर्चा संसार ... अच्छे लिंक संजोए हैं ...

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  13. अनुपम लिंक्‍स---आभार

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  14. बहुत बढ़िया लिंक्‍स सुन्दर चर्चा..

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  15. सुन्दर सूत्र संयोजन,
    मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत२ आभारी हूँ,,

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  16. अप्रतिम रचना .शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .

    गुमशुदा

    शख्स जो चला था नापने गहराई मेरे मोहब्बत की
    है मुद्दतों से गुमशुदा वो अब तलक वापस न आ सका

    25.Madhu Singh:Garahyee mohabbat ki

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  17. क्या खूब लिखते हो दोस्त .


    चाहता हूँ भूलके सब, दो कदम आगे चलूँ,
    और खुद तकदीर से मैं अबतलक जीता नहीं.


    लड़खड़ाते पांव मेरे - जबकि मैं पीता नहीं

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  18. सुन्दर तरीके से अभिव्यक्त हुए हैं भाव और अर्थ .

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  19. जहाँ में खुश्बू-ए-गुल सा महकना, घर को महकाना
    तुम्हारे बन्द कमरों में, उजाले छोड़ आया हूँ
    बहुत बढ़िया गजल ,आत्म गौरव और दुआओं से



    तुम्हारे प्यार को खुश्बू बसा, इस दिल में लाया हूँ
    मोहब्बत की हसीं राहों में, यादें छोड़ आया हूँ...

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  20. ऐसे आलेखों की भारत को ज़रुरत है .क्या कोई ज्योतिष सितारे बाज़ बतलायेगा भारत में यूं सरे आम बलात्कार कब तक होते रहेंगे औरतों की अंतड़ियां कब तक बसों में निकाली जाती रहेंगी ?और व्यवस्था सिर्फ घावों पे मरहम लगाती रहेगी घाव न हों इसका इन्ताज़ नहीं करेगी .

    कुंडली और जीवन रेखा

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  21. लिखो ,लिखो , खूब लिखो
    विवश विचारों की आँधियाँ उठाओ
    कुचक्रों के चक्रवातों में उन्हें फँसाओ
    और अपने काले- उजले अक्षरों को
    घसीट-घसीट कर ही सही
    अपंग- अपाहिज सा इतिहास बनाओ .

    जिजीविषा जब तक है लिखो ....बढ़िया रचना .....

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  22. वीरेंदर कुमार जी आपके साथ चर्चामंच पर शिरकत करने वाले मित्रों का शुक्रिया

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  23. बेहतरीन चर्चा ..

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