Followers

Thursday, July 11, 2013

चर्चा - 1303

 आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
बात राघव जी को हो या मैट्रो वीडियो की , एक बात तो सच है कि किसी का भी अंधसमर्थन नहीं करना चाहिए । हमारे देश में कुछ लोग कांग्रेस को गालियाँ देने और कुछ लोग आधुनिकता के पक्ष में नारे लगाने के सिवा कोई काम नहीं करते । ये दोनों घटनाएं बहुत कुछ कह रही हैं । नेता एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं , और शालीनता भारत की पहचान है , इसे समझो । 
चलते हैं आज की चर्चा की ओर 

रथयात्रा और उत्तराखंड 
 
मैं तुम्हारे लिए मीत बन जाऊँगा
मेरा फोटो
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)
एमिरात में तापमान ५० से ऊपर पहुँच गया है.कल के अखबार में हमारे शहर में ५१ डिग्री तापमान बताया गया है।  घर के बाहर निकल कर ज़रा देर को आप छाया में ही खड़े हो जाए तो पहने हुए कपड़े तक एकदम गरम हो जाते हैं।  रात ९ बजे भी फर्श गरम रहता है और नल का पानी गुनगुना।  ए.सी.१८ [न्यूनतम] डिग्री पर रखे हुए हैं फिर भी कमरे ठंडे नहीं हो रहे.न जाने आगे -आगे कैसा हाल हो?...
(2)
My Photo
....आईये हम सब मिलकर दुआ करें कि सभी सरकारें अपने अपने कुत्तों को फ़ेल कर दे तो शायद हमारे देश में  बेईमानी भ्रष्टाचार करने वालों पर भी अंकुश लग सकेगा. और सभी मामले इसी रफ़्तार से निपटाये जा सकेंगे. वैसे यदि सरकारें चाहें तो सभी मामलों में इतनी ही त्वरित गति से कारवाई  हो सकती है चाहे कोलगेट हो या टू जी या फ़िर कोई सा भी जी हो....
ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया 
(3)
! कौशल ! पर Shalini Kaushik
(4)
सृजन मंच ऑनलाइन
छुपी हुई हर  ह्रदय  में ,देखो एक किताब |
जिसके पन्नो में छुपा,बिसरा हुआ गुलाब || 
(5)
मोदी की देखा देखी कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल साइट्स पर ग्रुप बनवाया, अब  "लाइक्स" की संख्या बढ़ाने के लिए सौदेबाजी पर उतर आए, लेकिन क्या करें, बेचारे अपने ही जाल में फस गए। गहलौत साहब लोकप्रियता खरीदी नहीं जा सकती, समझ में आई बात...!

21 comments:

  1. बेहतरीन चर्चा को अंजाम दिया है आप को ढेर सारी बधाईयाँ जी ...
    " ਜੁਲਮਾਂ ਦੀਆਂ ਸ਼ਾਮ ਪਿਆਰ ਦੀ ਸਵੇਰ ਹੋਣੀ ਸੀ
    ਜੇ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ਾਂ ਪਰਵਾਨ ਚੜ੍ਹਿਆ ,ਫ਼ਤੇਹ ਹੋਣੀ ਸੀ - '

    ReplyDelete
  2. बहुत लाजवाब संकलन

    ReplyDelete
  3. @ प्रेम और मनुहार (दोहे)

    सुन्दर परिभाषित हुये, प्रेम और विश्वास
    जीवन - दर्शन कह रहे, चारों दोहे खास ||

    ReplyDelete
  4. बेहतरीन प्रस्तुति-
    सुन्दर चर्चा-
    आभार आदरणीय

    ReplyDelete
  5. बहुत पठनीय और सुन्दर सूत्र..

    ReplyDelete
  6. @ रिश्ते निर्धन हो गये..........

    रिश्तों की बारीकियाँ, वर्तमान का रूप
    कहीं प्रात है रेशमी,कहीं चिलकती धूप ||

    ReplyDelete
  7. सुन्दर और पठनीय सूत्रों से सजी चर्चा !!

    ReplyDelete
  8. बहुत बढ़िया सार्थक चर्चा प्रस्तुति!
    आभार!

    ReplyDelete
  9. Bahut sundar sankalan! Meri post ko shaamil karne ke liye aabhaar aur dhanyawaad!!

    ReplyDelete
  10. बहुत सुंदर चरचा, आभार.

    रामराम.

    ReplyDelete
  11. चर्चा मंच की सभा में आना और मंच की सभा में खुद को पाना रोमांचित कर गया।

    ReplyDelete
  12. बहुत ही सुन्दर तरह से चर्चा मंच पर कई अच्छे लिंक एक स्थान पर मिल गए.
    मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार.
    अन्य पोस्ट्स को पढ़ने निकलती हूँ अब.
    सादर

    ReplyDelete
  13. बहुत सुन्दर चर्चा मेरी रचना को मयंक के कौने में स्थान देने के लिए हार्दिक आभार आदरणीय शास्त्री जी

    ReplyDelete
  14. मेरे लेख को मयंक का कोना में जगह देने के लिए आभार

    ReplyDelete
  15. आकर्षक सूत्रों से सजी चर्चा..

    ReplyDelete
  16. विस्तृत संकलन ... अच्छे लिंक हैं ...

    ReplyDelete
  17. bahut sundar sankalan ,prastutikaran ,mujhe sthan dene ke liye abhaar dilbag ji

    ReplyDelete
  18. .सार्थक व् सराहनीय लिंक्स संयोजन .मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए आभार आगाज़-ए-जिंदगी की तकमील मौत है .आप भी पूछें कैसे करेंगे अनुच्छेद 370 को रद्द ज़रा ये भी बता दें शाहनवाज़ हुसैन .नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN हर दौर पर उम्र में कैसर हैं मर्द सारे ,

    ReplyDelete
  19. ऊँचे पद पैसत कहे, में हूँ पालन हार ।
    पल मैं जल मैं जल बहे, दरसे सब संसार ।२ ३।

    राखत रखक लाख कहे, में हूँ राखन हार ।
    रखक तन राख लहे जन, कासों करें पुकार ।२ ४।

    भावार्थ : -- ऊंचे पद पर बैठते ही स्वयं को राजा भगवान और जाने क्या क्या समझने लगते हैं । भगवान
    तो अविनाशी हैं, ( उच्च पदासीन) पल भर में ही जल कर जो अंत में जल में ही बह गए उन्हें सारे संसार ने देखा । 2 3 |

    लाखों अंग रक्षक रखते हुवे जो कहते हैं कि हम ही जनता के रक्षक हैं । ऐसे रक्षकों को, उनके अंग रक्षकों के ही हाथों जनता ने राख होते देखा है देखा है, अब वह किससे अपेक्षा करे | 2 4 |

    ReplyDelete
  20. सुंदर प्रस्तुति..चर्चा मंच में मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए धन्यवाद.

    ReplyDelete
  21. सुन्दर चर्चा- मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए धन्यवाद.

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...