... शुभम दोस्तो ...
फिजा गगन की सुधरी निकल के देखते हैं
चलो कुछ और समय संग चल के देखते हैं
|.......सरिता.......|
मैं
सरिता भाटिया
ले आई हूँ
आज की चर्चा
''गुज़ारिश प्रभु से''
कर रहे हैं
हम गुलाबक फूल छी प्रभु
इससे
की
निद्रा जो टूटेगी
तो
ने कहा
है बहुत नाज मुझे
की
पर
जीवन का कोई मोल नहीं
ने
बताया
मेरा आई डी कार्ड दिलवाओ
तो
सांप और बांसुरी
ले आए
तभी
ने कहा
आत्महत्या
की अगर
याद तुम्हारी आई
बहुत
को
ने
समझाया
दाग दामन पर
मत लगाना
हिंदी हाइगा
में
जी
ने कहा
जाने वालो जरा मुड़ के देखो मुझे
बड़ों को नमस्कार
छोटों को प्यार
... शुभविदा ...
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)
कैसे गुजरी तमाम रात, बताऊं कैसे ?
![](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEiLlcaMC-FaondGgnAsfEQ2j7AqQlvdyHQvlDQMXTzzOlvPMLbxzuu9g41khVxAScO_I0jdGO3bN4s6Fb5SB8hPvRGwsF-HFlurorQi0oL4s-8Vx5AIcDEnu2_5ug1afiIGGXmimOd_3unF/s320/taau-gazal.jpg)
ताऊ डाट इन पर ताऊ रामपुरिया
(2)
छंद कुण्डलिया : चिट्ठी
![सृजन मंच ऑनलाइन](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEimi2WjFEd3agysu7ANGD6QwzJUfrZ9igq28FzAJjWQfaNA5bzIoCUS132_LbvIUMIwvIBUbsu5uaYbEA66SIa5aeIzcRt8szOqJqqhrm_PzyJmLjqORNGebgNFJJzF-qEjXOExR1gMJDQZ/s400/S_S+copy.jpg)
बीते दिन वो सुनहरे , नैन ताकते द्वारकब आएगा डाकिया , लेकर चिट्ठी- तारलेकर चिट्ठी -तार , डाकखाने के चक्करपत्र कभी नमकीन,कभी ले आते शक्करसीने से लिपटाय , खतों को लेकर जीतेनैन ताकते द्वार , सुनहरे वो दिन बीते ||
सृजन मंच ऑनलाइन पर अरुण कुमार निग
(3)
"नन्हें सुमन की पहली रचना"
![](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEhShDh6tx4NYT3HfND4tda40fO2Lkj0HA7RLdNJk9x89nQEYwc51nk_RmbJxotD8P3JsDFCDY1aGK6vxE_ZoKwKDU3kCRw27UzD2QNK1Adx0GF-oKb96LCUhj9rFIP4ZBITWWPZv0f-GEG9/s400/rose_garden_s+copy.jpg)
नन्हे सुमन
(4)
अलबेला खत्री को राखी सावंत कहने वाला
ये सतीश सक्सेना कौन है भाई ?
Hasya Kavi Albela Khatri
(5)
"मेरी ग़ज़ल-राज एक्सप्रेस, ग्वालियर में"
![](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEi4pgUOYoKT0HJSnyA_wxBs8onAiJ9NJr_qk20CKj_LmqxYs7NGXIpFXWY6oE-9Lap0H8nW9591SNigrlWl0WpjWsdND_f9VNe1S2-PQSp7gSTTCKHK8XYXBKV4r7t5TKYEAm0J43VNfWIN/s320/meet+ka+sath+nibhao.jpg)
उच्चारण
(6)
.. शरद यादव का बिहार में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा
.नाव तैयार ..... चमचे आस-पास ........नौका विहार पर चले ...
एक प्रयास मेरा भी पर अरुणा
(7)
"आया नये शहर में"
इंसानियत यहाँ तो, देखी जलेबियों सी,
मिष्ठान झूठ का भी, खाया नये शहर में।
इससे हजार दर्जे, बेहतर था गाँव उसका,
फिर “रूप” याद उसको, आया नये शहर में।
बहुत सुन्दर चर्चा!
जवाब देंहटाएंमित्रों आज बाहर जाना है।
शाम तक वापिस घर आ गया तो आप सबके यहाँ दस्तक दूँगा।
बहुत ही सुन्दर सूत्र
जवाब देंहटाएंसुंदर लिंक्स और सुंदर चर्चा
जवाब देंहटाएंबहुत ही उम्दा रचनाओं से भरा है यह चर्चा मंच ।पहली बार आ के बहुत अच्छा लगा ।
जवाब देंहटाएंबढ़िया चर्चा मंच-
जवाब देंहटाएंआभार आदरणीया-
बहुत ही सुन्दर चर्चा आदरणीया हार्दिक आभार
जवाब देंहटाएंसुंदर लिंक्स और सुंदर चर्चा , मेरी रचना को यहाँ सामिल करने के लिए आभार
जवाब देंहटाएंबहुत ही उम्दा रचनाओं से भरा है यह चर्चा मंच,बहुत ही सुन्दर चर्चा आदरणीया मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए आभार।
जवाब देंहटाएंमनोज जैसवाल
सुन्दर लिंक्स...चर्चा प्रस्तुति का यह अंदाज़ बहुत रोचक लगा...आभार
जवाब देंहटाएंसुन्दर चर्चा
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर चर्चा...आभार..
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