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Saturday, April 12, 2014

"जंगली धूप" :चर्चा मंच :चर्चा अंक:1580

जंगली धूप अब कुछ कुनकुनाने लगी है
शायद कोई किरण यहाँ आने लगी है |
पुराना खेल मदारी का रोज चलता है
अब यह पिटारी हमें बहुत भाने लगी है |
ये होंठ चुप थे और जुबान भी गूंगी थी
यह जिंदगी अब तो मर्सिया गाने लगी है |
जिस ‘जिंस’ से रहता है जिंदा आदमी
वही आदमी को आज खुद खाने लगी है |
नदी जब उफनती है किनारे तोड़ती है
यह आवाज तो कहीं से आने लगी है |
मैं तो नगरी अपनी की बात करता हूँ
पत्थरों से वह खुद को सजाने लगी है |
(साभार : राजेंद्र निशेश)    
 नमस्कार  !
मैंराजीव कुमार झा
चर्चामंच चर्चा अंक : 1580  में,
कुछ चुनिंदा लिंक्स के साथ, 
आप सबों  का स्वागत करता हूँ.  
--
एक नजर डालें इन चुनिंदा लिंकों पर...
 ये ग़ज़ल के कद्रदां भी क्या करें ? -सतीश सक्सेना 
My Photo 
इस जमीं के बागवाँ भी, क्या करें ?
बिन बुलाये खामखां भी,क्या करें ?

सेर और सव्वा बने
   शारदा अरोरा        
मेरा फोटो
फ़कत दुनिया की सैर करने को 
आदम और हव्वा बने 


नीरज पाल  

र से कुछ दूर चलने पर भी,
वह नहीं मिला, न ही उसकी कोई यादें थी वहाँ,
सपाट फैला हुआ,

                                             पूजा उपाध्याय       


वे शब्द बड़े जिद्दी थे. उस लड़की की ही तरह. अपनी ही चाल चलते, मनमानी। कलम की निब के साथ भी दिक्कत थी थोड़ी, जरा सी बस उत्तर अक्षांश की ओर झुकी थी, जैसे धरती चलती है न डगमग डगमग, वैसे ही कलम भी चलती थी उसकी, जरा सी नशे में झूमती। 
संशय से निकलते हुए राहुल
रविश कुमार 


नरेंद्र मोदी, मायावती के बाद राहुल गांधी की रैली से आ रहा हूँ । टीवी पर राहुल के सपाट भाषणों को सुना है मगर ज़माने बाद या शायद पहली बार सामने से सुन रहा था । राहुल गांधी का भाषण बदल रहा है । शुरू में जिस तरह का अबोध लगता था अब बहुत बेहतर तो नहीं लेकिन पहले से सुधरा हुआ लग रहा है । 
अनिता          
 My Photo
ईश्वर की ओर चलना आरम्भ तो करें सारी सृष्टि सहायक हो उठती है. जो जगत का नियामक है, नियंता है, आधार है उसे अपना मान लें तो जगत का विरोध स्वतः समाप्त हो जाता है, 
 बशीर बद्र
कहीं चांद राहों में खो गया कहीं चांदनी भी भटक गई
मैं चराग़ वो भी बुझा हुआ मेरी रात कैसे चमक गई
तरक्की का दस्तावेज है भाजपा घोषणापत्र 
          हर्षवर्द्धन त्रिपाठी  
            My Photo 
भारत गांवों का देश है। और ये बात हम भारतीयों के दिमाग में ऐसे भर गई है कि अगर कोई गलती से भी शहर की बात करने लगे तो लगता है कि ये भारत बिगाड़ने की बात कर रहा है। लेकिन, उसी का दूसरा पहलू ये है कि शायद ही नई उम्र का और काफी हद तक पुरानी उम्र का कोई भारतीय हो जो पूरे मन से सिर्फ गांव में ही रहना चाहता हो। 


मनु त्यागी   
Bhagsu naag water fall , maclodganj , Himachal         
कांगडा का किला देखने के बाद आधा दिन बचा था और हमें मैक्लोडगंज के भागसू नाग झरने को देखने जाना था । वहीं हमें शाम को धर्मशाला से दिल्ली की बस में बैठना था तो हमें वापस राकेश के कमरे से आने जाने में समय लगता । इससे बचने के लिये हमने अपना सामान उठा लिया साथ में ही और कमरे को बंद करके मैक्लोडगंज की ओर चल पडे ।
Rajeev Kumar Jha    

I write my longings
on the river every noon
When I bathe
And they snake to the sea

My Photo

किसी को उड़ती
हुई चीज पसंद
नहीं होती है
उसकी सोच में

 चाँद.....
प्रियंका जैन   
ए-दोस्त 
चाँद तुम्हें भी नज़र आता है न 

"पायरिया और उपचार"
राजेन्द्र कुमार   

दांतों का एक बहुत ही प्रचलित रोग है पायरिया। पायरिया दाँतों की एक गंभीर बीमारी होती है जो दाँतों के आसपास की मांसपेशियों को संक्रमित करके उन्हें हानि पहुँचाती है। यह बीमारी स्वास्थ्य से जुड़े अनेक कारणों से होती है, और सिर्फ दांतों से जुड़ी समस्याओं तक सीमित नहीं होतीं।

मार्कंडेय दवे     
     

मीना पाठक  
Meena Pathak's profile photo 
         

सुन कर द्रोपदी की चित्कार
कलेजा धरती का फटा क्यों नहीं
देख उसके आँसुओं की धार
अंगारे आसमां ने उगले क्यों नहीं

जीवन क्या है 
गरिमा  
मेरा फोटो
जीवन के  आपाधापी में
 यह सोच न पाया कि जीवन क्या है?
क्या बुरा किया क्या भला किया
कैसे बीत गए पल सारे
           शांतनु सान्याल   
 

रख जाओ कभी, कुछ महकते ख्वाब, 
दिल के क़रीब, मुद्दतों से खुली हैं 
चाहतों की खिड़कियाँ, 

कुछ अनोखे पल
     महेश्वरी कनेरी
        
झुक कर आसमां जब
धरती के कंधे पर सर रख देता है

भारती दास 
My Photo

आर्य-श्रेष्ठ द्रोणाचार्य थे
शस्त्र-विद्या के आचार्य थे
शास्त्र में भी निपुण बड़े
लेते थे निर्णय खड़े-खड़े  


"दर्पण असली 'रूप' दिखाता" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जीवन बहते पानी जैसा,
चरैवेति का पथ सिखलाता।
धन्यवाद !
आगे देखिए
"अद्यतन लिंक"
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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शक्ति पीठ रहस्य
चित्र प्रदर्शित नहीं किया गया
पौराणिक कथा है कि दक्ष के यज्ञ मे शिव का निमंत्रण न होने से व उनका अपमान होने से सती ने योगबल से अपनी देह को त्याग कर तत्पश्चात हिम पुत्री पार्वती के रूप मे जन्म ले कर सदा शिव की पत्नी होने का निश्चय किया था । समाचार विदित होने पर शिव को दक्ष पर बड़ा क्रोध और सती पर मोह हुआ ।  वे दक्ष यज्ञ को नष्ट करके सती के शव को अपने कंधे पर डाल कर घूमते रहे । श्री विष्णु ने शिव के मोह की शांति एवं जग कल्याण हेतु सती के श्री अंगों को काट काट कर भिन्न भिन्न स्थानों पर गिरा दिया , वे ही इक्यावन पीठ बने । ज्ञातव्य है कि योगिनी हृदय एवं ज्ञानर्णव के अनुसार ऊर्ध्व भाग के अंग जहां गिरे वहाँ वैदिक और दक्षिणमार्ग की और हृदय से निम्न भाग के अंगो के पतनस्थलों मे वाममार्ग की सिद्धि होती है । सती के विभिन्न अंग कहाँ कहाँ गिरे और वहाँ कौन कौन से पीठ बने , वे निम्न लिखित है...
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आओ प्रिये ! आओ 
दिल की हर धड़कन 
तुम्हें पुकारे... 
मेरी नन्हीं उड़ान
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राम ,बुद्ध ,दुष्यंत ये क्या क्या नहीं .... 
! कौशल ! पर Shalini Kaushik
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जिन लोगों ने आज तक 
कभी सच नहीं बोला 

आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma
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किताबों की दुनिया 
नीरजपरनीरज गोस्वामी 
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किसे ? 
एक लम्बी सी चिट्ठी लिखना चाहती हूँ 
बहुत कुछ लिखना चाहती हूँ 
पर कोई ऐसा नाम जेहन में नहीं 
जिससे धाराप्रवाह सब कुछ कह सकूँ …
मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा...
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मेरा बस्ता कितना भारी।
बोझ उठाना है लाचारी।।

मेरा तो नन्हा सा मन है।
छोटी बुद्धि दुर्बल तन है...

16 comments:

  1. आज की खूबसूरत शनिवारीय चर्चा के सुंदर सूत्रों के साथ 'उलूक' का सूत्र 'तेरे लिये कुछ नहीं उसके लिये खुशी हो रही होती है' को भी शामिल करने के लिये आभार राजीव ।

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  2. सुप्रभात, आज के इस शनिवारीय चर्चा के सभी लिंक्स बहुत ही बेहतरीन और पठनीय हैं। इस श्रमसाध्य चर्चा के लिए आप सब का हार्दिक आभार। मेरे स्वास्थ्य आर्टिकल को चर्चा में जगह देने के लिए आपका आभार राजीव जी।

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  3. बहुत ही सुन्दर और चहकती-महकती चर्चा।
    आदरणीय राजीव कुमार झा जी आपका आभार।

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  4. बहुत ही सुन्दर चर्चा.. मुझे शामिल करने के लिये आभार राजीव जी।

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  5. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!

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  6. बहुत बढियाँ संकलन ,मेरी रचना को भी शामिल किया आपने ,इसके लिए बहुत धन्यवाद

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  7. bahut sundar charchaa !! badhiya lagaa padh - dekh kar !!
    " 5th pillar corruption killer " THE BLOG - SERCH DAILY - www.pitamberduttsharma.blogspot.com. by - PITAMBER DUTT SHARMA ( SAMEEKSHAK ) MO.NO. 9414657511. I AM ALSO IN , FACE - BOOK , PAGE , GOOGLE+ AND FB GRUPS. READ , SHARE AND GIVE YOURS VELUABLE COMMENTS ON IT DAILY . THANKS MY DEAR FRIENDS !!

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  8. Very Nice..! Shri Rajiv kumar ji , Thanks a lot..

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  9. बेहतरीन सूत्र संकलित रवैया इख्तियार रखते हुए बेहतरीन चर्चा , मंच व राजीव भाई को धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  10. very nice presentation .thanks to give place to my post here.

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  11. सुन्दर चर्चा.

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  12. बड़े ही रोचक व पठनीय सूत्र।

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  13. रविवार है । आज की चर्चा आ रही होगी इंतजार करते हैं :)

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  14. सुन्दर प्रस्तुति है सरजी !नारी विशेषांक कहना इस अंक को समीचीन रहेगा। स्तुत्य प्रयास स्तरीय रचनाएँ परोसने का।

    Thought provoking allegory:

    Every morning as I stroll
    I write my longings
    on the clear blue of the sky
    but soon the blanket of darkness
    hides them
    And with the break of dawn
    the letters melt and drip down
    in the sun’s heat

    But I don’t write my longings
    on the walls of the mind
    in the night
    in a moment’s drama of dreams
    enacted on the mind’s walls

    I see my fulfillments
    all celebrities
    of a king
    attend on me.

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  15. बड़े ही रोचक व पठनीय सूत्र।मेरी रचना को भी स्थान देने के लिए आभार।

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