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Wednesday, April 09, 2014

चुनाव की नाव, पब्लिक का लक; चर्चा मंच 1577


Kuldip Gupta
J Sharma

"पतंग" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

चुनाव की नाव, पब्लिक का लक : दैैनिक जनवाणी 8 अप्रैल 2014 अंक में संपादकीय पेज पर तीखी नजर स्‍तंभ में प्रकाशित

नुक्‍कड़ 

विश्व स्वास्थ्य दिवस ( World Health Day )

HARSHVARDHAN

सेहतनामा

Virendra Kumar Sharma 

ब्रेन मशीन इंटरफ़ेस

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता 

शून्य

pankhuri gupta 

कार्टून :- एक अदद चड्डी की स्‍वि‍टज़रलैंड यात्रा

काजल कुमार Kajal Kumar 
"अद्यतन लिंक"

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

--

आज का प्रेम 
पहले ही दिन अट्रैक्सन होता है,
फिर कनेक्सन होता है !
दूसरे ही दिन कन्वेंसन होता है,
और अंत में इस प्रेम नामक दवा,
की एक्सपायरी डेट ख़त्म हो जाती है...

हिन्दी साहित्य मंच पर ऋषभ शुक्ला
--

हम वीर धीर 

ज़हर घोल रहे 
इस समाज में जो
भाषण से तुम्हारी 
कायरता झलकती है
साम्प्रदायिक राजनीति
तुमसे टपकती है...
हालात-ए-बयाँ पर अभिषेक कुमार अभी
--
चला गया हूं मैं, नजर फिर भी आऊंगा मैं, सोशल मीडिया अब मेरा ठिकाना है : जीवन को ढूंढा है पीड़ा मे
तुझमें ढूंढूंगा पीड़ा
पीड़ा जो सच है
पीड़ा ही दर्द है
सच मानो मित्रो मेरे
पीड़ा ही सच्‍चा जीवन है...
नुक्कड़अलबेला खत्री--

''बड़ी बेशर्म औरत है '' 

नहीं पर्दा ये करती है बड़ी बेशर्म औरत है , 
ये शौहर से जो लड़ती है बड़ी बेशर्म औरत है...
भारतीय नारी पर shikha kaushik
--

धारा ४९८-क भा. द. विधान  

'एक विश्लेषण ' 

विवाह दो दिलों का मेल ,दो परिवारों का मेल , 
मंगल कार्य और भी पता नहीं 
किस किस उपाधि से विभूषित किया जाता है 
किन्तु एक उपाधि जो इस मंगल कार्य को कलंक लगाने वाली है 
वह है ''दहेज़ का व्यापार'' 
और यह व्यापर विवाह के लिए 
आरम्भ हुए कार्य से आरम्भ हो जाता है... 

कानूनी ज्ञान पर Shalini Kaushik 

--

प्रतीक्षा 

जीवन में ना कोई आहट 
ना कोई दस्तक 
ना कोई आवाज़ 
ना कोई साथ 
बस चहुँ ओर पसरा हुआ एक शून्य ...
Sudhinama पर sadhana vaid
--

"गीत-देशभक्त गुमनाम हो गये" 

हिन्दी साहित्य संगम जबलपुर 
पर विजय तिवारी " किसलय "

मेरी व्यक्तिगत क्षति भी है.
ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दे. 
चर्चा मंच परिवार की ओर से भाव भीनी श्रद्धांजलि
--
--खुशिया और गम, 
ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
हास्य-व्यंग्य के सशक्त आयाम 
अलबेला खत्री का असमय में जाना
जमीन से जुड़े एक महान कलाकार का जाना है...
चर्चा मंच परिवार की ओर से भाव भीनी श्रद्धांजलि।
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

20 comments:

  1. सुप्रभात
    चर्चामंच हुआ अब चुनाव का मंच |समसामयिक सूत्र हैं आज |
    आशा

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  2. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    रविकर जी आपका आभार।
    आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
    --
    हास्य-व्यंग्य के सशक्त आयाम
    अलबेला खत्री का असमय में जाना
    जमीन से जुड़े एक महान कलाकार का जाना है...
    चर्चा मंच परिवार की ओर से भाव भीनी श्रद्धांजलि।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. अलबेला खत्री जी को श्रद्धाँजलि । आज की चर्चा कुछ गमगीन है । 'उलूक' की खबर 'क्यों परेशाँ रहे कोई रात भर सुबह के अखबार से सब पता चल जाता है' को शामिल करने पर आभार ।

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  4. ब्लॉगर बन्धु खत्री जी को विनम्र श्रद्धांजलि ! परिवार के सदस्यों के प्रति हार्दिक संवेदना !
    आज के मंच पर मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिये आपका बहुत-बहुत आभार !

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  5. अलबेला जी को सादर नमन-
    श्रद्धांजलि --

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  6. sundar charcha .albela ji ko sadar naman .
    meri post ko sthan dene ke liye aabhar .

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  7. अलबेला खत्री जी का जाना , अपूरणीय क्षति है. विनम्र श्रद्धांजलि ....

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  8. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...
    आभार .....

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  9. बहुत सुन्दर लिंक्स दिए है, आभार मुझको शामिल करने का !
    साथ में एक दुखद खबर दुःख हुआ सुनकर,अलबेला खत्री जी को विनम्र श्रद्धाँजलि !

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  10. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति के लिए आभार!

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  11. अलबेला जी को विनम्र श्रद्धांजलियां

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  12. सुंदर चर्चा.अलबेला जी को विनम्र श्रद्धांजलि.

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  13. अलबेला खत्रीजी को श्रद्धांजलि।

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  14. प्रिय रविकर जी पहले तो प्रिय दोस्त एक नेक इंसान और हास्य कलाकार कवि अलबेला जी को हार्दिक श्रद्धांजलि बड़ा दुःख हुआ उनका असमय जाना सुन विश्वास ही नहीं हुआ प्रभु उनके करीबी जनों को साहस दे ...
    बहुत सुन्दर कारगर लिंक्स , मेरी रचना लाख हजार दिए विधवा को भी चुनाव के मद्देनजर आप ने चुना अच्छा लगा
    भ्रमर ५

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  15. है अब वो एक शख्शियत -

    नहीं जागीर पुरुषों ,बेहतरीन रचना नै ज़मीं तलाशती तोड़ती सी :

    नहीं पर्दा ये करती है बड़ी बेशर्म औरत है ,
    ये शौहर से जो लड़ती है बड़ी बेशर्म औरत है !
    ......................................................
    उठाया हाथ शौहर ने दिखाई आँख इसनें भी ,
    नहीं शौहर से डरती है बड़ी बेशर्म औरत है !
    ..................................................
    कहा शौहर ने देखो हद तुम्हारी घर की चौखट है ,
    वो चौखट पार करती है बड़ी बेशर्म औरत है !
    ................................................
    करो शौहर की तुम खिदमत रहे दम ज़िस्म में जब तक ,
    वो इससे भी मुकरती है बड़ी बेशर्म औरत है !
    ..................................................................
    उसे समझाओ 'नूतन' चीज़ है वो मन बहलाने की ,
    वो खुद को क्या समझती है !!बड़ी बेशर्म औरत है !

    ''बड़ी बेशर्म औरत है ''

    नहीं पर्दा ये करती है बड़ी बेशर्म औरत है ,
    ये शौहर से जो लड़ती है बड़ी बेशर्म औरत है...
    भारतीय नारी पर shikha kaushik

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  16. एक ज़िंदादिल लिखाड़ी विनम्र अलवेला ,

    सबका प्यारा भावप्रवण इंसान ,

    ब्लॉगिंग को जल्दी छोड़ गया ,

    सबसे मुख मोड़ गया ,

    हौसला यूँ तोड़ गया

    हमको यूं छोड़ गया।

    श्रद्धा सुमन अर्पित हैं इस ज़िंदादिल विनम्र शख्शियत को

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  17. सुन्दर प्रभाव और सशक्त भाव बोध की रचना-

    जाग गया है वोटर अब ,

    भांप गया है खानदानी फरेब को।
    हम वीर धीर

    ज़हर घोल रहे
    इस समाज में जो
    भाषण से तुम्हारी
    कायरता झलकती है
    साम्प्रदायिक राजनीति
    तुमसे टपकती है...
    हालात-ए-बयाँ पर अभिषेक कुमार अभी

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  18. रविकर भैया आये ,

    सशक्त चर्चा लाये ,

    हमको भी बिठलाए

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  19. आपका बहुत - बहुत आभार, मेरी रचना को यहाँ स्थान देने के लिए, और साहियता जगत के सितारे और अपनी हास्य कविता से सबका दिल जितने वाले महान कवि अलबेला खत्रीे जी को मेरी ओर से हार्दिक श्रद्धांजली.

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

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