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Monday, December 08, 2014

"FDI की जरुरत भारत को नही है" (चर्चा-1821)

मित्रों।
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

मुट्ठियाँ 
बंद मुट्ठी के बीचों - बीच 
एकत्र किये स्मृतियों के चिन्ह 
कितने सुन्दर जान पड़ रहे हैं 
रात के चादर की स्याह रंग में डूबा 
हर एक अक्षर 
उन स्मृतियों का निकल रहा है 
मुट्ठी की ढीली पकड़ से... 
स्पर्श पर Deepti Sharma 





चिंतन - ३ 

2014 का लोकसभा चुनाव अपना विशेष ऐतिहासिक महत्त्व रखता है क्योंकि इससे पहले सभी प्रबुद्धजनों का मानना था कि देश में अब पूर्ण बहुमत वाली एक पार्टी सरकार नहीं आ सकती है, यानि ख्याल था कि अब जो बनेगी वह खिचड़ी सरकार ही बनेगी.... 
जाले पर पुरुषोत्तम पाण्डेय 



RTI से खुलासा 

FDI की जरुरत भारत को नही है 

दोस्तों, हमने भारत सरकार को RTI डाली २ मुद्दों पर. 1 भारत में कितना FDI आजतक आया है ? जवाब आया की भारत में आज तक कुल मिलकर ३२६५०९ मिलियन US डॉलर आया है.. निचे चित्र में आप ये देख सकते हैं..२००० से २०१४ अप्रैल तक.. इसी डाटा को रूपये में भी सरकार ने बताया की १० लाख ५४७२१ करोड़ रूपये आये .. 
नवनीत सिंघल 

कंछल नहीं 

कानून का वस्त्रहरण किया वकीलों ने . 

''लखनऊ में व्यापारी नेता कंछल को वकीलों ने पीटा ,उनके कपडे फाडे और उन्हें मुर्गा बनाया ''आज के समाचार पत्रों में यह समाचार प्रमुखता से छाया रहा .सीधे तौर पर यह मामला कानून के साथ खिलवाड़ है और यह खिलवाड़ कानून के रखवालों द्वारा ही की गयी है इसलिए यह और भी ज्यादा निंदा का विषय है और देखा जाये तो यह एक ऐसा कार्य है जिसके लिए आज वकीलों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि एक तबका हमारे देश में ऐसा भी है जो इस व्यवसाय से मात्र जुड़ ही इसलिए रहा है कि इससे व्यक्ति को '' ... 
! कौशल ! पर Shalini Kaushik 


कुछ भी यूँ ही 

उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी 




जीवन चक्रव्यहू.... 

चौराहे पे दोड़ रहा हूँ
मगर ये चोराहा अजीब है
कोई सड़क नहीं निकलती यहाँ से
सिर्फ़ गोलचक्कर के चारों तरफ
दोड़ सकते हो
मगर कब तक ... 
आपका ब्लॉग पर इंतज़ार 


डालर छापने की मशीन लगा रहे मोदी। 
इस देश का सब कुछ छपे कागज के बदले बेच देंगे?  
| hastakshep | HASTAKSHEP 

इस देश को बचाना है तो मोदी का इ्स्तीफा चाहिए, जितनी देर होगी, उतना ही सत्यानाश…ठगों की सरकार है यह और आधार योजना अमेरिकी खुफिया निगरानी के लिए है…डालर छापने की मशीन लगा रहे मोदी। इस देश का सब कुछ छपे कागज के बदले बेच देंगे? | hastakshep | 
रांचीहल्ला पर Amalendu Upadhyaya 



12 comments:

  1. बहुत सुंदर सोमवारीय चर्चा अंक । सुंदर संयोजन । आभार 'उलूक' के सूत्र 'कुछ भी यूँ ही' को स्थान देने के लिये ।

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  2. बहुत बढ़िया लिंक्स-सह- चर्चा प्रस्तुति ...आभार!

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  3. shaandaar padhne or vicharne layak sankalan hameshaa ki tarah !! sdhanywaad !!

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  4. nice links .thanks to give place to my blog post .

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  5. सुन्दर लिंक्स ! सार्थक चर्चा !

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  6. सार्थक चर्चा सूत्र ..

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  7. बढ़िया भाव गंगा अनवरत प्रवहमान है इस रचना में।

    पहरा देते रातभर, कभी न मानें हार।
    आग सेंकने आ गये, अब ये चौकीदार।५।

    "गीत-कुदरत का उपहार अधूरा होता है"

    उच्चारण

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  8. धन्यवाद शास्त्री जी!

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  9. मेरी रचना ''नवगीत ( 3 ) : एक बार बतलाओ.... '' को शामिल करने का अति धन्यवाद ! मयंक जी !

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  10. बेहतरीन लिंक्स में मुझे भी शामिल करने के लिए बहुत २ आभार आदरणीय शास्त्री जी

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  11. बेहतरीन संकलन

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