साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Wednesday, March 30, 2016

"ईर्ष्या और लालसा शांत नहीं होती है" (चर्चा अंक - 2297)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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तुम कैसे हो इससे इनको क्या लेना 

मुर्दाघर की रौशन दुनिया कर देंगे  
तुम जागे तो मुर्दे हत्या कर देंगे... 
Sanjay Grover 
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बेमौत मरते सैनिक और फर्ज़ी राष्ट्रवाद 

जितने सैनिक हर साल आतंकवादियों से लड़कर नहीं मरते, उससे ज्यादा आत्महत्या कर मरते हैं 2000 से 2012 के बीच 12 साल में 3987 सैनिक मारे गए, जबकि, इस दौरान हमने युद्ध एक भी नहीं लड़ा। 2004-13 के दस सालों में खेत में अनाज उगाने में लगे – 1,58,865 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए। जम्मू कश्मीर में 2013 में, 24 जवानों ने आत्महत्या की, वहीं 15 जवान आतंकवादियों से मुठभेड़ में मारे गए .....जरूर पढ़ें पूरा लेख... 
रांचीहल्ला पर Amalendu Upadhyaya 
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आई हेट यू परमिला जी -  

असितकुमार मिश्र 

कहानी असितकुमार मिश्र जी के ब्लॉग   
" कोहबर  " से - 
मेरे मन की पर अर्चना चावजी  
Archana Chaoji 
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घर परिवार में उलझी स्त्री 

प्रेम में आ कर सुलझती है 

ग़ज़ल 

बहकती है दुनिया लेकिन वह नदी की तरह बहती है 
घर परिवार में उलझी स्त्री प्रेम में आ कर सुलझती है 

सरे राह दौड़ कर आना चने का साग खोंट कर खाना 
बचपन की रेल अकसर तुम्हारे साथ यादों में गुज़रती है ... 
सरोकारनामा पर Dayanand Pandey 
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समीक्षा-पूर्णिमा वर्मन 

कल्पना रामानी जी इंटरनेट और वेब का एक जीता जागता चमत्कार हैं। अगर इंटरनेट न होता तो हम इस चमत्कार से वंचित रह जाते। एक ऐसा चमत्कार जो देखते ही देखते एक सामान्य गृहणी को जानी-मानी रचनाकार के रूप में हम सबके प्रकट कर दे... 

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी पर 

कल्पना रामानी 

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दिल का निज़ाम 

दिल का निज़ाम रोज़ बदलता चला गया 
हाथों से मेरे वक़्त फिसलता चला गया... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
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पाक दामन 

चेत सिंह और सचेत सिंह दोनों सगे भाई अपने पिंड लावलपुर बैसाखी की खुशियों पर घर आए हैं , भरा पूरा दोनों का परिवार है दोनों के दो दो बच्चे जो स्कूली शिक्षा में हैं चेत सिंह कश्मीर में सरहद पर तैनात हैं। और सचेत सिंह नागरिक पुलिस में जो वर्तमान में जिला फगवाड़ा में एक चेक पोस्ट पर तैनात हैं... 
udaya veer singh 
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"Beauty' by John Masefield  

-कविता का हिन्दी अनुवाद” 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

मैं ईश्वर से
पूछता हूँ
सौन्दर्य क्या है?
तो मौन में से
उत्तर आता है-
प्रेयसी के बाल,
उसकी आँखें,
उसके ओंठ,
और उनसे निकली
मधुर ध्वनि
यही तो 
सबसे बड़ा सौन्दर्य है!... 

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(चर्चा अंक-2853)

मित्रों! मेरा स्वास्थ्य आजकल खराब है इसलिए अपनी सुविधानुसार ही  यदा कदा लिंक लगाऊँगा। शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  ...