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Monday, November 20, 2017

"खिजां की ये जबर्दस्ती" (चर्चा अंक 2793)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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...जिसे ...भी कहा जाता है 

अजीब सी बात है पर पता नहीं 
सुबह से दिमाग में एक शब्द घूम रहा है टट्टी 
तेरी टट्टी मेरी टट्टी से खुशबूदार कैसे... 
उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी  
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नहीं मुश्किल नदी के पार होना 

नहीं मुश्किल नदी के पार होना  
रहे माँझी अगर बेदार होना... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi  
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लोहे का घर-30 

बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय  
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9 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. सुंदर प्रस्तुतिकरण। सम्मान हेतु हृदयतल से आभार।

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  3. आज की सुन्दर प्रस्तुति में 'उलूक' के पन्ने को भी जगह देने के लिये आभार आदरणीय्।

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  4. sundar prastuti.mere blog ko sthan dene hetu hardik dhanyawad

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  5. क्रांतिस्वर की पोस्ट को इस अंक में शामिल करने के लिए आदरणीय शास्त्री जी को बहुत- बहुत शुक्रिया।

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  6. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति

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  7. सार लिए आज की चर्चा ...

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  8. सुन्दर चर्चा. मेरी रचना शामिल की. आभार.

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  9. बेहतरीन लिंक्स संयोजन ....

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