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Sunday, November 26, 2017

"दूरबीन सोच वाले" (चर्चा अंक-2799)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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उनकी तरह होने का मर्म 

पेड़ों के पास 
जो भाषा होती हमारी तरह 
जो उनके पास 
अभिव्यक्त होने की सहूलियतें होती 
तो क्या वे भी उस भाषा में 
रोते-चिल्लाते शिकायत करते... 
अनुशील पर अनुपमा पाठक 
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दोहे  

"करता क्यों अभिमान"  

(राधा तिवारी) 

जब से जग में जिन्दगी, हुई नशे में चूर l 
हिंसा बैर समा गया, हम सब मैं भरपूर ll

 करना नहीं गुमान को , धरती के इंसान l
 चार दिनों की जिंदगी , क्यों करता अभिमान... 
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आ जाऊँगा मैं 

Purushottam kumar Sinha  
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7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. मनमोहक प्रस्तुति हेतु बधाई। शुभकामनाएँ।

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  3. चर्चा मंच की निरंतरता बनी रहे सदा सर्वदा!
    अशेष शुभकामनाएं!
    आभार!

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  4. हमेशा की तरह आज की सुन्दर चर्चा के शीर्षक पर 'उलूक' की दूरबीन को जगह देने के लिये आभार आदरणीय।

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  5. सुंदर चर्चा

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  6. sarthak links chayan kiya hai aapne.mere blog ko sthan dene ke liye hardik dhanyawad

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  7. उम्दा चर्चा! मेरी रचना शामिल कार्ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी!

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