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Sunday, December 16, 2018

"समझौता" (चर्चा अंक-3187)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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ग़ज़ल  

"अपने ज़माने याद आते हैं" 

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मुझे ऊपर उठना था 

मुझे ऊपर उठना था  
अपनी मानवीय कमजोरियों से  
आदान प्रदान के साँप सीढ़ी वाले खेल से  
मैंने खुद को साधना शुरू किया  
रोज खुद से संवाद किया... 
vandana gupta 
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वह समझ न सकी 

वह समझ न सकी वह समझा न सका,  
बीत गई उम्र समझते समझाने में।  
कुछ ऐसे तल्ख हुये रिश्ते,  
वह अब बैठा करते हैं मयखाने में... 
Jayanti Prasad Sharma  
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अदब- ए - जहाँ !! 

Anita Saini 
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यूँ ही..कुछ ख्यालों की स्याही,  

छितरी बिखरी सी.. 

सूखी हुई सी 

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क्या चाहते हैं ? 

Akanksha पर Asha Saxena 
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देश सुरक्षा गई भाड़ में  

राफेल बन गया इनका गेम,  

संविधान से खेले नित -उत  

नामचीन हुआ है नेम। 

Virendra Kumar Sharma  
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surprising benefits of  

blood donation in hindi 

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कांग्रेस के सामने खड़ी चुनौतियाँ 

जिज्ञासा पर pramod joshi 
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समझौता 

Sudhinama पर sadhana vaid 
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कई रिश्ते मिटा देगा सिंगल चाइल्ड का चलन  

मोनिका शर्मा 

विजय राज बली माथुर 
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मैं हूँ पर तुम-सी.... 

दीप्ति शर्मा 

yashoda Agrawal  
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दोहे  

" इंसानों सेआस "  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 

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ऐसे लोगों पर भी  

ध्यान दिया जाना चाहिए 

''इतनी ठंड है पर आपके काम करने वालों के पास उचित कपडे नहीं हैं !'' पहले तो वह चौंका, फिर बोला, ''इनमें ज्यादातर परमानेंट नहीं हैं, काम और जरुरत के अनुसार इन्हें रखा जाता है।'' मैंने कहा, ''वह तो ठीक है, पर वे भी तो इंसान हैं, जैसे ये पोशाकें इन्हें उपलब्ध करवाते हैं, वैसे ही मौसम के अनुसार कपडे दिए जा सकते हैं !'' * *''अब ये तो भैया जी ही कर सकते हैं, मैं क्या बोलूँ !''... 
गगन शर्मा 
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अगर तूफ़ानों का डर...!!💐 

अगर तूफ़ानों का डर होता समन्दर पार नहीं करते।  
गर यकीं ना होता कश्ती का लहरों पर ऐतबार नहीं करते... 
kamlesh chander verma 
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इस भाषण से जीता मध्यप्रदेश :  

Rahul gandhi का दमदार भाषण 

SACCHAI 

10 comments:

  1. सुप्रभात |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  2. शुभ प्रभात आदरणीय
    बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति 👌
    बेहतरीन रचनाएँ, सभी रचनाकारों को शुभकामनायें
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए सह्रदय आभार
    सादर

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  3. सुन्दर लिंक्स

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  4. सुंदर चर्चा प्रस्तूति। मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिये बहुत धन्यवाद।

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  6. शुभ प्रभात..
    आभार..
    सादर...

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  7. सुन्दर सूत्रों का समायोजन आज की चर्चा में ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  8. सुन्दर रविवारीय अंक।

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  9. शानदार चर्चा मंच

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  10. आदान प्रदान के साँप सीढ़ी वाले खेल से
    मैंने खुद को साधना शुरू किया
    रोज खुद से संवाद किया...
    हमेशा की तरह बेहतरीन प्रस्तुति ।।। शुभ प्रभात ...

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