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Sunday, December 30, 2018

"नये साल की दस्तक" (चर्चा अंक-3201)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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नदी का खामोश हो जाना 

वह निकली ही अकेली थी  
वह पिघली भी अकेली थी... 
Mera avyakta पर  
-राम किशोर उपाध्याय 
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4 comments:

  1. बहुत सुन्दर रविवारीय चर्चा प्रस्तुति

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  2. सुन्दर चर्चा। आभार।

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  3. शास्त्रीजी आपका बहुत धन्यवाद ।
    विविध रचनाओं से सजी चौपाल ।
    हर नया दिन, हर नया साल,
    शुभ हो,मंगल हो,हो बेमिसाल !

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