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Friday, December 21, 2018

"आनन्द अलाव का" (चर्चा अंक-3192)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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ढूंढ लें खुद को 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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बर्फीला दिसम्बर...... 

श्वेता सिन्हा 


गुनगुनी किरणों का 
बिछाकर जाल 
उतार कुहरीले रजत धुँध के पाश 
चम्पई पुष्पों की ओढ़ चुनर  
दिसम्बर मुस्कुराया... 
yashoda Agrawal  
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जो बैठ न्याय की.... 

जो बैठ न्याय की कुर्सी पर ,  
मुंसिफ इंसाफ नहीं करते।। 
जनता क्या उनको  
ईश्वर/ख़ुदा भी माफ नहीं करते... 
kamlesh chander verma 
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596.  

दुःख  

(दुःख पर 10 हाइकु) 

1.   

दुःख का पारा  
सातवें आसमाँ पे   
मन झुलसा !   
2.   
दुःख का लड्डु   
रोज-रोज यूँ खाना   
बड़ा ही भारी... 
डॉ. जेन्नी शबनम  
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हम आंगन के फूल 

आंगन के हर फूल से, करो न इतना मोह  
जीवन पथ में एक दिन, सहना पड़े बिछोह... 
shashi purwar  

8 comments:

  1. शुभ प्रभात...
    आभार..
    सादर..

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  2. शुभ प्रभात आदरणीय

    बेहतरीन चर्चा संकलन 👌
    सादर

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  3. शुभ प्रभात |उम्दा संकलन लिंक्स का |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

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  4. चर्चा मंच याने हर ब्लॉगर का ह्रदय बेहतरीन लिंको से सजा मंच

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  5. अलाव के चारों तरफ़ बैठ कर हाथ तापना सबके साथ अच्छा लगा.
    धन्यवाद शास्त्रीजी.
    बधाई सभी रचनाकारों को.

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  6. सुन्दर चर्चा हमें शामिल करने हेतु हृदय से आभार

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  7. आदरणीय सर -- सादर आभार अद्भुत लिंक संकलन के बीच मेरी साधारण सी रचना को स्थान देने के लिए | सभी रचनाकारों को शुभकामनायें | सादर -

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