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Friday, January 18, 2019

"क्या मुसीबत है" (चर्चा अंक-3220)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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एक व्यंग्य :  

आँख दिखाना 

आज उन्होने फिर आँख दिखाई और आँख के डा0 ने अपनी व्यथा सुनाई--" पाठक जी !यहाँ जो मरीज़ आता है ’आँख दिखाता है " - फीस माँगने पर ’आँख दिखाता है ’। क्या मुसीबत है ---। --" यह समस्या मात्र आप की नहीं ,राजनीति में भी है... 
आनन्द पाठक 
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कोई गुनाह तो नहीं करते,  

गर मुहब्बत करते हो 

डरना ख़ुदा से, गर इंसानीयत से बग़ावत करते हो 
ख़ुदा की इबादत है, गर इंसान की इबादत करते हो... 
Sahitya Surbhi पर 
Dilbag Virk 
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जार्ज बर्नार्ड शॉ ने सिखाया है -  

किताबें भेंट क्यों नहीं करनी चाहिए 

रिष्ठ साहित्यकार सूरज प्रकाश जी की पुस्तक *'लेखकों की दुनिया'* पढ़ रही थी। कई लेखकों के बारे में बेहद गहन अध्ययन के बाद संकलित यह कमाल की पुस्तक है। पुस्तक देश -विदेश के साहित्यकारों में रूचि रखने वाले जरूर, जरूर पढ़ें। वादा है आनंद में रहेंगे... 
Sehar पर Ria Sharma  
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जनम- दिन 

मां धरित्री!  
पूरी होने पर हर परिक्रमा सूरज की तुम्हारी।  
मैं मना लेता अगला जनम दिन। 
अपने अपने जतन दोनों मगन... 
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मानवता खतरे में पाकर,  

चिंतित रहते मानव गीत....  

सतीश सक्सेना 

हम तो केवल हँसना चाहें  
सबको ही, अपनाना चाहें  
मुट्ठी भर जीवन पाए हैं  
हँसकर इसे बिताना चाहें... 
yashoda Agrawal  
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दोस्त 

Akanksha पर 
Asha Saxena 
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मैं भूख का गीत हूँ 

जिनकी थाली नहीं है रोटी
उन भूखों का गीत  हूँ
जिनके बोल सुने न कोई
उनके स्वर का संगीत हूँ
                               मैं भूख का गीत हूँ . 
सरोकार पर Arun Roy  
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2 comments:

  1. सुन्दर शुक्रवारीय अंक।

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  2. ...बेहद सुंदर विशेषांक सुंदर रचनाओं का संकलन

    ReplyDelete

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