Followers

Friday, January 25, 2019

"जन-गण का हिन्दुस्तान नहीं" (चर्चा अंक-3227)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
--

अपने घर जलाए लोगों ने करके नफ़रत 

ऐ दिल न डर बेमतलब, दिखा थोड़ी हिम्मत 
इश्क़ किया जिसने, वही जाने इसकी लज़्ज़त। 
वो सहमे-सहमे से हैं और हम बेचैन 
देखो, कैसे होगा अब इजहारे-मुहब्बत... 
Sahitya Surbhi पर 
Dilbag Virk  
--

ग़ज़ल.... 

सैयद गुलाम रब्बानी 'अयाज' 

हार पर हार खाए जाता हूँ।
बेसबब फिर भी मुस्कुराता हूँ।

रोते रहते हैं आह भरते हैं,
हाल दिल का जिन्हें सुनाता हूँ... 
Digvijay Agrawal 
--
--
--

----- ॥ टिप्पणी १८ ॥ ----- 

बिलकुल सही..... यदि वास्तव में ये मूलत: भारत के हैं और यदि बांग्ला देश भारत का मित्र देश है तो इनके बसने के लिए उससे भूमि की भी मांग करनी चाहिए.....वैसे ६९ वर्ष हो गए संविधान लागू हुवे अबतक देशवासियों यह ज्ञात नहीं है कौन इस देश का मित्र देश है कौन शत्रु और कौन तटस्थ..... क्या करते रहते हैं इस देश के विदेश मंत्री क्या संसद मख्खियां मारने के लिए है.....? 
NEET-NEET पर Neetu Singhal 
--
--

जो तुम चाहो .... 

देनेवाला ऊपर बैठा निहारता वारता  
बहुत कुछ देता ही रहता  
तब भी बहुत कुछ कसकता  
अनपाया सा रह जाता  
आज सोचती हूँ माँग ही लूँ  
शायद कहीं लिखनेवाले ने  
लिखा हो जो तुम चाहो ...  
झरोख़ा पर 
निवेदिता श्रीवास्तव  
--
--
--

भवसागर में अकेली 

मै एकाकी नौका पर सवार 
खेलती लहरों के साथ उ
त्तंग लहरों का संग 
बहुत आकृष्ट करता था 
जब अवसर हाथ आया  
रोक न पाई खुद को  
अकेले ही चल दी  
बिना किसी को साथ लिये ... 
Akanksha पर 
Asha Saxena  
--
--

प्रकृति का खेल 

विकर्षण में होता है
अपनापन।बढ़ जाता हैजुटनाठेलने में एक दूसरे को।... 
--

अम्मा का अवसाद 

फूलों के हार के पीछे 
सुनहरे फ्रेम के अंदर   
सजी तस्वीर में
अम्मा के चहरे पर
एक करुण मुस्कान है ,
हॉल में जुटा सारा परिवार
एकत्रित भीड़ के सामने
बिलख-बिलख कर हलकान है...
Sudhinama पर 
sadhana vaid  

4 comments:

  1. एक से बढ़कर एक रचनाओं की लड़ियां पीरो दी आपने। बधाई और आभार!

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात उम्दा संकलन लिंक्स का |मेरी रचना शामिल करने के लिये धन्यवाद |

    ReplyDelete
  3. शुभ प्रभात आदरणीय
    सुन्दर चर्चा प्रस्तुति, बहुत ही अच्छी रचनाएँ, सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें
    चर्चा में मुझे स्थान देने के लिए सह्रदय आभार आदरणीय आप का
    सादर

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर सार्थक सूत्रों का संकलन आज का चर्चामंच ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।