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Saturday, September 28, 2019

" आज जन्मदिन पर भगत के " (चर्चा अंक- 3472)

स्नेहिल अभिवादन   
शनिवार की चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 - अनीता सैनी 
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ग़ज़ल 
 "ईमान आज तो" 
 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)  

उच्चारण 
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आज जन्मदिन पर भगत सिंह का -- 

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ढीली-ढीली सी वो निक्कर,  
खुली-खुली बनियान.. 
बुरी बेटियाँ 
बुरी होती हैं बेटियाँ। 
 ब्याह के आते चाहिए बँटवारा। 
 एकछत्र सम्राज्य मांगें सारा का सारा। 
 खूंटे की मजबूती तौलती है आत्महत्या की धमकी।  
प्रभुत्व/रूप नशापाती वंश खत्म करती सनकी।  
 " सोच का सृजन "
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सुर और साज 

 मन की वीणा - कुसुम कोठारी। 
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शून्य पार 

Rohitas Ghorela 
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तेरे सुर और मेरे गीत ..... 

उपन्यास 'ढाई कदम' का विषय-वस्तु । 


10 comments:

  1. बहुत सुन्दर।
    धन्यवाद अनीता सैनी जी।
    आपके श्रम को नमन।

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  2. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  3. सुन्दर सामयिक प्रस्तुति.
    शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह को शत-शत नमन.
    सभी रचनाकारों और प्रस्तुतिकर्ता को बधाई.

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  4. बहुत सुंदर चर्चा अंक ,सभी रचनाकारों को शुभकामनाएं ,मेरी रचनना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हृदय तल से धन्यवाद अनीता जी ,सादर

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  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति। मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार अनीता जी

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  6. बेहतरीन और लाजवाब प्रस्तुति । मेरे सृजन को मान देने आपका हार्दिक आभार ।

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  7. बहुत सुंदर सराहनीय प्रस्तुतीकरण।
    मेरे भावों को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार बहना

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  8. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति सखी ।

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  9. बहुत सुंदर प्रस्तुति। मेरे उपन्यास 'ढाई कदम' को जन-जन तक पहुँचाने हेतु आपका हार्दिक आभार अनीता बहन. शहीद-ए-आज़म सरदार भगत सिंह को शत-शत नमन.
    सभी रचनाकारों बधाई.

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