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Monday, August 17, 2020

'खामोशी की जुबान गंभीर होती है' (चर्चा अंक-3796)

शीर्षक पंक्ति : आदरणीया मीना भारद्वाज जी की रचना से

सादर अभिवादन।
सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है। 

गावों तक अब फैल रहा 
करोना महामारी का जाल,
निजात की आस में कट रहा 
2020 का महाविकट साल।

-रवीन्द्र सिंह यादव 

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-
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My Photo
नियति ने कोमल रची, यह नारी की जात ,
तन से भी कोमल बने, मन के सब जज्बात;
मन के सब जज्बात , सहारा इसको चाहता,
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मीठा-खारा

कुछ  मीठा  कुछ  खारापन  है,
क्या क्या स्वाद लिए जीवन है।
कैसे   आँख   मिलाकर   बोले,
साफ़  नहीं जब उसका मन है।
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तुम्हारे शहर की बूँदें

 बारिश में जब भी तुम्हारे 
शहर गया 
न तो तुम दिखी 
न मुलाक़ात हुई 
पर बहुत सी बूँदें 
तुम्हारे शहर की 
छाते में सिमट कर आ गईं 
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"त्रिवेणी"
My Photo
खामोशी की जुबान गंभीर होती है।
जब बोलती है तो उसकी गूंज ,
 बेआवाज़ ही ,दूर तक सुनाई देती है।।
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मनाली खूबसूरत पहाड़ी स्थल या एक या

   मनाली उत्तरी भारत के सबसे खूबसूरत हिल स्टेशनों में से एक है। हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत राज्य में स्थित, यह लेह राजमार्ग पर कुल्लू घाटी से 40 किलोमीटर आगे स्थित है। मनाली लुभावनी रूप से सुंदर है । इसके साथ, सेब  और चेरी खिलता है। यह ब्यास नदी के लिए एक सुंदर पृष्टभूमि बनाता है जो शहर से बहती है । मनाली अपने आकर्षण में ताज़ा और देहाती है। मनाली की सुंदरता को बर्फ से ढकी चोटियों द्वारा और बढ़ाया जाता है जो आपके सिर के चारों ओर हैं ।  किंवदंती है कि महान बाढ़ के बाद, मनाली में पृथ्वी पर जीवन शुरू हो गया था और चूंकि जीवन अपने आप को नवीनीकृत कर रहा था। इसलिए जगह प्राकृतिक सौंदर्य से भर गई थी।
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उनके नाम का अंति‍म भोजन....
My Photo
सखुआ के पत्तल में  
निकाला गया भोजनसब उन्हीं की पसंद का था 
बैंगन-बड़ी की सब्ज़ी 
कोहड़ा, भिंडी, पालक समेत
कई तरह के व्यंजन परोसे गए 
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घर से भागा लड़का

घर से भागा लड़का खो देता है 
जीवन भर का परिवार में कमाया विश्वास।
नकार दिए जाते हैं उतरन की तरह वह और 
 महत्वपूर्ण मुद्दों पर रखे उसके विचार।
अविश्वास की नज़रें घूरती हैं उल्लू की तरह 
 फ़रेबीपन का करवाती हैं एहसास।
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हिन्दी साहित्य का कैनवास
वर्षा के रंग | गीतों के संग

      सुप्रसिद्ध  कवयित्री महादेवी वर्मा ने जहां एक ओर 'मैं नीर भरी दुख की बदली' लिख कर स्वयं को प्रकृति से एकाकार कर लिया है वहीं दूसरी ओर प्रिय की प्रतीक्षारत नायिका के मुख से वे कहलवाती हैं -
लाए कौन संदेश नए घन!
अम्बर गर्वित, हो आया नत,
चिर निस्पंद हृदय में उसके
उमड़े री पुलकों के सावन!
लाए कौन संदेश नए घन!
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सोचे सोच होवई

मन बुनता है शब्दों से 
विचारों की टोकरियाँ 
और भरता रहता है सपनों के फूल 
भावों की डोर में पिरो कर 
नादान है .. यह नहीं जानता 
मात्र छाया है यह ! 
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दूसरी पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि

रहे सदा अटल अपने नाम की तरह
जो भी मन में ठाना  पूर्ण किया शिद्दत से
 हर सही  बात पर अडिग रहे नहीं डिगे उससे
जो भी देश हित के लिए सोचा किया
जुटे रहे पूर्ण मनोबल से |
सफलता से मुख न मोड़ा
असफलता से भय न माना
आए राजनीति में जब
 समाज के हित को दी प्राथमिकता |
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आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगले सोमवार। 
रवीन्द्र सिंह यादव

13 comments:

  1. बहुत ही सुंदर प्रस्तुति।मेरी रचना को स्थान देने हेतु सादर आभार आदरणीय।सभी रचनाकरो को बधाई एवं शुभकामनाएँ।

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  2. विविधरंगी विषयों पर पठनीय रचनाओं के सूत्रों का सुंदर संकलन, आभार मुझे भी आज के अंक में शामिल करने हेतु !

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  3. विविधताओं से परिपूर्ण भावों से सजी सुन्दर प्रस्तुति । चर्चा में सृजन को सम्मिलित करने और प्रस्तुति के शीर्षक में सृजन की पंक्ति का चयन करने हेतु सादर आभार 🙏

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  4. उपयोगी लिंकों के साथ संयत चर्चा।
    आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

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  5. सभी रचनाकारों को नमस्कार, यह मेरा सौभाग्य है जो मेरी रचना इस मंच में शामिल किया गया l यहां एक से एक अच्छे रचना प्रस्तुत किए गए हैं l

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  6. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  7. सुंदर लिंकों से सजी प्रस्तुति,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाये एवं सादर नमन

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  8. प्रस्तुति सुंदर रही ! आभार

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  9. बहुत अच्छा संकलन रवींद्र जी ...एक से बढ़कर एक

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  10. बहुत अच्छी Links...
    बढ़िया संयोजन
    साधुवाद 💐

    मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार 🙏

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  11. बहुत सुंदर रचनाओं का संकलन। मेरी रचना को शामिल करने के लिए आप का तहेदिल से शुक्रिया 🙏 ।

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  12. एक से बढ़कर एक सुन्दर रचनाओं के लिंक्स । सराहनीय प्रस्तुतिकरण । हार्दिक आभार ।

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  13. बहुत ही बढ़िया लिंक्स, हमारे ब्लॉग पर भी जरूर आएं प्रेरणादायक सुविचार

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