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Friday, July 15, 2022

जी रहे हैं लोग विरोधाभास का जीवन (चर्चा अंक 4491)

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय शांतनु सान्याल जी की रचना से। 

सादर अभिवादन। 

शुक्रवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।

आइए पढ़ते हैं चंद चुनिंदा रचनाएँ-

गीत "तुकबन्दी से होता वन्दन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

 
दुर्जन के प्रति भरा निरादर

महामान्य का करती आदर

तुकबन्दी से होता वन्दन

स्वर-व्यञ्जन ही तो है जीवन

 *****

प्रभात पूर्व जागरण - -

हाथों में लिए
हुए खड्ग - खंजर
बढ़ चले हों जैसे
वध स्थल
की ओर,
न जाने किस मिथ्या प्रतिश्रुति के वशीभूत,
जी रहे हैं लोग विरोधाभास का जीवन,

*****

कभी यूं ही


यूं ही...

 कभी यूं ही, दे जाए बहके लम्हें,

उलझे शब्दों के, अनकहे,

खोले, राज सभी, बहके जज्बातों के,

स्वप्निल, सारी रातों के,

नींद चुरा ले,

अपनाए, गैर कहाए!

*****

 गूँगी गुड़िया : स्रिस्टा 

चानणों रंग सात रचावै 
नैणा हिवड़ा घोळे हेत।
पग ध्वणियां असाढ़-सावण री
बाट जोवती नाचे रेत।
दूब उचके काळजे माथे 
 फले फूलती कूणा है।।

*****

पौध का होता मरण

जाल में पंछी फँसा ज्यों

भूलता अपना धर्म

रूढ़ियाँ पायल पगों की

कौन समझेगा मर्म

दामिनी गिरती सुखों पर

ले कलुषता के चरण

वृक्ष...।।

*****

राजमाता उन्हें खरीद नहीं पाई

यह चरित्र है बालकवि बैरागी के राजनेता रूप का। आज की राजनीति में ऐसी बातें प्रायः दुर्लभ हैं, लेकिन बैरागी ऐसे ही हैं-राजनीति की काजल की कोठरी में भी प्रायः बेदाग छवि वाले। उनके इतने लम्बे राजनीतिक जीवन में सुरा, सुन्दरी अथवा आर्थिक छल-प्रपंच का कोई आरोप नहीं है। इसके पीछे उनकी साहित्य साधना का ही प्रभाव है। सरस्वती का वरदहस्त ही उनकी इस दृढ़ता का कारण है। 

*****

पढ़ना यानी मिलना अपनी रूह से...

कश्मीर क्या है आखिर...कश्मीरी कौन हैं. जिन कश्मीरी पंडितों के दर्दतकलीफ को राजनीति ने बेहद चालाकी से अपने नफे के लिए भरपूर उगाहा उनके दर्द असल में हैं क्या यह किसने पूछाजिन कश्मीरी मुसलमानों के लिए नफरत उगाई उनके भीतर जो प्यार था/हैजो अपनापन है उसे किसने देखा?

*****

एक गीत -शब्द -जल में चाँदनी की छवि शिकारे की

आज भी

यह एक चन्दन

वन कथाओं का

एक अनहद

नाद इसमें

है ऋचाओं का,

शब्द जल में

चाँदनी की

छवि शिकारे की.

***** 

फिर मिलेंगे। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

10 comments:

  1. बेहतरीन लिंकों से सजी सँवरी सिुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

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  2. सुंदर रचनाओं से परिपूर्ण बेहतरीन अंक ।

    ReplyDelete
  3. बेहतरीन रचना संकलन, सभी रचनाएं उत्तम , रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं मेरी रचना को चयनित करने के लिए सहृदय आभार

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  4. उम्दा चर्चा।

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत सुंदर सराहनीय संकलन।
    मेरे सृजन को स्थान देने हेतु हृदय से आभार।
    सादर

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  7. बहुत खूबसूरत चर्चा संकलन

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  9. आदरणीय डॉ साहब एवं आदरणीय रवीन्द्र जी 
    इस मरीज का सदैव उत्साह वर्धन करने के लिए व आशीर्वाद के लिए
    आपको व समस्त चर्चामंच को बहुत बहुत आभार !

    अंधकार को हर लेते गुरुवर के दोउ हाथ ,
    आशीर्वाद मिलता रहे मंच-चर्चा के साथ ||

    जय गुरुदेव ! सादर वंदन  खूब खूब अभिनन्दन !!

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