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Saturday, July 16, 2022

"दिल बहकने लगा आज ज़ज़्बात में" (चर्चा अंक-4492)

शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।

मित्रों! आज देखिए कुछ अद्यतन लिंक!

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ग़ज़ल "आने लगा है मज़ा मात में" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 


दोस्ती बढ़ गयी बात ही बात में
दिल बहकने लगा आज ज़ज़्बात में
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शायद रिश्ता हो उनसे किसी जन्म का
वो रहे होंगे अपने कभी साथ में 

उच्चारण 

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.....और जब उन्हें मेरी खबर मिली तो नवाजिशें भारी पड़ने लगीं एक सुबह अचानक अखबार पढ़ते-पढ़ते मुझे दिखना एकदम बन्द हो गया। मेरे ज्येष्ठ पुत्र नीरज ने घबराकर श्री बैरागीजी को फोन किया। बैरागीजी ने प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डा. नरूला से बात की और मुझे नीमच बुलाया। न सिर्फ बुलवाया, बल्कि प्रदेश के यशस्वी पूर्व मुख्यमन्त्री श्री दिग्विजय सिंह से वार्ता कर मेरे न चाहने पर भी आर्थिक सहायता देकर फिर इस दुनिया के (मुझे मिलाकर) मनहूस चेहरे देखने की दिव्य दृष्टि मुझे प्रदान की। आईना आज भी मुझे हैरत से देखता है। 

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हर उपलब्धि नेट पर 

कलम दवात हुए छू मंतर

तख़्ती बुतका ग़ायब ।

कम्प्यूटर का चला जमाना

पढ़े लिखेंगे सब ॥ 

जिज्ञासा की जिज्ञासा 

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भूल जाता हूं 


झूल कर, कभी स्मृतियों के पवन संग,
भूल जाता हूं खुद को!
गहराता वो क्षितिज, हर क्षण बुलाता है उधर,
खींच कर, जरा सा आंचल में भींच कर,
कर जाता है, सराबोर,
उड़ चलते हैं, मन के सारे उत्श्रृंखल पंछी,
गगन के सहारे, क्षितिज के किनारे,
छोड़ कर, मुझको,
ओढ़ कर, वो ही रुपहला सा आंगन,
भूल जाता हूं खुद को! 

कविता "जीवन कलश" 

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स्वार्थी मानव 

उतरी शिखर चोटी

खरी वो पावनी विमला।

जाकर मिली सागर

बनी खारी सकल अमला। 

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सिडनी डायरी --4 

सब कुछ स्वप्नलोक जैसा . 
दूर दूर तक केवल बर्फ ही बर्फ ..  यह विवरण आस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में स्थित स्नोई माउंटेन’ (snowy mountain)  की पेरिशर वैली का है 
Yeh Mera Jahaan गिरिजा कुलश्रेष्ठ

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श्रीलंका : वर्तमान परिदृश्य 


एक कवि होने के नाते श्रीलंका के वर्तमान परिदृश्य पर 
एक कुंडलिया छंद का सृजन हो गया 
जो आप सब के रसास्वादन के लिए यहां प्रस्तुत कर रहा हूं : 
कुंडलिया 
 ********
लंका नगरी  का सखे, मत  पूछो तुम हाल,          
थी सोने  की जो  कभी,हुई आज  कंगाल।  

हुई   आज  कंगाल, त्रस्त  है  जनता  सारी,
ग़लत नीतियां नित्य,पड़ीं शासन की भारी।

मेरा सृजन 

--

पुनरागमन  

हर शख़्स की है अपनी कल्पना, अपनी ही
भविष्यवाणी, जल प्रलय हो या हिम -
युग की वापसी, या भस्मीभूत
होती हुई ये ख़ूबसूरत
पृथ्वी, शून्य से
शून्य तक
फिर भी
रहती है कहीं न कहीं, आबाद ये यायावर
ज़िन्दगी !  
अग्निशिखा : 

--

डस्ट स्टॉर्म 

ख्यातनाम अमेरिकी फोटोग्राफर स्टीव मैक्करी का खींचा एक चित्र है - डस्ट स्टॉर्म। जगह जैसलमेर की है, साल 1983 का। बैकग्राउंड में गहरी आँधी है, आँधी से आगे पाँच-सात औरतें खड़ी हैं। लाल रंगी ओढ़नी ओढ़े, हाथों-पैरों में टड्डे-कड़ले पहने, साथ-साथ खड़ी औरतें। लेकिन आज की बात इन औरतों की नहीं है। बात चित्र में जमीन पर पड़े रीते घड़े और खाली मटकी की भी नहीं है। Bahut-kuch : बहुत कुछ 

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विचार मंथन 

brainstorming

"कुछ नहीं है हम इंसान,

मूली हैं ऊपर वाले के खेत की" ।

सुना तो सोचा क्या सच में

हम मूली (पौधे) से हैं ऊपर वाले के 

सृष्टि रूपी खेत की ? 

Nayisoch 

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यह पल 

जो अनंतानंत ब्रह्माडों का स्वामी है 

वही भीतर ‘मैं’ होकर बैठा है 

 एक होकर मानो दो में बंट गया है 

समय अखंड है, अखंड है चेतना

जैसे जीवन अखंड है 

मन पाए विश्राम जहाँ 

--

जीवन की गाड़ी 

तुम मौन हुए  वह  हुई मुखर 
सारी सीमाएं तोडी संस्कारों की 
सारे बंधन तोड़ दिए की मनमानी 

आगे क्या होगा न सोचा उसने |

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पवन शर्मा की लघुकथाओं पर बनी दो लघु फ़िल्में 

देश के लघुकथाकार पवन शर्मा की दो लघुकथाओं - "स्कूल कथा" और "अनुभव" पर बेगूसराय  ( बिहार ) के दूरदर्शन के पूर्व अधिकारी अनिल पतंग ने अपने यू-टयूब चैनल स्टॉप टीवी स्टूडियो क्रिएटिव विजन नेटवर्क के माध्यम से लघु-फ़िल्में बनाई हैं | इन दोनों फिल्मों को यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है कवि श्रीकृष्ण शर्मा (Kavi Shrikrishna Sharma) 

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गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर  

आस्था दीप जला सदगुरु वाक्यों का अनुकरण करो.... 

'तुलसी' की  पूजा करने  वालों, 'गंगा' के गीत लिखो 

कटीली टहनियों पर भी खिलते हैं महकते फूल, 

दुश्मन की हथेली पर भी प्रेम गीत लिखो। 

सागर लहरें उर्मिला सिंह

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पशुओं के ट्रांसपोर्टेशन के लिए फोटो जरूरी ताकि क्रूरता रुके। 

कही-अनकही 

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दादू सब ही गुरु किए, पसु पंखी बनराइ 

घर में माता-पिता के बाद स्कूल में अध्यापक ही बच्चों का गुरु कहलाता है। प्राचीनकाल में अध्यापक को गुरु कहा जाता था और तब विद्यालय के स्थान पर गुरुकुल हुआ करते थे, जहाँ छात्रों को शिक्षा दी जाती थी। चाहे धनुर्विद्या में निपुण पांडव हो या सहज और सरल जीवन जीने वाले राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न या फिर कृष्ण, नानक हो या बुद्ध जैसे अन्य महान आत्माएं, इन सभी ने अपने गुरुओं से शिक्षाएं प्राप्त कर एक आदर्श स्थापित किया।  गुरु का आदर्श ही संसार में कुछ करने की प्रेरणा देता है और इतिहास गवाह है कि इसी प्रेरणा से कई शिष्य गुरु से आगे निकल गए। गुरु चाणक्य ने जब अपने शिष्य चन्द्रगुप्त को शिक्षित किया तो उसने देश का इतिहास बदल दिया और जब सिकन्दर ने अपने गुरु अरस्तु से शिक्षा प्राप्त की तो वे विश्व जीतने की राह पर चल पड़े।
कभी बचपन में टाट-पट्टी पर बैठकर हम छोटे बच्चे भी स्कूल में खूब जोर लगाकर ‘गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविन्द दिओ मिलाय।' की रट से गुरु महिमा का बखान कर मन ही मन खुश हो लेते थे कि हमने कबीर के इस दोहे को याद कर गुरु जी को प्रसन्न कर लिया है।  

KAVITA RAWAT 

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एक सेक्स वर्कर की आत्मकथा (पुस्तक समीक्षा) 

अजब अंदाज़ से हिलते हाथ पांव 

और उसके खड़े होने का अंदाज़

जैसे किसी कला की नुमाइश करता लग रहा था 

(पर मज़बूरी से भरा था )

खिलखिला के हँसना बेमतलब था 

( पर लग नहीं रहा था )

कोने के दबा कर कभी होंठ कभी नखरा दिखा कर 

(किसी रंगमंच सी कठपुतली सा था )

बहुत कोशिश थी उन उदासी . 

उन चिंताओं को भुलाने की

जो घर से चलते  वक़्त 

बीमार बच्चे के पीलेपन में दबा आई थी

सिमटे हुए बालों में गजरा लगा कर 

कुछ मेरी कलम से  kuch meri kalam se ** रंजू भाटिया

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भारतीय नौजवानों ने देश कमजोर करने की कोशिश असफल कर दी 

बतंगड़ BATANGAD 

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आहटें स्वयं की 

Pitter-patter and tip-toe – will you do a footstep listening test? |  Intelligent sound engineering 

हवा भी

वहां की महकती थी
पानी था उजला
कलकता  बहुत
मगर
बात मिट्टी की मेरी
अलग थी ,
अलग है बहुत। 

Tarun's Diary- "तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.." 

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वजूद 

तुम से बेहतर तुम्हें कौन जानता है भला 
अपने वजूद पर भरोसा कर लो  
तुम सब से मुख़्तलिफ़ हो न एतबार हो तो 
अपने आईना से जाकर पूछ लो 
©अनामिका

कविता 

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आमरस में दूध डालना चाहिए या नहीं? 

आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल 

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सावन की बदरी

सावन की बदरी ने भी
शुरू कर दिया है पक्षपात
जिधर नहीं है जरूरत बरस रही बेलगाम ,
कर रही बेहाल
घनघोर गर्जन ,
तड़कती बिजली
कर रही अद्भुत प्रहार

Roshi 

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आज के लिए बस इतना ही...!

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13 comments:

  1. बहुत सुंदर संकलन।
    सादर

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  2. सुप्रभात !
    हर विधा की सुंदर रचनाओं का पठनीय संकलन ।
    रचनाओं का परिचय ही सूत्रो पर जाने को प्रेरित कर रहा । रोचकता से भरे इस अंक में मेरी रचना शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय शास्त्री जी। सभी रचनाकारों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  3. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी ब्लॉगपोस्ट सम्मिलित करने हेतु बहुत-बहुत आभार!

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  5. साहित्य की उन्नति का शानदार प्रयास है आपका |

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  6. वृहद लिंक समेटे बहुत सुंदर चर्चा।
    सभी सामग्री उपयोगी, आकर्षक और पठनीय।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    मेरी रचना को चर्चा में स्थान देने के लिए हृदय से आभार।
    सादर।

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  8. बहुत ही सुंदर और उपयोगी लिंक धन्यवाद आपका मेरे लिखे को शामिल करने के लिए ।

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  9. विविध विषयों पर इतने सारी रचनाओं के सूत्रों से सजा सुंदर चर्चा मंच, आभार मुझे भी शामिल करने हेतु शास्त्री जी !

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  10. उम्दा एवं पठनीय लिंक्स से सजी बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति ।मेरी रचना को भी चर्चा में सम्मिलित करने हेतु तहेदिल से धन्यवाद आपका ।
    सादर आभार।

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  11. बहुत सुंदर प्रस्तुति सभी लिंक उम्दा

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  12. बहुत खूबसूरत चर्चा संकलन

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  13. चर्चा मंच में 'दिल बहकने लगा आज ज़ज्बात में' प्रस्तुत मेरी लघुकथाओं पर बनी लघु फ़िल्मों की चर्चा करने पर आपका हृदय से आभार और धन्यवाद 🙏

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