Followers

Search This Blog

Tuesday, July 26, 2022

गीत "वीरों की गाथाओं से" (चर्चा अंक 4502)

 सादर अभिवादन

मंगलवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक और भुमिका आदरणीय शास्त्री सर जी की रचना से)

गाथाओं से भुजबल फड़कें, जिनकी शौर्य कथाओं से।

गूँज रहा है चमन देश का, वीरों की गाथाओं से।।

कल "कारगिल दिवस" था

तमाम कठिनाईयों  के वावजूद देश की सीमा सुरक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों को मेरा सत-सत नमन

********

गीत "वीरों की गाथाओं से" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 


जाँबाजी से जो उत्तर देते हैं, शातिर तोपों का,

डट कर करते रोज सामना, आतंकी दुर्योगों का,

कभी न हार मानते सैनिक, सीमा पर बधाओं से।

गूँज रहा है चमन देश का, वीरों की गाथाओं से।।

******

होमियोपैथी के प्रति जागरूक करता एक बेहतरीन लेख, एक बार पढ़िएगा अवश्य

अंग्रेजी दवाइयों का अत्यधिक प्रयोग करते करते क्षत विक्षत हो चुके मानव शरीर के लिए अब तो 

होमियोपैथिक चिकित्सा वरदान है।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि हर घर में इसकी थोड़ी बहुत जानकारी होनी ही चाहिए।

होमियोपैथी औषधि और मानवीय व्यवहार 

-सतीश सक्सेना 

होमियोपैथी में दवा निर्माण करने से पहले उसका मानवों पर प्रयोग किया जाता है , उसकी बेहद कम मात्रा की एक खुराक रोज कुछ दिन तक देने के पश्चात उसकी मात्रा को धीरे धीरे बढ़ाया जाता है और उसके परिणाम को मानवों के ऊपर सावधानी से नोट किया जाता है , जहरीली दवा की मात्रा बढ़ाने से जो बीमारियां उस इंसान में उत्पन्न हुईं और उसकी मानसिक दशा में जो बदलाव आये उनका सावधानी पूर्वक लिखा गया विवरण ही दवा बनाने का सिद्धांत है ।

******

सच, साहित्य सृजन भी तो एक नशा ही है

और ये नशा होना भी चाहिए 

एक नशा ऐसा भीयों तो नशा शब्द एक नकारात्मक भाव दर्शाता है।नशे का ज़िक्र आते ही मादक पदार्थों के सेवन आदि से संबंधित बातें सबके मस्तिष्क में आने लगती है और एक स्वत:स्फूर्त भाव या विचार मन में आता है कि हमें नशे से दूर रहना चाहिए। परंतु एक नशा ऐसा भी है जिसकी धुन/लत उस ख़ास नशे को करने वाले और समाज दोनों के लिए लाभकारी साबित होती है।जी हां, ठीक समझा आपने मैं साहित्य सृजन के नशे की बात कर रहा हूं ।******बाढ़

यहाँ कम से कम तीन हाथी की गहरायी होगी. बच्चों की भीड़ में से कोई चिल्लाया. हर साल बाढ़ के आने का उसी बेसब्री से इंतज़ार होता था जैसे होली और दिवाली का. उम्र के उस पड़ाव पर बाढ़ की त्रासदी से सब बच्चे अनजान थे. दूसरी क्लास के बच्चे से उम्मीद भी क्या की जा सकती है. स्कूल काफी ऊँचाई पर था. वहाँ तक बाढ़ का पानी नहीं पहुँचता था. स्कूल के पूरब की ओर गंगा जी के कछार का विस्तार इतना फैला हुआ था कि बाढ़ आने पर समुन्दर का एहसास होता था. तब समुन्द्र देखा भी नहीं था लेकिन बाद में जब सुअवसर मिला भी तो नज़ारा कुछ अलग सा नहीं लगा. 


********सांझ होने पर

नारंगी जिद लिए 

सूरज आया 

अबकी मेरे देस...। 

अबकी 

महुआ तुम्हारे बदन से महकेगा, 

सुनहरी चादर 

सांझ होने पर 

******

ख़्वाब बिल्लौरी - -


तुम्हें
बेख़ुदी में सुबह से
पहले, कोई
पहेली !
रेशमी धागों में गुथी, वो अक्स लाजवाब
हो तुम, इक ठहरा हुआ सा बिल्लौरी
ख़्वाब हो तुम। अनगिनत हैं
तुम्हारी बज़्म में सितारों
की चहल क़दमी,
कुछ बुझते
चिराग़
******'वह यादगार सफ़र' (लघुकथा)

मैं तब स.वा.क. अधिकारी के पद पर कार्यरत था। एक बार मैं अपने वॉर्ड के एक विभागीय केस, जिसमें एक व्यापारी ने उस पर लगाई गई पेनल्टी के सम्बन्ध में रेवेन्यू बोर्ड में अपील की थी, के मामले में अपने विभाग का पक्ष प्रस्तुत करने हेतु अजमेर गया था। मैं अपने साथ एक ब्रीफ़केस ले गया था, जिसमें विभाग की केस-पत्रावली तथा मेरे दो जोड़ी कपड़े रखे थे। रेवेन्यू बोर्ड में काम हो जाने के बाद घर******चलते-चलते एक बहुत ही सुन्दर हृदय स्पर्शी देश गान

11 comments:

  1. सभी पोस्ट और लिंक्स अच्छे और पाठनीय . आपका हृदय से आभार. आप सभी का दिन शुभ हो. सादर

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुतिष
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

    ReplyDelete
  3. सभी रचनाएं अच्छी हैं...। खूब बधाई। मेरी रचना का स्थान देने के लिए साधुवाद।

    ReplyDelete
  4. रोचक लिंक्स से सुसज्जित चर्चा।

    ReplyDelete
  5. बाढ़ को स्थान देने के लिये... हृदय से धन्यवाद...🙏🙏🙏

    ReplyDelete
  6. कुछ तारीखे व्यक्ति भूलना चाहता है परंतु भूला नहीं पाता। कारगिल दिवस आज है कल नहीं था आपकी जानकारी हेतु 🙏
    सुंदर संकलन हेतु बधाई।
    सादर

    ReplyDelete
  7. उम्दा और सुंदर चर्चा।

    ReplyDelete
  8. बेहद सुंदर चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  9. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  10. मेरी रचना को इस सुन्दर अंक में स्थान दे कर सम्मानित करने के लिए हार्दिक धन्यवाद आ. कामिनी जी! अभी विदेश (अमेरिका) में हूँ अतः समयान्तर होने से मंच पर समय पर उपस्थित नहीं हो पाया हूँ, तदर्थ खेद है। अन्य साथी रचनाकारों को भी अब पढ़ सकूँगा।

    ReplyDelete
  11. सुंदर संकलन।
    विभिन्न विषयों पर सुंदर चर्चा।
    सभी रचनाकारों को बधाई।
    सादर सस्नेह।

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।