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Saturday, September 24, 2022

"सूखी मंजुल माला क्यों?" (चर्चा-अंक 4562)

 मित्रों!

शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है!

देखिए कुछ अद्यतन लिंक!

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गीत "गुम हो गया उजाला क्यों" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

गुम हो गया उजाला क्यों?
दर्पण काला-काला क्यों?
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चन्दा गुम है, सूरज सोया
काट रहे, जो हमने बोया
तेल कान में डाला क्यों? 

उच्चारण 

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जीवन इक उपहार अनोखा सेवा के रूप में किए गए कृत्य हमें वर्तमान में बनाए रखते हैं क्योंकि हमें उनसे भविष्य में कुछ भी पाने की चाह नहीं होती। जब हम जीवन को साक्षी भाव से देखते हैं तो चीजें स्पष्ट दिखायी देती हैं। जितना हम सामान्य बातों से ऊपर उठ जाते हैं तो वे बातें जो पहले बड़ी लगती थीं, अपना महत्व खो देती हैं। हमें यह जीवन उपहार स्वरूप दिया गया है, मन में इसके लिए अस्तित्त्व के प्रति कृतज्ञता जगे तो कभी किसी अभाव का अनुभव नहीं होता। नियमित साधना, सेवा तथा जाप करने से मन तृप्त रहता है।

डायरी के पन्नों से अनीता

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सोहर गीत..(हास्य व्यंग) 


(१) जच्चा हमारी कमाल.. लगें फुलगेंदवा।

खाय मोटानी हैं चलि नहिं पावहि
फूला है दूनो गाल.. लगें फुलगेंदवा।

पांव है सिरकी पेट है गठरी
लुढ़कें जैस फुटबाल.. लगें फुलगेंदवा।

जिज्ञासा के गीत 

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जब चलेंगे वक्त की रफ़्तार से 

मेरा सृजन 

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हैप्पी हिंदी डे 

हैप्पी हिंदी डे' संदेशे
दिवस विचार जिया।
सेज सौत ने साझा कर ली
नित्य शिकार हिया।। 

काव्य कूची अनीता सुधीर आख्या

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ना हो अधीर इतना 

रख धीरज ना हो अधीर इतना

 इतनी भी जल्दी क्या है

अंत समय आते ही यह नश्वर शरीर

 पञ्च तत्व में मिल जाने के लिए 

धरा पर धरा ही रह जाएगा | 

Akanksha -asha.blog spot.com 

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मिसिंग टाइल सिंड्रोम, जो पास नहीं है उसका दुःख एक बार एक शहर में एक व्यवसाई ने अपने होटल के नवीकरण के दौरान उसमें एक विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल बनवाया। साफ-स्वच्छ पानी के इंतजाम के साथ-साथ उसमें चारों ओर बेहतरीन इटैलियन टाइल्स लगवाए ! परन्तु संयोगवश एक स्थान पर एक टाइल नहीं लग पाया ! होटल के खुलने पर वहाँ पर्यटकों की लाइन लग गई ! जो भी आता वह स्विमिंग पूल की सुंदरता का कायल हुए बिना नहीं रहता ! हरेक का ध्यान बेहतरीन टाइल्स की खूबसूरती पर मुग्ध हो रह जाता ! हर कोई बड़े ध्यान से इस कलाकारी को देखता और प्रशंसा करते नहीं थकता ! पर जैसे ही उसकी नजर उस मिसिंग टाइल पर पड़ती, वहीं अटक कर रह जाती ! उसके सारे हाव-भाव बदल जाते ! वह दुखी व खिन्न हो जाता ! वहाँ से लौटने वाले हर व्यक्ति की एक ही शिकायत होती कि पूल में एक टाइल मिसिंग है। हजारों टाइल्स की सुंदरता के बावजूद वह एक टाइल उसके दिमाग में पैबस्त हो रह जाती ! हरेक को उस टाइल की जगह को देख कर बहुत दुःख होता कि इतना परफेक्ट बनाने के बावजूद एक टाइल रह ही गई। तो कई लोग प्रबंधन को सलाह भी देते कि जैसे भी हो उस जगह को ठीक करवा दिया जाए। बहरहाल वहां से कोई भी खुश नहीं निकलता ! इतना सुन्दर निर्माण भी लोगों को खुशी नहीं दे पाया !

 

कुछ अलग सा 

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अनुभूतियाँ : किस्त 25 

दो दिन की उस मुलाकात में

जीवन भर के सपने देखे,

पागल था दिल दीवाना था

औक़ात नहीं अपने देखे । 

गीत ग़ज़ल और माहिया ---  

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रोशी कुछ वर्षों में हम कहाँ आ पहुँचे? , आगे क्या होगी मंज़िल ? हम सब हैं इससे अंजान बर्बादी की ओर बढ़ती हमारी नस्लों पर भी लगाना होगा हम सबको पूरा ध्यान शिक्षा ,मेहनत ,परिवार ,समाज कुछ बातों का देना होगा नित ज्ञान  

Roshi's Poetry 

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शिकायतें मगरूर है मगर ... 

Pahimakas - Being a giver taught me that it's okay to feel bad for others  and not help them in a way they needed. It's okay to look stern, arrogant,  and ungrateful
पूछो ना क्या याद रहा , क्या मैंने भुला दिया |
उसका फिर याद आना , फिर मैंने भुला दिया ||
पलट पलट के किताबे-अतीत थक गया था मै |
जागता रहा रात भर मगर तुझको सुला दिया || 

Tarun's Diary- "तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.." 

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दिलचस्प 

दर्द कुछ सहमी फ़िज़ाओं की आगोश में था l

कुछ कुछ तेरी पनाहों की सरगोशियों में था ll

आफताब उस सहर का भी खोया खोया था l

निगाहों में तेरी जिस तस्वीर का घर टूटा था ll 

RAAGDEVRAN मनोज कयाल

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मैनड्रेक | शक्ति कॉमिक्स | ली फाक 

शक्ति कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित मैनड्रेक #1 में दो कॉमिक बुक्स को प्रकाशित किया गया है। जहाँ संकलन की पहली कहानी बदमाशों का गिरोह 17 पृष्ठ की है वहीं इसकी दूसरी कहानी अदृश्य मानव केवल 9 पृष्ठों की है। इससे पहले मैंने मैनड्रेक की कहानियाँ नहीं पढ़ी थी तो उन्हें पढ़ने का मेरा यह पहला अनुभव था। कहानी सीधी सरल हैं पर चूँकि काफी वर्षों पहले लिखी गई थी तो जटिल प्लॉटलाइन की अपेक्षा मैं कर भी नहीं रहा था।

कॉमिक बुक की आर्ट वर्क चूँकि न्यूजप्रिन्ट का था तो यहाँ  

एक बुक जर्नल 

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(आलेख) आख़िर क्या हो सामान्य ज्ञान की कसौटी ? सामान्य ज्ञान के मूल्यांकन का मापदंड आख़िर क्या होना चाहिए ? क्या कुछ देशों और राज्यों की राजधानियों के बारे में , कुछ तत्कालीन और कुछ वर्तमान  राजनेताओं , कुछ विशेष प्रकार के खेलों और  खिलाड़ियों , कुछ लेखकों ,कुछ कवियों  और कुछ विशेष किताबों के बारे में और खेती -किसानी के बारे में  जानकारी रखना और उनके बारे में पूछे गए सवालों के सटीक जवाब देना सामान्य ज्ञान है ? क्या  महंगाई और बेरोज़गारी के ताजातरीन  आंकड़ों के बारे में , अंतरिक्ष यात्राओं के बारे में ,  नदियों ,पहाड़ों , धर्मों , सम्प्रदायों और समुदायों की विशेषताओं के बारे में प्रश्नों के सही उत्तर देना सामान्य ज्ञान है ? 

मेरे दिल की बात स्वराज करुण

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आज के लिए बस इतना ही...!

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4 comments:

  1. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  2. सदा की तरह ही , अनुपम लिंक और बेजोड़ पठनीय सामग्री के संकलन के लिए सम्पूर्ण चर्चामंच को बहुत बहुत अभिनन्दन !
    आदरणीय डॉ. साहब इस नाचीज को आपका आशीर्वाद बहुत मिला , मगर मई समय देकर किसी जगह उपस्थिति न दर्ज करवा पाने की बहुत क्षमा चाहता हु |
    और तहे दिल से आपको आश्वस्त करता हु कि आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा !
    आपके व सम्पूर्ण चर्चामंच के स्नेह एवं प्रोत्साहन के लिए दिल से धन्यवाद् !
    सादर वन्दे !
    whoistarun.blogspot.com

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  3. बहुत सुंदर चर्चा।

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  4. हमेशा की तरह चर्चामंच का यह अंक भी ब्लॉग पोस्ट्स के सार-संकलन के साथ बहुत बेहतर बन पड़ा है। मुझे भी स्थान मिला ,इसके लिए आभारी हूँ। ब्लॉगर मित्रों से अनुरोध है कि मेरे ब्लॉग पर भी पधारने की कृपा करें। आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।

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