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Sunday, September 25, 2022

"श्राद्ध कर्म"(चर्चा-अंक 4562)

 सादर अभिवादन 

आज रविवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक और भूमिका आदरणीया साधना वैद दी की रचना से)

कर लो सेवा

जीते जी बुजुर्गों की

मिलेगा पुण्य

 

होंगे संतुष्ट

देंगे तुम्हें आशीष

सच्चे मन से

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आज पितृपक्ष का समापन है

अपने अपने रीति से सबने दान पुण्य कर श्राद्ध कर्म निभाया है

अब इसमें सच्ची श्रद्धा कितनी थी

वो तो परमात्मा जाने

***

कल से मातारानी का आगमन हो रहा है

आप सभी को नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

मातारानी हम सभी पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें, इसी कामना के साथ चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर...

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बालकविता "बकरे-बकरीआये भागे-भागे"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')



दुनिया के जीवों का,
यदि तुम प्यार चाहते पाना!
भूखों को सच्चे मन से
तुम भोजन सदा खिलाना!

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शेष जीवन

पंचतत्व विलीन

हो चुकी काया

 

श्राद्ध तर्पण

खिलाना ब्रह्मभोज

सब बेमानी

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दायित्व


मुझे सुखाया जा रहा है

सड़क के उस पार खड़े वृक्ष की  तरह

ठूँठ पसंद हैं इन्हें

वृक्ष नहीं!

वृक्ष विद्रोह करते हैं!

जो इन्हें बिल्कुल पसंद नहीं

समय शांत दिखता है

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चेहरों के आईने में


वक्त 
हमारे
चेहरे बदलता है
वक्त
पढ़ा जा सकता है
हमारे चेहरे पर।
वक्त देखा जा सकता है
शब्दों में
उनके अर्थ और भाव में।
वक्त 
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लहर उठी सागर से कोई


तू मुझमें ही वास कर रहा

या मैं तेरे घर हूँ आया ?

रहना-आना दोनों मिथ्या  

एक तत्व है कौन पराया !


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विडम्बना...



कुछ प्यार के इजहार मे हैं

और कुछ खोए हुए प्यार मे हैं,

बस, फर्क इतना है, ऐ दोस्त!

कि तुम इस दयार मे हो, 

और हम उस दयार मे हैं।

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प्रेम पत्र


मुझे एक प्रेम पत्र लिखना है
इन पड़े-पौधों के लिए
लहराती सी इस घास के लिए 
इठलाते से इस झरने के लिए 
ठंडी सी इस पुरवाई के लिए 
इन मुस्कराते फूलों के लिए 
सावन में पड़े झूलों के लिए 

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मृत्यु सत्य है   
बेख़बर नहीं हैं   

दिल रोता है।   

2. 
शाश्वत आत्मा   
अपनों का बिछोह   
रोती है आत्मा।  

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व्रत वाले आलू के फिंगर्स और बॉल्स 


----------------------आज का सफर यही तक,अब दे आपका दिन मंगलमय हो कामिनी सिन्हा 

12 comments:

  1. सुप्रभात साथियों ! आज की चर्चा के शीर्षक एवं भूमिका के लिए मेरी रचना का चयन करने के लिए आपका हृदय से आभार कामिनी जी ! बहुत ही खूबसूरत सूत्रों से सुसज्जित आज की चर्चा ! मुझे भी सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद और आभार ! सप्रेम वन्दे !




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  2. बहुत सुन्दर सराहनीय अंक ।
    मेरी रचना के लिंक को शामिल करने के लिए आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

    ReplyDelete
  3. शानदार चर्चा लिंक। आभार आपका कामिनी जी🙏

    ReplyDelete
  4. सराहनीय अंक...। बहुत ही उम्दा चयन। आभार आपका।

    ReplyDelete
  5. सुप्रभात!! आप सभी को महालया की शुभकामनायें! सुंदर प्रस्तुति, बहुत बहुत आभार मेरी रचना को स्थान देने के लिए !

    ReplyDelete
  6. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर अंक

    ReplyDelete
  8. बहुत ही सुंदर सराहनीय संकलन।
    मुझे स्थान देने हेतु हृदय से आभार।
    सादर

    ReplyDelete
  9. बहुत सुंदर अंक सुजाता

    ReplyDelete
  10. बहुत सराहनीय प्रस्तुति। हिन्दी ब्लॉग जगत के रचनाकारों की रचनाओं को पढ़कर और चर्चा मंच पर उनके लिंक्स देकर उन्हें चर्चित और प्रोत्साहित करने की दिशा में आप और आपके सहयोगी चर्चाकार वाकई बहुत समर्पित भाव से लगे हुए हैं। आदरणीय शास्त्री जी को इस मंच का संचालन करते हुए एक दशक से भी ज्यादा अरसा हो चुका है ,लेकिन उनकी मेहनत में कोई कमी अब तक नहीं आयी है। उन्हें साधुवाद और हार्दिक शुभकामनाएं। चर्चा मंच केवल ब्लॉगों में प्रकाशित रचनाओं का सार संकलन नहीं ,बल्कि इसके माध्यम से हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी की भी बहुत बड़ी सेवा है। मंच के सभी चर्चाकारों को भी हार्दिक बधाई। आप सबको और मंच से जुड़े समस्त ब्लॉगर मित्रों को शारदीय नवरात्रि की भी हार्दिक शुभेच्छाएँ ।

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  11. आप सभी स्नेहीजनों को हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार 🙏

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  12. बहुत बहुत आभार मैम मेरी रचना को यहाँ शामिल करने के लिए

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