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Sunday, November 27, 2022

"हीरा मन-चिड़िया रोई भर आकाश" (चर्चा अंक 4621)

मित्रों!

आज से चर्चा मंच का नया अध्याय

प्रारम्भ हो रहा है।

देखिए मास के अन्तिम रविवार में

 कुछ ब्लॉग लिंकों की चर्चा।

-१-

सबसे पहले लखनऊ का सिद्धहस्त ब्लॉग लेखिका

जिज्ञासा सिंह के ब्लॉग जिज्ञासा की जिज्ञासा से

चिड़िया रोई भर आकाश 

की यह रचना
चिड़िया रोई भर आकाश ।
धुआँ उड़ाता चला समीरण,
अश्रु बहा, भीगा है रज कण,
बिखरा उजड़ा चमन कह रहा 
मरा हुआ इतिहास....
इस रचना में विदूषी कवयित्री ने वर्तमान परिपेक्ष्य को 
अपनी रचना में कहा है-
सूत-सूत पंखों में लपटें
ज्वाला मध्य घिरा है नीड़ ।
ध्वंस विध्वंस धरातल जंगल
मूक बधिर अतिरंजित भीड़ ॥
धनुष चढ़ाए बाण शिकारी
ढूँढ रहे अब लाश ।
चिड़िया रोई भर आकाश ॥
बिल्कुल आज का वातावरण इसी तरह का है। 
जिसमें-
बड़े-बड़े गिद्धों ने बोला
घबराने की बात नहीं ।
पात-पात हम देख रहे हैं
दिन है, कोई रात नहीं ॥
आस और विश्वास कर गया,
सब-कुछ सत्यानाश ।
चिड़िया रोई भर आकाश ॥
आशा और विश्वास दम तोड़ते हुए दृष्टिगोचर होते है-
करुण-रुदन-क्रंदन चिड़ियों का
मुस्काते चीते ।
बिलख चिरौटे गिरें धरनि पर
ध्वजवाहक जीते ॥
हुआ अमंगल, तृण-तृण जलता
चारों ओर विनाश ।
चिड़िया रोई भर आकाश 
जहाँ देश की बेटियों को 
झूठे प्यार का दिलासा देकर 
उनकी जघन्य हत्या कर दी जाती है।
-२-

अनीता जी एक ऐसी ब्लॉग लेखिका हैं 

जो प्रतिदिन अपने उद्गार अंकित करती हैं।

अब बात करते हैं इनके ब्ल़ॉग
यह रचना गहन विचारों की अभिव्यक्ति है

अँधेरे में टटोले कोई 

और हीरा हाथ लगे 

जो अभी तराशा नहीं  गया है 

पत्थर और उसमें  नहीं है कोई भेद

ऐसा ही है मानव का मन 

वही अनगढ़ हीरा लिए फिरता है आदमी

...

हिंसा को जन्माती 

परिस्थितयां घिसेंगी पत्थर  को 

तो चमक उठेगा किसी  दिन  

पर अभी बहुत दूर जाना है ...

--

आज की चर्चा में बस इतना ही...!

अब मिलेगे दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह में

रविवार और गुरुवार की चर्चा में,

कुछ और ब्लॉगरों की पोस्ट के साथ।


7 comments:

  1. सुप्रभात! चर्चा मंच के बदले हुए स्वरूप के पहले अंक में 'मन पाए विश्राम जहाँ' को स्थान देने हेतु हृदय से आभार शास्त्री जी, जिज्ञासा जी की रचनाएँ दिल की गहराई से निकलती हैं और सामाजिक सरोकार से प्रेरित होती हैं।

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  2. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. अहा!
    इतनी सुंदर चर्चा प्रस्तुति में मेरी रचना को मान देने के लिए आदरणीय शास्त्री जी को हृदय से नमन करती हूं, कुछ पंक्तियों में ही रचना की इतनी सार्थक और सारगर्भित समीक्षा शास्त्री जी जैसे विद्वतजन ही कर सकते है, उन्हें मेरा नमन और वंदन, मनोबल बढ़ाते उनके शब्द हमेशा प्रेरणा देते हैं, सादर आभार सहित अभिवादन और शुभकामनाएं ।

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  4. नए प्रयोग के लिए हृदय से शुभकामनाएं 🌷
    दोनों ब्लॉग समृद्ध कवियित्रियों के सशक्त लेखनी, भावार्थ पर प्रकाश डालती सुंदर प्रस्तुति।
    सादर।

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    Replies
    1. जिज्ञासा सिंहNovember 28, 2022 at 6:40 PM

      बहुत आभार कुसुम जी🌺👏🏻

      Delete
  5. आदरणीय अनीता दीदी की रचनाएँ मानवीय संवेदना और जीवन दर्शन से युक्त होती हैं जो मानव मन को नई ऊर्जा से ओतप्रोत का जाती हैं आपका विनम्र प्रोत्साहन हमारे लिए प्रेरणा है आपको सादर नमन ।

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  6. सुंदर प्रस्‍तुति. बधाई.

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