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Tuesday, November 29, 2022

"उम्र को जाना है"(चर्चा अंक 4622)

सादर अभिवादन 

मंगलवार की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है

शीर्षक और भुमिका आदरणीया जिज्ञासा जी की रचना से


उम्र को जाना है

वो तो जा रही है,

याद का मधुरिम

तराना गा रहे हम 


वक्त गुजर रहा है और उम्र भी


खैर, चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर....


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दोहे "एक पाँच दो का टका, है कितना मजबूर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


दस्सी-पंजी-चवन्नीहुई चलन से दूर।

एक पाँच दो का टकाहै कितना मजबूर।।

--

जब से आया चलन मेंदो हजार का नोट।

बढ़ती महँगाई रहीतब से हृदय कचोट।।

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उम्र को जाना है


खट्टी-मीठी-शर्बती

नमकीन जो थी,

उसके अफ़साने में 

डूबे जा रहे हम 


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 सदा पुकारे जाता था वह


बढ़े हाथ को थामा जिसने 

पग-पग  में जो सम्बल  भरता,  

वही परम हो लक्ष्य हमारा 

अर्थवान जीवन को करता !


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पर्वत दरके सहमे झरने


धीर धरे धरणी अब हारी,लावा उफने सीने में।

अंबर आहत आए आफत, मुश्किल होती जीने में।

मूढ़ मति मानव करे शोषण,घोल रहा विष जीवन में।

दूषित होता ये जग सारा,रोग लगे बस तन-मन में।

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अपने हिस्से की धूप - -


एक सितारे के टूटने से फ़लक वीरां नहीं होता,
अमावस हो, या चाँद रात वो परेशां नहीं होता,

चाहतों की भीड़ में है इक मुश्त सुकूं की खोज,
हर एक घर अंदर से, राहते आशियां नहीं होता,-----------------------

सालगिरह - 29वां


उनको छू कर,

किनारों से, गुजर रही है ये उमर!

बहाव सारे, बन गए किनारे,
ठहराव में हमारे,
रुक गया, ये कहकशां,
बनकर रह-गुजर!
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नींबू को साल भर के लिए कैसे स्टोर करें?


दोस्तों, इन दिनों नींबू थोड़े से सस्ते मिलते है लेकिन गर्मियों में नींबू के दाम आसमान छुने लगते है। तो ऐसे में क्यों न हम अभी ज्यादा नींबू खरीद कर गर्मियों के लिए उन्हें स्टोर कर ले? शायद आप सोच रहे होंगे कि इतने दिनों तक हम नींबुओं को कैसे स्टोर करेंगे? वे ख़राब हो जाते है। यदि रस निकालकर फ्रीज में रखा तो रस भी ख़राब हो जाता है। तो इस समस्या का समाधान लेकर आई है आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल...मेरे बताए तरीके से आप नींबू को स्टोर करें और गर्मियों में नींबू पानी का मजा लीजिए!! 
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मिलावटी संसार और हम लोग -सतीश सक्सेना


रत सस्ता चाहने वालों का मार्किट है यहाँ कोई अखबार उठाकर देखें तो दस पर्सेंट से लेकर 50 पर्सेंट तक घटे हुए रेट के विज्ञापनों की भरमार है , शायद ही कोई दुकान ऐसी मिलेगी जो यह कहती हो कि रेट में कोई रिबेट नहीं मिलेगी अगर कोई यह लिखे भी तो शायद ही उसकी कोई बिक्री होगी ,हम मजबूर करते हैं हम व्यापारी को चोरी करने को , हमें सस्ता चाहिए सो हर व्यापारी भी चालाकी सीख गया तीन गुना कीमत लिखकर 50 प्रतिशत घटे रेट पर सेल , और ग्राहकों की भीड़ आएगी दूकान पर इस तरह से एक चालाक पर दूसरा चालाक हावी होता है ! हमारे यहाँ हर व्यक्ति अपनी अपनी औकात में भरपूर चालाक है !
----------------------------आज का सफर यहीं तकआपका दिन मंगलमय होकामिनी सिन्हा 

13 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार कामिनी सिन्हा जी।

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  2. अति सुन्दर प्रस्तुति...
    खट्टी-मीठी-शर्बती
    नमकीन जो थी,
    उसके अफ़साने में,
    डूबे जा रहे हम ॥
    अनन्त शुभकामनाएं ......

    ReplyDelete
    Replies
    1. सालगिरह की आकाश भर शुभकामनाएं आपको ।

      Delete
  3. बहुत सुंदर सराहनीय और पठनीय सूत्रों से सजी प्रस्तुति ।
    मेरी रचना को भूमिका में सजाने के लिए हार्दिक आभार और अभिनंदन प्रिय कामिनी जी।सभी रचनाकारों को बधाई ।

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  4. मंत्रमुग्ध करता हुआ अंक, सभी रचनाएँ अपने आप में असाधारण हैं, मुझे स्थान देने हेतु असंख्य आभार ।

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  5. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, कामिनी दी।

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  6. सुप्रभात ! चर्चा मंच को पुराने कलेवर में देखकर आनंद हो रहा है, इस सुंदर अंक के लिए बधाई कामिनी जी व बहुत बहुत आभार!

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  7. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति


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  8. बेहतरीन रचना संकलन एवं प्रस्तुति सभी रचनाएं उत्तम रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं मेरी रचना को चयनित करने के लिए सहृदय आभार सखी सादर

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  9. सुन्दर संकलन व समालोचना की सार्थक पहल पर बहुत बहुत शुभकामनाऐ !

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  10. बहुत सुंदर चर्चा संकलन

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  11. बहुत सुंदर चर्चा. आभार.

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