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Tuesday, January 05, 2010

“कपड़े तो उतर गए ,अब मैडल भी छिनेगा!!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-20
चर्चाकारः
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए कार्टून के साथ आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-

IRFAN KHAN

IRFAN KHAN

कपडे तो उतर गए ,अब मैडल भी छिनेगा!!


मेरा फोटो

RAJESH KUMAR DUBEY
editorial cartoonist nai dunia daily news paper jabalpur mobile 9993599783
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DOOBEYJI

एक कार्टून .............


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Arvind Mishra

कौन बताएगा पहली लाईन का अर्थ .......समर शेष है!

कौन बताएगा पहली लाईन का अर्थ .......

समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध
जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध

कितनी अच्छी बात है दिनकर समग्र की चर्चा हो रही है दिनकर विशेषज्ञों द्वारा ब्लागजगत में ...मैंने तो कहीं दिनकर की उक्त बहुउद्धृत पंक्ति ही फिर से उद्धृत कर दी थी -कई बार कह चुका हूँ ,फिर दुहराता हूँ कि साहित्य की मेरी समझ अधकचरी है और ज्ञान पल्लवग्राही -मैं साहित्य के अलिफ़ बे का भी विद्यार्थी नहीं हो पाया और यह दुःख मुझे जीवन भर सालता रहेगा.बस विद्वानों की सोहबत का दुर्व्यसन न जाने से कहाँ से छूत सा लग गया मुझे ...बहरहाल ....

ताऊजी डॉट कॉम

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (161) : आयोजक उडनतश्तरी - बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं. जैसा कि आप जानते हैं कि आज मैं ये 30 वां अंक आयोजक के बतौर पेश कर ...

ताऊ पहेली - 55 : विजेता सुश्री सीमा गुप्ता

ताऊ रामपुरिया

प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली 55 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है मुगल गार्डन, राष्ट्रपति भवन, दिल्ली…..

seema-gupta-2

नए ब्लोग्वानी के दर्शन कर लीजिये

जी हा विवादों की भेट चढ़ी ब्लॉग वाणी टीम ने जब ब्लोग्वानी को दुबारा सुरु करने के फैसला लिया था तो उन्होंने कहा था की हम इक नयी ब्लॉग वाणी बना रहे है जो इक दो माह पूरा हो जायेगा, aur blogvani ne ब्लॉगजगत को इक नया तोहफा नए साल में नए ब्लोग्वानी के रूप में दिया है ब्लॉग वाणी के इस पेज पर आप जाकर खुद देख सकते है जिसमे नए आप्शन जोड़े गए है

लेकिन इक चीज जो हमारे हिंदी एग्रिनेत्रो में खलती है वो है सर्च विकल्प के न होना, इसमें इक कैलेंडर भी है जिसमे आप देत सेलेक्ट कर के उस दिन की पोस्ट देख सकते है ,जो इतना आशन है की इसका उपयोग हर कोई ब्लॉगर आसानी सेकर सकता है

इसमें कुछ नए आप्शन भी जोड़े गए है जो काफी मजेदार है blogvani ki sadsyata grahan karna bhi bahut hi aasan hai yaha klik karen aur form bharne ke baad bhejen पर क्लिक करें

दोस्तों ब्लोग्वानी ने नया कुछ कर के हमें नए साल के तोहफा दिया है इस पोस्ट के माध्यम पर हम उनका आभार ब्यक्त करते है ब्लोग्वानी अपने डोमेन पर @ब्लोग्वानी डोट कॉम पर हमें इ-मेल सुविधा भी उपलब्ध कराये तो हम हिंदी ब्लॉगर को ख़ुशी होगी ,उम्मीद है ब्लोग्वानी और भी अछ्छा करगी, बदले हुवे कलेवर में ब्लोग्वानी चिठ्ठाजगत पर भी अछ्छा लग रहा है।

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गत हिंदी-दिवस पर "सरस पायस" के माध्यम से दी गई विशेष जानकारी

प्रिय मित्रो,

जैसा कि विदित है -
मेरे ब्लॉग "सरस पायस" पर प्रकाशित सभी पोस्टें
गत नवंबर में किसी अज्ञात कारणवश मिट गई थीं!
प्रस्तुत महत्वपूर्ण पोस्ट भी उन्हीं में से एक है!
हिंदी-दिवस पर विशेष जानकारी
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जी हाँ, आप इस संयुक्ताक्षर को बिल्कुल सही पहचान रहे हैं,
जो कि अंतरजाल पर मुश्किल से ही दिखाई देता है।
क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट द्वारा उपलब्ध
मंगल फॉण्ट से इसे टाइप करना असंभव है।

अत: इसके लिए प्रयास करना व्यर्थ है।

हिंदी चिट्ठाकारी (ब्लॉगिंग) से जुड़े सभी साथियों को
इसके विकल्प के रूप में उपलब्ध शुद्ध संयुक्ताक्षर
"शृ"
का प्रयोग करना चाहिए।......

Albelakhatri.com

अशोक चक्रधर, अलबेला खत्री और सटासट रेज़र.......... - पता नहीं क्यों आज अशोक चक्रधर की याद बहुत आ रही है । वैसे याद इसलिए भी आ रही है कि तीन महीने पहले अहमदाबाद के मेरे मित्र राजकुमार भक्कड़ ने मुझे दो दर्जन...



Hasyakavi Albela Khatri

लीजिये हाज़िर है अलबेला खत्री और अभिजीत सावंत की जुगलबन्दी में laughter ke phatke का हंगामा-

लो क सं घ र्ष !: फास्ट ट्रैक कोर्ट पर विचरण का एक दृश्य

फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अपराधिक वादों का विचारण सम्पूर्ण विधि व्यवस्था के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है प्रतिमाह माननीय न्यायधीश महोदय को 14 वादों का निर्णय करने के ठेकेके साथ नियुक्त मिली है या यूँ समझो कि ऍफ़.टी.सी न्यायधीश को 14 वाद कानिस्तारण प्रति माह करना आवश्यक है। जिसके कारण विचारण में पेशकार गवाह कीगवाही लिख रहे होते हैं उसी समय अहलमद भी गवाही लिख रहे होते हैं , न्यायधीशमहोदय भी गवाही लिख रहे होते हैं । जबकि नियम यह है एक समय में एक ही वाद काविचारण हो सकता है इसके विपरीत एक समय में एक ही न्यायलय में 6-6 मुकदमोका विचारण हो रहा होता है . स्टेनो गवाही के उपरांत होने वाले जजमेंट को टाइप कररहे होते हैं न्यायलयों में होने वाले जजमेंट भी स्टेनो टाइप कर डालते हैं। बचाव पक्ष केअधिवक्ता के समक्ष सजा के पक्ष को सुनकर सजा लिखी जाती है। इस तरह पूरी प्रक्रियाविधि के अनुरूप न होकर व अपराधिक वादों को निर्णीत करने का काम जारी है जिससेगुण दोष के आधार पर वादों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। एक माह में 14 वादों कानिस्तारण किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता है प्रतिदिन एक वाद का निस्तारणआवश्यक है छुटियाँ आदि छोड़ कर 22-23 दिन से ज्यादा न्यायालयों की कारवाई नहींहोती है . इस प्रक्रिया के चलते माननीय उच्च न्यायलयों में अपीलों का ढेर लग गया हैजेलें ठसा-ठस भरी हुई हैं बहुत सारी चीजें लिखी नहीं जा सकती हैं

……….
डागर बन्धुओं के स्वर में राग जयजयवन्ती


समकालीन ध्रुपद गायन में डागर बन्धुओं का दर्ज़ा निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर माना जाता है. इन्दौर के दरबार में गायक था डागर परिवार. उस्ताद नसीरुद्दीन डागर का देहान्त १९३६ के साल मात्र ४१ की वय में हो गया था. उनके बड़े बेटों नसीर मोहिउद्दीन डागर और नसीर अमीनुद्दीन डागर ने इस परम्परा को आगे बढ़ाया. सन १९६६ में नसीर मोहिउद्दीन डागर के इन्तकाल के बाद उनके छोटे भाइयों उस्ताद नसीर ज़हीरुद्दीन डागर और उस्ताद नसीर फ़ैयाज़ुद्दीन डागर ने कमान सम्हाली.

समाचार:- एक पहलु यह भी

बीमारियों को आमंत्रण देती सैक्स दवाये - सैक्स: यह शब्द सुनते ही युवा हो या बुजुर्ग, एकबारगी तो सबके कान खड़े हो ही जाते हैं। मुद्दा यह नहीं कि ऐसा क्यों होता है, जबकि यह बात अवश्य विचारणीय है कि

…………

Science Bloggers' Association

विश्व का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर कौन सा है? - क्या आप कंप्यूटर (Computer) प्रयोग करते हैं? अरे, ये भी कैसा मजाक है? अगर आप कम्प्यूटर प्रयोग न करते, तो ब्लॉगर कैसे बनते? दरअसल इस कड़कड़ाती ठंड में हाथ के ...


मेरा फोटो

dhiru singh {धीरू सिंह}
बरेली, उत्तर प्रदेश

सुरा यानी शराब समुन्द्र मंथन से उत्पन्न और दानवो द्वारा प्रदत्त है . सेवन के बाद दानवी प्रवत्ति हावी हो सकती है -

शायद सतयुग में समुन्द्र मंथन हुआ . देव और दानवो ने पर्वत को मथनी और शेषनाग को रस्सी बना कर बहुत मेहनत से समुन्द्र को मथा . बहुत से रत्न समुन्द्र में से निकले सामर्थ्य के अनुसार उन रत्नों पर देवो ने औए दानवो ने कब्जा कर लिया . धन्वन्तरी निकले , कामधेनु आदि आदि . लक्ष्मी जी निकली तो विष्णु ले गए . विष निकला जो शिवजी को पिला दिया , एरावत इंद्र ले गए ,अमृत देवता पी गए और सुरा दानवो को पिला दी छल करके ……

अंधड़ !

ब्लॉग,ब्लॉगर, ब्लॉगरी.... ?????- अंग्रेजो की हम हिन्दुस्तानियों पर यही तो थी सबसे बड़ी और अमिट छाप, जिसे हम अपने ऊपर से विम्बार और निरमा से रगड़-रगड़ कर धोने के बावजूद भी नहीं मिटा सके ! जब...

कुछ मेरी कलम से kuch meri kalam se **

एहसास (कुछ यूँ ही ) - सर्दी का ... घना कोहरा.. उसमें.. डूबा हुआ मन.. एक अनदेखी सी चादर में लिपटा हुआ और तेरी याद उस में आहिस्ता से ,धीरे से उस कोहरे को चीरती यूँ मन पर छा रही है...

शिल्पकार के मुख से

बड़ी हवेली ढहने लगी है अब !! - *आज ढाई पंक्ति की ही कविता कहने का दिल है. ढाई पंक्ति में ही पूरी बात कहने की कोशिश करता हूँ. आपका आशीर्वाद चाहूँगा.* *(१) .* *बड़ी हवेली * *ढहने लगी ह...

युवा दखल

पंकज बिष्ट का पत्र वागर्थ के सम्पादक के नाम - *(यह शायद कुछ मित्रों को गढ़े मुर्दे उखाड़ना लगे लेकिन जब कोई भ्रष्ट वक़ील जबरन हत्या को आत्म्हत्या साबित करने पर लगा हो तो कोई और चारा भी तो नहीं होता!)* **...

पाबला जी तुस्सी ग्रेट हो .....

कल पाबला जी ने अपने कंप्यूटर से अपने डेस्क पर बैठ कर ना जाने कितने हज़ार किलोमीटर दूर, मुझे मेरे घर में मेरे कंप्यूटर पर मेरे ही घर की तस्वीर भेज दी.....यहाँ तक कि मेरी खिड़की से भी झाँकने की नाकाम कोशिश कि थी उन्होंने...हाहा हा....पर्दों पर जो मैंने पैसे खर्च किये थे आज लगा वसूली हुई है.....

झा जी कहिन

ये चिट्ठी चर्चा नहीं सिर्फ़ पोस्टों के लिंक भर हैं (पोस्टों के लिंक ) - अभी कुछ दिन पहले एक टीप आई कि ,,,क्या आप जो करते हैं वो चिट्ठा चर्चा है , मैंने कहा नहीं , ये चिट्ठा चर्चानहीं है ये चिट्ठी चर्चा है , जैसा कि मैं पहले स..

ANALYSE YOUR FUTURE

प्रतियोगिता नंबर ६- पिछले सप्ताह पूछे गए प्रश्नों के उत्तर यह हैं | १) मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा जाता हैं | २) चन्द्रमा सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह हैं | हमारे इस सप्त...

हमें अपने देश के परंपरागत ज्ञान को सुरक्षित रखने का प्रयास करना होगा !!

आज विज्ञान का जितने व्‍यापक अर्थ में प्रयोग किया जाता है , उतना व्‍यापक अर्थ लेते हुए तो कम से कम इस शब्‍द को नहीं रचा गया था। 'विज्ञान' शब्‍द 'वि + ज्ञान' से बना था , जिसका अर्थ विशेष ज्ञान होता है। पूरी दुनिया के एक एक कण का भिन्‍न भिन्‍न स्‍वभाव है और सबका एक दूसरे से किसी न किसी प्रकार का संबंध है। यही कारण है कि प्रकृति में रहस्‍य ही रहस्‍य भरे पडे हैं। जिस क्षेत्र से भी व्‍यक्तियों का समूह जुडा ,चाहे वो पशुपालन हो या कृषि कार्य , घर मकान का निर्माण हो या जलाशय का , यातायात हो या संचार , रसोई का क्षेत्र हो या चिकित्‍सा का , किसी भी क्षेत्र में प्रकृति के नियमों की मदद लेने की उसे आवश्‍यकता अवश्‍य पडी। प्रकृति के विशेषताओं की चर्चा करनेवाला खास नियमों का समूह ही विज्ञान कहलाया और इस विज्ञान की हर शाखा के विशेषज्ञ हमारे समाज में

…..

ANALYSE YOUR FUTURE

प्रतियोगिता नंबर ६- पिछले सप्ताह पूछे गए प्रश्नों के उत्तर यह हैं | १) मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा जाता हैं | २) चन्द्रमा सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह हैं | हमारे इस सप्त...

जज़्बात

जाने कैसा होगा – मेरा गाँव ~~ -*जाने कैसा होगा *मेरा गाँव* *जिसमें था * *माँ के आंचल का* *घना छाँव;* *अलसायी सुबह* *कौओं की काँव-काँव* *पिताजी के मूछों का तेवर*..

मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay.

सुचना - कल दिन के ठीक बारहा बजे आंताक्षरी पेश की जायेगी जिस मै आप सब अपनी अपनी रचनाये, यानि कविता, गीत, गजल, शेर ओर फ़िल्मी गीत, भजन,आदी आदी ले कर हिस्सा ले सकते है...

शब्दों का सफर

पंच-परमेश्वर और पंचायती-माल -"पंच् का समष्टिमूलक अर्थ पंच-परमेश्वर में भी सिद्ध होता है। समूची सृष्टि में ईश्वर को ही सर्वोच्च माना गया है। इस मंडली को *पंच-परमेश्वर* की संज्ञा देने ..

झा जी कहिन

ये चिट्ठी चर्चा नहीं सिर्फ़ पोस्टों के लिंक भर हैं (पोस्टों के लिंक ) - अभी कुछ दिन पहले एक टीप आई कि ,,,क्या आप जो करते हैं वो चिट्ठा चर्चा है , मैंने कहा नहीं , ये चिट्ठा चर्चानहीं है ये चिट्ठी चर्चा है , जैसा कि मैं पहले स..

क्षमा चाहूँगा, रचना…
मेरा जैसे आपसे मतभेद योग चल रहा है ।
आपका यह प्रश्न ब्लागर के सँदर्भ में तो क्या, साहित्य के सँदर्भ में भी बेमानी है ।
पृष्ठभूमि होने के मायने यह नहीं है कि, उस क्षेत्र या भाषा विशेष पर एकाधिकार ही माना जाये ।
यदि परिवारवाद को लेकर चलें तो भी बेबुनियाद है । परिवार का जिक्र आया ही है, तो यह बता दूँ कि
स्व० जयशँकर प्रसाद अपने पुश्तैनी धँधे, इत्र, तम्बाकू और सुँघनी के व्यापार से

…….
Rachna ke bahane


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Arun Khadilkar

ग़मों से दोस्ती मेरी .......

सजायी जिंदगी मैंने टपकते आंसुओं से
गमों से दोस्ती मेरी तसल्ली है इसीसे
हसें हम जब कभी कोई नया रोना हुआ हासिल
बहल जाता है पाकर दुख नया खोया हुआ ये दिल
उदासी चैन से पायी बड़ी जिन्दादिली से
गमों से दोस्ती मेरी तसल्ली है इसीसे

……
इच्छा

इच्छा है कुछ प्राप्ति की,
धरती से गगन पर अवतरित होने की..
उखाड़ फेंकू तिमिर को,
बन जाऊं मयंक की ज्योत्सना
अगनी को करूँ अलंकृत
पुरस्कृत करूँ देवराज के रूप को
भार्या कहलाऊं हनुमान की
और मूल्य जीवन की ,
अभिशाप का बन जाऊं वरदान,
फल मिले बिना परिश्रम के.......

आज के लिए केवल इतना ही………….!

18 comments:

  1. चर्चा का विस्तार लुभाता है । आभार !

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  2. सुन्दर चर्चा ...!!

    ReplyDelete
  3. सुंदर चर्चा.

    रामराम.

    ReplyDelete
  4. सुंदर विस्तृत चर्चा-आभार

    ReplyDelete
  5. चर्चा बहुत अच्छी लगी धन्यवाद्

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  6. इस महत्त्वपूर्ण जानकारी को
    चर्चा-मंच के माध्यम से
    प्रचारित करने हेतु आभार -
    "शुद्ध संयुक्ताक्षर "शृ" का प्रयोग करना चाहिए!"

    ओंठों पर मधु-मुस्कान खिलाती शुभकामनाएँ!
    नए वर्ष की नई सुबह में, महके हृदय तुम्हारा!
    संयुक्ताक्षर "श्रृ" सही है या "शृ", FONT लिखने के 24 ढंग!
    संपादक : "सरस पायस"

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  7. बहुत ही सुंदर विस्तृत चर्चा!!

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  8. शुक्रिया बेहतरीन रही यह चर्चा भी

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  9. हम्म्म....अच्छा तो हमहूँ हैं हियाँ...
    बहुत विस्तार से हुई है चर्चा और हर किसिम के पोस्ट की हुई है....
    बहुत अच्छी रही...

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  10. अरे भाई थान्कू कहे भूल गए...सारी !!

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  11. अदा जी!
    टिप्पणी देना ही "थैंक्यू" होता है!

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  12. बहुत ही बढिया रही चर्चा....
    आभार!

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  13. तरह तरह के ब्लाग की समग्र चर्चा. आभार.

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  14. बहुत नई बातें मालूम हुई। अभी भी हम हिंदी को लेकर बहस कर रहे हैं.... आश्चर्य है:)

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