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Friday, January 22, 2010

“कैसे सच का सामना??” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-37



चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-


सरस पायस

उनको सदा नमन हैं करते : डॉ. श्याम गुप्त का एक बालगीत




सरस्वती माँ की हे बच्चो,
क्यों हम सब पूजा करते हैं?
इनके हंस-मोर हैं कैसे?
क्यों बैठीं ये श्वेत कमल पर?....

उड़न तश्तरी ....

कैसे सच का सामना??

vyangya-image_thumb

रचनाकार पर अगस्त में व्यंग्य लेखन पुरुस्कार के लिए व्यंग्य आमंत्रित किये गये. मन ललचाया तो एक प्रविष्टी मैने भी भेज दी. परिणाम दिसम्बर में आने थे याने लगभग ४ माह बाद, तो भेज कर भूल गये. इस बीच चुपके से दिसम्बर गुजर गया और कल पुरुस्कारों की घोषणा हुई. कुल ५१ शुभ प्रविष्टियों में १३ व्यंग्य लेखक पुरुस्कृत किये गये और उस लिस्ट में अपना नाम देखना सुखद रहा. वही व्यंग्य यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ आपके आशीर्वाद के लिए.

police

एक नामी चैनल पर कल शाम ’सच का सामना’ देख रहा था.

कार्यक्रम के स्तर और उसमें पूछे जा रहे सवालों पर तो संसद, जहाँ सिर्फ झूठ बोलने वालों का बोलबाला है, में तक बवाल हो चुका है. इतने सारे आलेख इस विवादित कार्यक्रम पर लिख दिये गये कि अब तक जितना ’सच का सामना’ की स्क्रिप्ट लिखने में कागज स्याही खर्च हुआ होगा, उससे कहीं ज्यादा उसकी विवेचना में खर्च हो गया होगा.

खैर, वो तो ऐसा ही रिवाज है. नेता चुनते एक बार हैं और कोसते उन्हें पाँच साल तक हर रोज हैं. अरे, चुना एक बार है तो कोसो भी एक बार. इससे ज्यादा की तो लॉजिकली नहीं बनती है.………

ललितडॉटकॉम

गधे का क्या अंजाम हुआ? - एक पुरानी कहानी पर चलते हैं. एक धोबी के पास एक गधा था. वह उसका बहुत ख्याल रखता था. मगर गधा दिन प्रतिदिन सूखता जा रहा था. धोबी ने सोचा कि इसका पेट भरने का उ...

ताऊ डॉट इन

ब्लाग हिट कराऊ एवम टिप्पणी खींचू तेल - जैसा कि आप जानते हैं ताऊ और रामप्यारी ने डाक्टर ताऊनाथ अस्पताल की स्थापना की थी. अस्पताल का काम अच्छा चल रहा था. डाक्टर ताऊ मरीज देखता था और रामप्यारी उनका...


ताऊजी डॉट कॉम

दिमागी कसरत - 53 : विजेता : सुश्री संगीता पुरी - "दिमागी कसरत - 53 के जवाब" प्यारे साथियों, मैं आचार्य हीरामन "अंकशाश्त्री" आपका हार्दिक स्वागत करता हूं और अब मैं आपको दिमागी कसरत - 53 के जवाब बताता हू...

शब्दों का सफर

काळी छींट को घाघरो, निजारा मारे रे ... - संबंधित कड़ियां-1.कृषक की कशमकश और फ़ाक़ाकशी .2.निष्क से ही बना तनिष्क.3.लिबास, निवास और हमारा बजाज चां कपड़े की विभिन्न किस्...

गत्‍यात्‍मक चिंतन

हम कैसे कह सकते हें कि काम करना हमारे हाथ में है !! - जिस ब्रह्मांड में इतने बडे बडे पिंड एक खास पथ पर निरंतर चल रहे हों , वहां किसी व्‍यक्ति के द्वारा यह स्‍वीकार नहीं किया जाना कि हम सब अपने शरीर में स्थित उ..

नुक्कड़

ये लघु संदेश सेवा है , अरे एस एम एस है यार ...अजय कुमार झा - कुछ दिनों से मोबाईल में एस एम एस आ रहे थे , जाहिर है कि आपको भी आ रहे होंगे , मुझे कुछ को पढ को हंसी आई कुछ को पढ के नहीं आई , अब जरूरी तो नहीं कि मुझे ...

साहित्य-सहवास

मेरा तेवर - मेरा ज़ेवर - मशक्कत मेरा तेवर है ज़ुर्रत मेरा ज़ेवर है मैं इन्हें बदरंग नहीं होने दूंगा प्रयास लाख असफल हों मेरे पर उत्साह भंग नहीं होने दूंगा www...

Albelakhatri.com

अपनों के ख़ून का चनाब मेरे देश में....... - आदमी की ज़िन्दगी का हाल काहे पूछते हो, हो चुका है ख़ाना ही ख़राब मेरे देश में भेडि़ए-सियार-गिद्ध- चील-कौव्वे घूमते हैं आदमी का ओढ़ के नक़ाब मेरे द...

आरंभ Aarambha

देवकीनन्दन खत्री से अलबेला खत्री तक हिन्दी की यात्रा : माईक्रो पोस्ट - मेरे पिछ्ले पोस्ट मे हुए टंकण त्रुटि पर ललित शर्मा जी की टिप्पणी पर भाई शरद कोकाश जी ने लिखा 'ललित जी के लिये एक शोध विषय का सुझाव - " देवकीनन्दन खत्री से ...

Gyan Darpan ज्ञान दर्पण

बङगङां बङगङां बङगङां -3 - भाग १ व भाग २ से आगे ......... ' किसका इलाज करोगे वैद्यजी ? विष का प्रभाव संभवत: आप हटा सकते है | शरीर पर लगे अस्सी घाव भी आपने ठीक किये है परन्तु मेरे दिल..

किस्सा-कहानी

दस का नोट - [image: दस का नोट] "मम्मी तुम भी कमाल करती हो! भला दस रुपये लेकर मेला जाया जा सकता है?" "क्यों? दस रूपये ,रुपये नहीं होते? फिर तुम्हें झूला ही तो झूलना है...

chavanni chap (चवन्नी चैप)

दरअसल : भारतमाता का संरक्षण - -अजय ब्रह्मात्‍मज हालांकि यह तात्कालिक जीत है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व है। भारतमाता सिनेमा को चालू रखने के लिए मराठी समाज की एकजुटता उल्लेखनीय है। पिछल..

दिनेश दधीचि - बर्फ़ के ख़िलाफ़

देखा-परखा खूब ... - देखा-परखा खूब, आजमाया है, कर ली जाँच शिलाखंड-सा है अटूट अपने रिश्ते का काँच . आसमान की रंगत ने उजियाला फैलाया पेड़ों ने तब बिना छुए आँखों को सहलाया अलसायी..

अंकित सफ़र की कलम से

मैं पंछी हूं मुहब्‍बत का, फ़क़त रिश्‍तों का प्‍यासा हूं - ऐसा लग रहा है कि ब्लॉग पे पोस्ट किये हुए एक अरसा हो गया है, काफी दिन हो गए थे और ब्लॉग पे कोई पोस्ट नहीं लिखी थी. कुछ व्यस्तता कहूं या नेट कि निर्धारित सीम...

चिट्ठाकार चर्चा

युवा सोच युवा ख्यालात-कुलवंत हैप्पी-"चिट्ठाकार चर्चा"(ललित शर्मा) - हमने किताबों में पढ़ा है फिल्मो में देखा की गुलाम होते थे. बर्बर युग में मानवों की नीलामी होती थी, गुलाम खरीदे बेचे जाते थे. उनका निजी सम्पत्ति की तरह उपयोग...

झा जी कहिन

पटरियों पर दौडेगी चिट्ठा चालीसा एक्स्प्रेस - मुझे नहीं पता था कि जब मैं इस पर लौटूंगा तो चर्चा की पटरियां "चिट्ठा चालीसा एक्स्प्रेस " बनके आपके सामने उतरेगी । और अभी तो रेल लाईनें बिछ रही हैं , यान..

हिन्दी साहित्य मंच

काव्य की एक विधा "अगीत" के नवीन छंद ’लयबद्ध अगीत[रचना]----डा श्याम गुप्त - (ये प्रेम-अगीत, अतुकांत काव्य की एक विधा "अगीत" के नवीन छंद ’लयबद्ध अगीत’ में निबद्ध हैं) (१) गीत तुम्हारे मैंने गाये, अश्रु नयन में भर-भर आये, याद तुम्हा..

ANALYSE YOUR FUTURE

तुला राशी - *तुला राशी* -२०१० में तुला राशी साढ़ेसाती के प्रभाव में होने से रुकावटों,बाधाओ व कठिनतम परिस्थितियो से गुजरेगी जनवरी से१ मई तक तथा १ नवम्बर से वर्ष के अंत ..

वीर बहुटी

- संजीवनी *कहानी अगली कडी* *पिछली कडियों मे आपने पढा मानवीएक महत्वाकाँक्षी ,अधुनिक विचारों की औरत है।\उसका करियर खराब न हो और फिगर खराब न हो इस लिये अपने बच्...

अंधड़ !

एक देश के अन्दर, कई देश हैं ! - *बिके हुए यहाँ सब, खादी, सफ़ेद और उजले परिवेश हैं ! इसीलिये आज भी , इस एक देश के अन्दर, कई देश हैं !! देश-संस्कृति सिमट गई, दूर-दराज किसी गाँव के द्वारे तक !...

मनोरमा

खुशबू - इक नयी खुशबू कहाँ से पास मेरे आ गयी सोच की धारा बदलकर जिन्दगी में छा गयी रोज मिलते जो हजारों लोग कितने याद हैं आँख से उतरा हृदय में प्रीत मुझको भा गयी फिर ..

देशनामा

डॉक्टर टीएस दराल के तीन मरीज़...खुशदीप - सुबह *डाक्टर टी एस दराल* अपने नर्सिंग होम में बैठे हुए थे...एक पहलवाननुमा मरीज़ कमर दर्द से कराहता हुआ डॉक्टर दराल के चैम्बर में पहुंचा...मरीज़ का बुरा हाल...

सारथी

निमंत्रण: शास्त्री परिवार! - मेरे बेटे आनंद का कुमारी अर्पिता के साथ शुभ विवाह (23 जनवरी 2010) पर सारथी के सारे मित्रों का स्वागत है. विवाह स्थल: भारतमाता कालेज, त्रिक्ककारा, एर्नाकु..

कबाड़खाना

दधिचोर गोपीनाथ बिहारी की बोलो जै - शिशिर की कँपन का अभी अंत नहीं हुआ है किन्तु तिथि तो कह रही है वसन्त आ गया है। वसंतागम के साथ ही आजकल 'कबाड़ख़ाना' पर नज़ीर अकबराबादी का साहित्योत्सव चल रहा है। ..

बना रहे बनारस

मर नहीं गए मुक्त हो गए ! - तबीयत कई दिनों से नासाज थी। थोड़ी राहत मिली कि हमारे पुराने मित्र अब्दुल्ला आ गए। हाल-चाल के बाद तय हुआ कि चलो कहीं चाय पीते हैं। अपने इलाके के चर्चित अड्डे...

मोहल्ला

छोटे होकर तो देखिए बहुत बड़े हो जाएंगे - बड़े लोगो का अपनों से छोटों, सहकर्मियों के प्रति विन्रम व्यवहार हम देखते तो हैं लेकिन कई लोगों को यह नाटक लगता है। कभी सम्बंधित लोगों से बात करें तो पता चले..

Darvaar दरवार

ब्रेकिंग न्यूज़ -समीर लाल उड़नतश्तरी वाले करेंगे नेतागिरी - . . ब्लॉग के शहंशाह ,हर दिल अज़ीज़ , हमारे आपके समीर लाल समीर उड़नतश्तरी वाले कनाडा प्रवासी कुछ नया सोच रहे है .विश्वस्त सूत्रों से पता चला है समीर जी राजन..

मानसिक हलचल

कोहरा - आज सवेरे कोहरे में दफ्तर आते समय दृष्यता २५-५० मीटर से अधिक न थी। वाहन अपनी हेडलाइट्स जलाये हुये थे। यह सवेरे १० बजे का हाल था। पिछले कई दिनों से मेरी सोच ...

फिलहाल

- राजनीति की गति जानी न जाए राजनीति में कुछ लोग अब दो वजह से आते हैं एक, अधिकाधिक सत्ता और पद लाभ उठाने दूसरे अपने अंदर जमा गंदी निसारने। कभी राजनीति सेवा और...

॥दस्तक॥

IRCTC अब नये अंदाज में - भारतीय रेल केटरिंग एवं टुरिस्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने अपनी बोरिंग साईट को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास चालू कर दिया है। उसकी नई साईट जो कि अभी बीटा वर्जन ...

आवारा बंजारा

कहीं न जाने के बाद भी लौटना - कहीं न जाने के बाद भी लौटना एक लंबे अरसे के बाद ब्लॉग पर लिखना, पता नहीं इसे लंबा अरसा कहना चाहिए या नहीं क्योंकि मेरे ब्लॉग पर पिछली पोस्ट 2009 के अगस्त मा..

कस्‍बा qasba

सनातन समागम का बेईमान गुणा-भागम - कुंभ में जाते तो हैं लेकिन क्या लेकर लौटते हैं? अपने पापों को तज कर और गंगा को अंजुरी में भर कर सूरज की तरफ उड़ेलने के बाद हम अपनी उस सामूहिकता का क्या करत..

प्राइमरी का मास्टर

यही कारण है कि... बच्चे विद्यालय से ऐसे निकल भागते हैं जैसे जेल से छूटे कैदी। - पिछली कड़ी में आपने अब तक पढ़ा कि.... - बच्चों के साथ एक तरह के विशेष अनुशासन की आवश्यकता सदैव ही पड़ती है। - अनुशासन बनाये रखने के नाम पर दण्ड, ...

लहरें

उलझनें -

जिंदगी बेतरह लम्बी फिल्म हैजिसके पात्र अचानक से कहीं चले गए हैंऔर मैं स्टेज पर मौन हूँअकेली भी हूँ, और कहने को कुछ ढूंढ रही हूँफिल्म विथिन अ फिल्मजब शब्द ना ..

किस से कहें ?

Nostalgia Prevails -

फिल्म : दुलारी (१९४९) -*दुलारी (१९४९)* दोस्तों पुराने फिल्मों के गीतों से मेरा न जाने क्या लगाव है. पिछले ३० - ३५ सालों में न जाने कितने गीत सुने .... ग़ज़लों का दौर आया ... स...

कर्मनाशा

वसंतागम और 'सब्जी है उपहार प्रकृति का' - शिशिर का हुआ नहीं अन्त कह रही है तिथि कि आ गया वसन्त ! *अभी कुछ देर पहले एक कार्यक्रम से लौटा हूँ। सरस्वती पूजा , वसन्त पंचमी और निराला जयन्ती को लेकर कस्ब..

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लगाइए सर्च को धार - रिफाइन सर्च के चंद फॉर्मूले -*सर्च इंजन में सामग्री ढूंढ़ते समय कुछ छोटी-छोटी टिप्स वक्त भी बचा सकती हैं और मेहनत भी* इंटरनेट पर मनचाही सामग्री की तलाश के लिए मदद ली जाती है सर्च इंजन ..

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कार्टून :- चालान-प्रथा पर चुटकी लेने का दिन है आज...

अब मेरी कलम से कुछ दोहे पढ़िए-

रफा-दफा जब कर दिया, चोरी का सामान। वापिस फिर से चाहता, बेईमान सम्मान।।…..

सज्जनता की आड़ ले,

शठ् करता आखेट।

कोतवाल को जाल में,

डाकू रहा लपेट।।………




अब आज्ञा दीजिए…..!

आज की चर्चा में

केवल इतना ही!

11 comments:

  1. बहुत मेहनत की आपने हमारे लिए .. धन्‍यवाद !!

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  2. बहुत बढ़िया व शानदार चर्चा

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  3. ये चर्चा बड़ी है मस्त-मस्त

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  4. बाप रे, बड़ी जबरदस्त कवरेज...आनन्द आ गया यह चर्चा और इसके पीछे मेहनत देखकर!! लगे रहिये!!

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  5. सुंदर चर्चा-शास्त्री जी आभार

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  6. बहुत विस्तृत और सुंदर चर्चा.

    रामराम.

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  7. इतनी लम्बी चौडी चर्चा काफी मेहनत की है धन्यवाद और शुभकामनायें

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  8. sab maa sarasvatee kee kirapaa he ji.
    ---dhanyavaad.

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