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Saturday, January 30, 2010

“गांधी जी कहते हे राम!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-46

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

आइए आज के
"चर्चा मंच" को सजाते हैं-

सबसे पहले चर्चा करते हैं

“राष्ट्र-पिता महात्मा गांधी जी” की पुण्य-तिथि पर लगीं

कुछ पोस्टों की-

“ताऊ” गांधी जी को भूल जाये ऐसा तो सम्भव ही नही है-


ताऊ पहेली - 59
Saturday, January 30, 2010 at 8:00 AM Posted by ताऊ रामपुरिया

Taau.in
ताऊ पहेली - 59 का हिंट



साबरमती के संत तूने सच में कर दिया कमाल..



आज महात्‍मा गांधी की पुण्‍यतिथि है, सर्वप्रथम श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूँ।
कल दैनिक जागरण मे साबरमती के संत गीत के सम्‍बन्‍ध मे एक लेख था और आज के संस्‍करण मे उसी से सम्‍बन्‍ध चर्चा पढ़ने को मिली।
महात्मा गांधी के सम्मान में गाए जाने वाले गीत..दे दी आजादी हमें खड्ग, बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल.. आज के समय मे कितना उचित है यह जानना जरूरी है ?
महात्‍मा गांधी जी ने देश की आजादी मे अहम योगदान दिया इसे अस्‍वीकार करना असम्‍भव है पर यह गीत वास्‍तव मे देश की आजादी मे अपना बलिदान देने वाले लोगो को कमतर बताता है।
आज स्‍वयंआकालन करने की जरूरत है कि क्‍या आजादी हमें खड्ग, बिना ढाल के ही मिली है ? …..


मेरा फोटो
Sanjay Sharma

"दिव्य दृष्टि "

"माय दिव्य दृष्टि"

अंदाज़

गाँधी को रोज गोली दागने वाले आज शोक मना रहे हैं। रघुपति राघव राजा राम .......  ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥  
आप टेन्शन मत लीजिये बापू ! हमारे यहाँ लोकतन्त्र में कोई ऊंच नीच नहीं है, सब नीच ही नीच है
मेरी भावना का लोकतन्त्र वह हैजिसमें छोटे से छोटे व्यक्ति की आवाज़ को भीउतना ही महत्व मिले जितना एक समूह की आवाज़ को- महात्मा गांधीहाय बापू !पुण्यतिथि का वार्षिक यानी औपचारिक प्रणाम ।समाचार ये है कि आपको कोई टेन्शन लेने की ज़रूरत नहीं है ।आप वहां आराम से………  ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥   साझा-संसा
गाँधी, गांधीवाद और गांधीगिरी
आज महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है ,गांधी जयंती पहले गुजर चुकी है। गाँधी प्रतिमाओं और उनकी तस्वीरों को पिछली जयंती के बाद धोने-पोंछने का यह पहला अवसर आया है। प्रत्येक वर्ष ऐसा ही होता है, जयंती और पुण्यतिथि के बीच की अवधि में गाँधीजी के साथ कोई नहीं होता…….

मनोज

अपनी भावनाएं, और विचार बांट सकूं।


बापू का बलिदान
बापू का बलिदान --- --- मनोज कुमार जनवरी का महीना नये साल की शुभकामनाओं, आशा, उल्लास, बधाइयां आदि से शुरु होता है, पर जाते-जाते दे जाता है एक दुख, उदासी, उस महापुरुष की अनुपस्थिति का अहसास जिनके बारे मे महा कवि पंत ने कहा था तुम मांसहीन, तुम रक्त हीन, हे
नई बात


अनिल चमड़िया जी, आप डटे रहिये।
परसों रात साढ़े ग्यारह बजे हिसार के मिड सिटी होटल में चेक-इन कर रहा था जब चन्द्रिका का फोन आया। उसके मार्फत यह खबर मिली कि अनिल चमड़िया को महात्मा गान्धी अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया। इस कुकर्म को चाहे जो नाम दिया जाये, इसके पक्ष में जो………
कार्टून :- नेता की मूंछ vs. कुत्ते की पूंछ...

लो क सं घ र्ष !: संघ का हिंदुत्व

By Suman
    सर्वश्री जमुना प्रसाद त्रिपाठी, चन्दन मिश्र, मनीष मेहरोत्रा व नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्रा
बाराबंकी में सैकड़ों साल पुराना ठाकुरद्वारा का मंदिर शहर के बीच में स्थित है ठाकुरद्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदि पुरुष गण हैं ।…..

ॐ जय चिटठा चर्चा.....

समीर जी और 

ज्ञानदत्त पाण्डेय जी 

आपको समर्पित है..



महामहिम  समीर लाल जी  की आरती पढ़ी मानसिक हलचल पर ..मन अति प्रसन्न हुआ ..सोचा  इसको थोड़ा और बढाया जाए... एक दो दिन में पक्की बात है गाकर डालूंगी...फिलहाल आप गुनगुना कर काम चलाइये...
आदरणीय समीर जी और आदरणीय ज्ञानदत्त पाण्डेय जी आपको समर्पित है मेरी यह रचना...

ॐ जय चिट्ठाचर्चा
स्वामी जय चिट्ठाचर्चा
तुम्हरे कारण अपना
तुम्हरे कारण अपना
नहीं बंद हुआ चर्चा
ॐ जय चिटठा चर्चा......(वाह..! बहुत खूब!!  ये समर्पण बहुत अच्छा रहा!)

लिखाडी़

अशोक मधुप

कृपया बतांए सही क्या है
क्या क्रोंच पछी एवं सारस एक ही है जिंदगी में मुझे पहली बार सारस देखने को मिलें। आदमी के बराबर का पछी देखकर आश्चर्य हुआं। एक जोडे के साथ दो बच्चे भी थे: रूक कर कुछ फोटीं खींचे। नेट पर पक्षी के बारे में जानकारी खोजनी शुरू कीं । कुछ जगह मिला कि क्रोच एवं सारस…………..
वेदिका

Vedika
कि आये छोड़ सब हम, साथ तुम खड़े क्यों ना गये पीछे नहीं हम, तुम मगर बढ़े क्यों ना मै तो हूँ साथ बगल में भी तुमने देखा था कि मेरे वास्ते फिर जहाँ से लड़े क्यों ना ना बुलाया, ना कुछ………..

ये पोस्ट निकालना क्या होता है ज्ञानदत्त जी? ... एक प्रश्न समीर जी से भी

:-)
अच्छा हुआ, आपने एक पोस्ट निकाल ली!
अब मैं ठहरा मन्दबुद्धि प्राणी। इस टिप्पणी का अर्थ ही नहीं समझ पाया।
मेरे हिसाब से तो मैंने कुछ हास्य जैसी कोई चीज नहीं लिखी थी फिर :-)
(हँसने वाला इमोशन) का क्या मतलब हुआ? लगता है कि भूलवश
मैंने कुछ भौंडी बात लिख दिया रहा होगा जिससे हँसी आ गई होगी।
और यह पोस्ट निकालनायेक्या बला है?
मैं तो पोस्ट लिखता हूँ, कभी कभी पोस्ट बन जाती है पर
पोस्ट निकालने जैसी किसी प्रक्रिया से बिल्कुल ही अन्जान हूँ।......

देशनामा

मुंबई का भीखू म्हात्रे कौन...खुशदीप
आपने राम गोपाल वर्मा की फिल्म सत्या देखी होगी...अगर हां, तो आपको मनोज वाजपेयी का निभाया भीखू म्हात्रे का किरदार भी याद होगा...भीखू म्हात्रे फिल्म के एक दृश्य में एक चट्टान पर चढ़कर चिल्लाता है मुंबई का किंग कौन....है कोई भीखू म्हात्रे का मुकाबला करने
Kavymanjusha

ननिहाल की यादें (बाल गीत)
हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगानाहेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना नानी, मामा और है भैया छोटे से गावं ठौड़ की छैया हेलो हेलो ज़रा फ़ोन लगाना याद मुझे आते है नाना ...मेले में जो झूले आए मामाजी ने खुब झूलाए खैल खिलोने , गली महल्ला पकड़म पाटी, हल्ला…….

एक आलसी का चिठ्ठा

... गई भैंस गड्ढे में


नगरपालिका, जल संस्थान वगैरह के गड्ढों को मैं इस देश की छाती के नासूर मानता हूँ। ये गड्ढे भारत के प्रशासन को चलाते लोगों की सम्वेदनहीनता के मवाद सँजोते हैं और गन्धाते रहते हैं। ये गड्ढे आम नागरिक की सहिष्णुता और कष्टसह्य प्रकृति को उजागर करते हैं। हमारे उन्नत राष्ट्र होने की गाड़ी इन्हीं में फँसी पड़ी है।.......
(वाह भई वाह...! भैंस को को तो जाना ही था गड्ढे में! 
क्योंकि भैंस को गड्ढा ही ज्यादा पसन्द है)


हँसते रहो Hanste Raho

ईब्ब मैं के करूँ?...कित्त जाऊँ?
***राजीव तनेजा*** नोट:इस कहानी का विषय और विषयवस्तु कुछ वयस्क टाइप की है...अत: बाद में ये ना कहना कि पहले चेताया नहीं था "गजब का टैम आ ग्या ईब्ब तो...गजब का"..."क्या हो गया ताऊ जी?"..."इस सुसरी...हराम की जणी नै ना जीण जोगा छोड़ेया ओर ना ही मरण जोगा……….
TechTOUCH

कहीं आपकी ब्लॉग सामग्री किसी ने चुराई तो नहीं ..अगर चुराई तो आयो पता करें कि किसने चुराई ???
आप मेहनत करके अपने ब्लॉग या साईट पर बढ़िया से बढ़िया सामग्री लाते है | और सोचे अगर कोई बिना मेहनत करे, आपकी सामग्री का अपनी साईट पर इस्तेमाल करके वाहवाही लूटे, तो कैसा लगता है ??? वैसे हिंदी में इसे साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के नाम से पहले से ही जानते…..

काव्य मंजूषा

सृष्टि मेरी गोद में ...


जब भी मेरी गोद में


मेरा शिशु होता है


तुम नगण्य हो जाते हो


कहाँ नज़र आते हो तुम मुझे ??……..
तेताला

चिट्ठी चर्चा सुण ल्यो लाला-नई चिट्ठी लाया तेताला (ललित शर्मा)
चिट्ठी चर्चा से पहले सुण ल्यो, अपणी चर्चा में हैं दो करेक्टर पहला म्हारा ताऊ और दूसरा रमलू. आपके चिट्ठों की चर्चा ये दोनों ही करेंगे. अब सीन समझा देता हूँ. ताऊ ने अपणी बैठक में खाट डाल रखी है और हुक्का सिलगा रखा है. ताई पीछे झरोखे से घूँघट निकाले देख रही……..
कल्पतरु

क्या खोया क्या पाया अपनी अभी तक की जिंदगी में…. अपना खुद का निजी हिसाब किताब..
आज ऐसे ही अपनी बीती हुई जिंदगी का मतलब निजी हिसाब किताब कर रहे थे। तो हमने पाया कि बहुत कुछ हमने खोया है और बहुत कुछ पाया है। और शायद जो खोया है अब हमें मिल भी नहीं सकता है और जो हमने पाया है कभी भी हमसे छिन सकता है या खो सकता है, शायद यह सभी के साथ होता………
खेलगढ़

महिला खिलाडिय़ों को आगे लाने जागरूकता जरूरी
भारत में कहने को भले आज महिला खिलाड़ी हर खेल में अपने जौहार दिखा रही हैं, लेकिन इसके बाद भी स्थिति यह है कि महिलाएं खेलों में काफी पीछे हैं। अपने देश में खिलाडिय़ों के साथ प्रशिक्षकों को मिलने वाले खेल पुरस्कार भी यह बताते हैं कि महिलाओं की तुलना में….
Dr. Smt. ajit gupta
परिवारवाद बनाम केरियरवाद - आज समाचार पत्रों में एक समाचार प्रकाशित हुआ, बी.बी.सी. ने एक सर्वे कराया कि सात मानवीय दुर्गुण यथा लोभ, ईर्ष्‍या, आलस्‍य, पेटूपन, वासना, क्रोध और अभिमान कि..
आलोक स्तम्भ
प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है - अहंकार को शून्य करने में प्रार्थना मदद दे सकती है। प्रार्थना कोई यांत्रिक वस्तु नहीं है, वह हृदय की क्रिया है । भगवान की प्रार्थना में सारे भेदों ...
मुझे शिकायत हे. Mujhe Sikayaat Hay.
टक टक घडी का जबाब जी - किसी भी पहेली को पुछना तो बहुत आसान है, लेकिन फ़िर उस का जबाब ओर विजेता घोषित करना बहुत कठिन होता है... तो लिये कल की पहेली का जबाब... ओर इस के साथ ही मै कु..
पराया देश
अभी अभी निपटा कर हटा हुं.... - बाप रे पुरे २ घंटे लगे तब जा कर भी शांति नही हुयी, पता नही किस ने मेरे ब्लांग " मुझे शिकायत है" पर तावड तोड टिपण्णियां दे दी मेरी पुरानी पोस्टो पर, मुझे त..
"सच में! "
मुगाल्ते - मै नहीं मेरा अक्स होगा, जिस्म नही कोई शक्स होगा. ख्वाहिशें बेकार की है, पानी पे उभरा अक्स होगा. ज़िन्दगी अब और क्या हो, आंखों में तेरा नक्श होगा. गल्तियां..
झा जी कहिन
चढते हैं मोटकार, कभी सायकल भी चढा कीजीए, अरे कभी कभी तो अलानी फ़लानी चर्चा भी पढा कीजीए - चलिए भाई , माना कि अपना कोई ब्रांड नहीं है , माना कि अपना दर्ज़ा भी शायद दोयम-तीयम या पता नहीं कौन कौन सा यम है , मगर अब जो है सो तो है ही , उसे जैसे का त..
हास्यफुहार
सबसे पहले क्‍या करोगे? - * * *सबसे पहले क्‍या करोगे?*** * * *फाटक बाबू खदेरन से **–** **“**अगर तुम मेरी जगह मालिक बन जाओ और मैं तुम्‍हारी जगह नौकर बन जाऊं तो **तुम** सबसे पहले ...
स्वप्नलोक
कहना होगा टर्र - यह कहानी उस कुएं की है जो काफी पुराना था । कुएं में पानी की कोई कमी न थी । जितना पानी खींचा जाता उतना ही धरती उसमें भर देती । कुएं में मेंढक भी काफी संख...
बर्ग वार्ता - Burgh Vaartaa
अग्नि समर्पण - बड़े दिनों के बाद सूरज इतना तेज़ चमका था। सब कुछ ठीक-ठाक था। सही मुहूर्त में बिस्मिल्लाह किया था। और गाडी वास्तुशास्त्र के हिसाब से एकदम सही दिशा में दौड़ने ...
कबाड़खाना
तुम कनक किरन - जयशंकर प्रसाद - आज से ठीक एक सौ इक्कीस साल पहले यानी ३० जनवरी १८८९ को ’कामायनी’ जैसी कालजयी रचना करने वाले महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म हुआ था. सो इस अवसर पर पढ़िये उनकी एक क..
प्रेम का दरिया
अनुभवों का महामेला - जयपुर में पांच साल से होने वाला अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव अब नई उंचाइयां छूने लगा है और जयपुर के पर्यटन उद्योग के साथ कदमताल करते हुए जयपुर की नई पहचान...
मानसिक हलचल
रीडर्स डाइजेस्ट के बहाने बातचीत - कई दशकों पुराने रीडर्स डाइजेस्ट के अंक पड़े हैं मेरे पास। अभी भी बहुत आकर्षण है इस पत्रिका का। कुछ दिन पहले इसका नया कलेक्टर्स एडीशन आया था। पचहत्तर रुपये...
कस्‍बा qasba
मूर्ति पूजा का खंडित पक्ष - आरा से यह तस्वीर सहकर्मी दीपक कुमार के सौजन्य से प्राप्त हुई है। जयप्रकाश नारायण की मूर्ति है। जन्मशति के मौके पर उनके अनुयायी आस्था व्यक्त कर रहे हैं।..
एक हिंदुस्तानी की डायरी
ला रहा हूं अर्थकाम, सहयोग जरूरी है - दोस्तों, एक नई वेबसाइट शुरू करने जा रहा हूं। जीवन को सुंदर बनाने की कोशिश का हिस्सा है यह वेबसाइट - अर्थकाम। यह अभी बनने की प्रक्रिया में है। मकसद है 42 कर..
Darvaar दरवार
कौन कहता है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ? -
कौन कहता है भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है ? अगर होता तो राष्ट्रपति भवन के स्तम्भ पर यह क्रास क्या कर रहा है शायद क्रास एक धर्म का निशान ..
तीसरा खंबा
व्यवस्था ने न्याय देने से अपने हाथ ऊँचे कर दिए हैं -देश भर की अदालतों में मुकदमे बहुत इकट्ठे हो गए हैं। निर्णय बहुत-बहुत देरी से आ रहे हैं, पूरी की पूरी पीढ़ी मुकदमों में खप रही है..
कछु ह‍मरी सुनि लीजै
विकासशील पेट का कुम्‍भ - विकास के कई आयाम हैं। विकसित होना और अविकसित होना इसके दो ध्रुवान्‍त हैं तो अर्द्धविकसित होना मध्‍यबिन्‍दु है। अर्द्धविकसित होने में एक स्थिरता का भाव है...
चोखेर बाली
एक कविता - अचानक से एक बच्चा रखता है तीन पत्थर और कहता है– यह मेरा घर है।” मैं नहीं चाहता मेरे बच्चे भी कभी रखे –तीन पत्थर त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका प्रतिलिपि के दिस..
घुघूतीबासूती
आज है इकतालिसवाँ दिन!.....................घुघूती बासूती -


कबसे मन गा रहा था.... वो सुबह कभी तो आएगी

जब प्लास्टर उतारा जाएगा जब बाँह को धोया जाएगा।

चालीस दिन से हर रात दिनों की गिनती करते बीती है।

कितने बीत गए, कितन...
“गांधी जी कहते हे राम!”
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
राष्ट्र-पिता महात्मा गांधी जी पर तो बहुत ही कम पोस्ट आई हैं!
आज की चर्चा को विराम!
सबको राम-राम!!

15 comments:

  1. बहुत बढिया चर्चा शास्त्री जी-आभार

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  2. बहुत लंबी चर्चा .. काफी मेहनत से की गयी है .. सारे अच्‍छे लिंक हैं!!

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  3. बेहद सुन्दर एवं सुरूचिपूर्ण तरीके से की गई चर्चा.....
    धन्यवाद्!

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  4. बहुत अच्छी चर्चा!

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  5. विस्तार से की गयी सुन्दर चर्चा । आभार ।

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  6. गांधी कहते हैं...देश में मेरे जितने भी बुत लगे हैं तोड़ दो...जितने दफ्तरों-स्कूलों में मेरे चित्र लगे हैं, उतार दो...अगर मुझे वास्तव में कहीं रखना है तो अपने दिल में रखो...


    चर्चा लाजवाब है...

    जय हिंद...

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  7. एक और बेहतरीन चर्चा...आनन्द आ गया. विस्तृत!!

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  8. इस चर्चा में वास्तव में ही कई चिट्ठों की चर्चा हो पाई है.

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  9. बहुत अच्छी चर्चा!आभार ।

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  10. बहुत ही बेहतरीन चर्चा. आभार.

    रामराम.

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  11. मस्त चर्चा , बधाई हो

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...