चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Wednesday, September 28, 2011

"समय प्रबन्धन में कमजोर मैं." (चर्चा मंच-651)

मित्रों!
आज बुधवार है!
चर्चा करनी थी भाई अरुणेश सी दवे जी को,
मगर वो व्यस्त हैं।
इसलिए ब्लॉग व्यवस्थापक के नाते
आज की जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहा हूँ!
देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक!
मगर टिप्पणी तो आप ही देंगे, इन पोस्टों पर!

है पुंज भावानाओं का या हिस्सा शरीर का पर सभी बातें करते दिल की दिलदारी की | पल सुख के हों या दुःख के दौनों ही प्रभावित करते धडकनें तीव्र होती जातीं चैन न आ ...

चूड़ियाँ पहन लो बाबू तुम सबको चूड़ियाँ पहनाउंगी ...
इटली की मैं कंगाल सी वेटर बिलेनियर बन
बहनों को अपनी माला-माल कर जाउंगी ...

पिछले भाग से आगे जैसा कि आजकल अखबारों और टीवी न्यूज़ चैनल्स में दिखाया जा रहा है, इन दिनों यहाँ ( बल्लारी जिले में ) खनन के कार्य पर रोक लग गयी है | पिछले...

हाड़-माँस की पुत्तली, 'चिदविभरम', रोबोट |
तीनों में ही खोट है, पोट के खाते नोट |
GG=2G पोट के खाते नोट, खोल के बाहर खाते |
देकर गहरी चोट, नोट से ...

मेरी धरती मेरा आसमां चरणों पे तेरे मैंने शीश झुका लिया था फिसली मैं अगर तो भी गिरी नहीं गिरने से तुने मुझे बचा ...

अनवर भाई आपको पता है कि मुझे साप्ताहिक ब्लागर्स मीट का बेसब्री से इंतजार रहता है, इसका अहसास आपको इसी बात से हो जाना चाहिए कि आप जैसे ही रात 12 बजे के कर...

*बहुत अरमान हैं दिल में, हमें गढ़ना नहीं आता*
*पहाड़ों की कठिन मंजिल, हमें चढ़ना नहीं आता*
*सितारे टिमटिमाते हैं, मगर है चाँदनी गायब,
*अन्धेरे में सही पथ पर हमें बढ़ना नहीं आता...

प्रणव दा ने अपनी गुगली से चिदम्बरम पर पगबाधा आउट की ज़बरदस्त अपील की हैं. अम्पायर फैसला बैट्समैन के हक में दे रहे हैं, हालाँकि सभी खिलाड़ी और दर्शक जानते है...

कभी यूँ भी तो हो दरिया का साहिल हो पूरे चाँद की रात हो और तुम आओ... परियों की महफ़िल हो कोई तुम्हारी बात हो और तुम आओ.. ये नर्म मुलायम ठंडी हवाएं जब ...

जब मेरे शब्द नाचने लगे थे तेरे इशारों पर
मेरी सांसें घबराने लगी थीं तेरी हरकतों पर
मेरी सुबह तय होने लगी थीं तेरे मुस्कुराने पर...

आओ हम तुम जम कर जीमें तुम भी खाओ,
हम भी खायें,बैठ एक पंक्ति में आओ
हम तुम जम कर जीमें जनता के पैसे ...

*क्यों है आज भी नारी को एक सुरक्षित जमीन **की तलाश ?
एक शाश्वत प्रश्न मुँह बाए खड़ा है *
*आज हमारे सामने ............
आखिर कब तक **ऐसा होगा ? ...

आज़ादी के महान योद्धा भगत सिंह की जयंती
27 सितम्बर ...

आम तौर पर लोग यह शिकायत करते हैं कि सरकार हिंदी के प्रति उपेक्षा का भाव रखती है लेकिन जो लोग इस तरह की चिंताएं जताया करते हैं उनमें से अक्सर खुद हिंदी के ...

बचपन में गाँव में जब भी कोई बीमार होता तो
*वैद्ध* को बुलाया जाता ।
दूर से आता था , इसलिए आने पर बच्चों को साथ में
दिखा दिया जाता । ...

उर में है यदि आग लक्ष्य की ।
पंथ स्वयं आयेगा ।
यही भाव से माँ शारदा की आराधना कर ।
मन पर इंगित भावों को व्यक्त कर ।
मन शांत एवं हल्का रखने के लिए लिखती हू...

आज बहुत देर हो जाने पर भी देव अपने कमरे से बाहर नहीं निकला था। एक लम्बे समय से उसके मन में एक तूफ़ान उठ रहा था। वो क्यूँ खुद को इतना लाचार समझ रहा था। क्या ...

हम उन दोस्तों में नहीं जो बौर्डर पर दोस्तों को छोड़ दूर से लुत्फ़ उठाते रहें. ऐसे में जिन दोस्तों ( eg. आशीष, शिवरंजन भारती ) को पिछले दिनों विवाह मंडप तक ...

अरे! यह तो दिल की श्रंखला शुरू हो गई...
पहले दिल टूट गया
'गीत' फिर 'ग़ज़ल' रोएंगें हज़ार बार
और अब 'इस दिल को तो आखिर टूटना ही था'
पढ़ने के लिए!!! सच! ..

अग़ज़ल - 25

ग़म को रू-ब-रू करके , ख़ुशी छुपा दी तूने.
मैंने पूछा था तुझसे अपनी वफा़ का हश्र
मेरी बात क्यों हँसी में उड़ा दी तूने ...

कुछ मौसम फीके से
अपने ही सरीखे से
तेरी मिठास भर गए फिर
तेरी आस भर गए!
वो ख़त तेरी तस्वीर से
अल्फाज़ जैसे तीर से
यूँ मुझ में बिखर गए
कि तेरी आस भर गए!!...

हेल्लो क्या आप तिहाड़ जेल से बोल रहे है ? "
.. "जी "....आपको एक सन्देश देना था *" माते "* का ..हाँ ..हाँ बोलो ..क्या है सन्देश ....................... य...

दावे पुख्ता यार के, वादे तोड़े खूब |
यादें हमको तोडती, वादे को महबूब |
वादे को महबूब, नजर में भरी हिकारत |
यादों में हम डूब, ...

*टोनी फ्रिज़ेल की एक उम्दा क्लिक* * * *मध्यांतर के बाद * * * एक मटकी जल में डूबती उतराती है अक्षत और दूब को दूध में भिगोकर किसी ने फूल विसर्जित किये हैं ...

कौन हूँ मैं , जानता खुद भी नहीं, पर जानता हूँ ,
मैं जलधि के ज्वार सा,
आवेग सा, आक्रोश सा हूँ / मैं कृषक का,
मैं श्रमिक का, मैं वणिक का, मैं लिपिक का..

एक दिन कबीर ने देखा की, एक बकरा रास्ते से मै-मै करता हुआ जा रहा था ! फिर एक दिन वह मर गया ! और किसी ने उसकी चमड़ी उतार कर तानपुरे के तार बना दिए ! तानपुरे

*हिंदी दिवस के बाद भी...* (अरुण चन्द्र रॉय ) अभी १४ सितम्बर के आसपास हिंदी, हिंदी दिवस, हिंदी की गिरती उठती अवस्था पर खूब चर्चा हो रही थी. ...

पिछले कुछ समय से अपनी उन व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त हो जाने के कारण जिनसे संयोगवश पहले अपने छोटे पुत्र के विवाह फिर मकान बदलने की प्रक्रिय...

*2जी लाइसेंस देने की प्रक्रिया की शुरुआत से लेकर अन्त तक दयानिधि मारन ने जितनी भी अनियमितताएं और मनमानी कीं उसमें प्रधानमंत्री की पूर्ण सहमति, जानकारी और म...

*भीड़ से घिरा हूँ* *फिर भी अकेला हूँ * *साथ में हंसता हूँ * *अकेले में रोता हूँ* *चुपचाप सहता हूँ * *निरंतर खुशी का * *दिखावा करता हूँ ...

*जितेन्द्र त्रिवेदी* अलबरनी के हवाले से मैं यह कहना चाहता हूँ कि आक्रांताओं के बारे में हमदर्दी दिख...

क्या आपको पता है कि आपके सिस्टम पर हर फाइल की डुप्लीकेट कॉपी बनती जाती है और हार्डडिस्क के किसी कोने मे स्टोर होती जाती है। गानो से लेकर फोटो ...

यहाँ कौन किसका साथ दे रहा है और क्यों ?

मेरे पिछले लेख़ में किसी ने टिप्पणी में कहा था कि जायज़ या ना जायज़ कुछ नहीं होता और उनकी इस टिप्पणी पे मुझे इस लेख़ कि प्रेरणा मिली. हम जिस समाज में रहते हैं वहां हर रोज़ कुछ ना कुछ घटता रहता है. इंसान एक सामाजिक प्राणी है और एक दूसरे से मिल जुल कर रहता है. ऐसे में कभी किसी का समर्थन करना कभी किसी के खिलाफ बोलना , कभी किसी पे पीछे चलना जैसी बातें देखी जाती रही हैं.
guidenceऐसा बहुत बार होता है कि किसी मुद्दे पे एक समूह तो समर्थन कर रहा होता है लेकिन दूसरा उसके खिलाफ बोल रहा होता है. धर्म कि बात करें तो दिखाई देता है कि महाभारत हुई और कुछ ने कौरवों का साथ दिया कुछ ने पांडवों का. कर्बला कि जंग हुई तो किसी ने इमाम हुसैन (अ.स) का साथ दिया और किसी ने ज़ालिम यजीद का. जब किसी धर्म को अपनाने कि बात आयी तो कोई हिन्दू बन गया कोई मुसलमान, कोई ईसाई तो कोई नास्तिक. आज के समय कि राजनीती कि बात करें तो कोई कांग्रेसी बना बिठा है, कोई बीजेपी वाला कोई सभी के पीछे चलने से इनकार कर रहा है.....

कालू गरीब हाजिर हो

खचाखच भरे न्यायालय में कालू को पेश होने की पुकार लगते ही अदालत में कोलाहल मच गया। कटघरे में कालू के खड़े होने के बाद, उसके खिलाफ़ आरोपों की सूची पढ़ी गयी। पहला आरोप था बत्तीस रूपये रोज से ज्यादा कमाने के बाद भी खुद को गरीब बताकर गरीबों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाना। दूसरा आरोप था, श्रीमती सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली नेशनल एडवाईजरी काउंसल के निर्णय को गलत ठहराना।

पुराने समय की बात है, चित्रकला सीखने के उद्देश्य से एक युवक, कलाचार्य गुरू के पास पहुँचा। गुरू उस समय कला- विद्या में पारंगत और सुप्रसिद्ध थे। ...

पति की अनुनय को धता, कुपित होय तत्काल |*
*बरछी - बोल कटार - गम, सहे चोट मन - ढाल ||...

त्रिवेणी पर ताँका पोस्ट की शुरुआत हम नन्ही हाइकुकारा सुप्रीत जो अभी 12 वर्ष की है , के लिखे पहले ताँका से करते हैं | आशा करते हैं कि आपको पढ़कर अच्छा लगेग...

रोज कई सवाल पूछता हैं, मुझसे रूठा सा रहता हैं. सुबह सुबह आईने में, एक शख्श रोज मिलता हैं. कहता हैं कुछ अपने गिले शिकवे. कुछ मेरी सुनता हैं. हसता हैं कभी मे...

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अन्त में यह दुखद समाचार
!

स्व. हिमांशु मोहन

हे विधाता !

हिमांशु मोहन जी के असामयिक देहावसान का समाचार विधि के
अन्याय के प्रति इतना क्षोभ उत्पन्न कर गया कि
ज्ञान, निस्सारता, तर्क आदि शब्द असह्य से प्रतीत होने लगे।
जीवन है, नहीं तो सब घटाटोप, अंधमय, शून्य, रिक्त, लुप्त।
सुख-दुख का द्वन्द्व तो सहन हो जाता है,
पर जीवन-मरण का द्वन्द्व तो छल है ईश्वर का,
सहसा सब निर्द्वन्द्व, सब निस्तेज, सब निष्प्रयोज्य, सब निरर्थक...
-0-0-0-
हिमांशु जी के देहावसान का समाचार पढ़कर मन उद्वेलित हो गया है!
मगर विधि के विधान के आगे सब मजबूर हो जाते हैं!
परमपिता परमात्मा उनकी आत्मा को सदगति दें
और शोकाकुल परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
उनको मैं अपनी और चर्चा मंच परिवार की ओर से
भानभीनी श्रद्धांजलि समर्पित करता हूँ!

30 comments:

  1. बेहतत्रीन चर्चा
    आपका बहुत बहुत आभार

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  2. बहुरंगी चर्चा और पढने के लिए बहुत सारे लिंक्स |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  3. बहुरंगी चर्चा और मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन लिंक .

    मन प्रसन्न .

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. चर्चा मंच पर मेरी पोस्ट की चर्चा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद
    सचमुच आज की चर्चा बहुत सुंदर और जानकारी से भरपूर है ।
    ..सारे links बहुत अच्छे लगे....
    आपका ये प्रयास बहुत ही सराहनीय है.....

    एयरटेल वालो के लिए खुशखबरी फ्री में देखे लाइव टीवी

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  6. श्रम - सीकर अनमोल है, चुका सकें न मोल |
    नत - मस्तक गुरुदेव है, सारा यह भू-गोल ||

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  7. बहुत अच्छे लिंक्स है इस चर्चा मंच पर
    जरुर इनको पढना चाहूंगी !
    मेरी रचना शामिल करने के लिये
    बहुत बहुत आभार आपका !

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  8. अधिक व्यस्तता के दौर में यह लगता है कि सीमित से समय में ब्लाग पढने में चयन में ही कितना समय लग जावेगा किन्तु लगता है कि सिर्फ चर्चा मंच को ही यदि प्रतिदिन एक बार देख लिया जावे तो समूचे ब्लाग जगत से जुडाव की न सिर्फ नियमितता बनी रह सकती है बल्कि इन चुनी हुई पोस्ट में से ही मनपसन्द पोस्ट तक न्यूनतम समय में पहुँचा जा सकता है ।
    आपको धन्यवाद मेरे पक्ष को भी इस माध्यम से बहुआयामी बनाने के लिये व मेरे इस शीर्षक को मंच की आज की पोस्ट का शीर्षक बनाने के लिये ।

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  9. हमेशा की तरह आज की चयनिका में भी आपकी और विद्याजी की मेहनत साफ़ झलकती है . हिमांशु मोहन जी के निधन का दुखद समाचार भी आज के चर्चा मंच से मिला .उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि हम सब की संवेदनाएं उनके शोक-संतप्त परिवार के साथ हैं .

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  10. बहुरंगी चर्चा और बहुत सारे लिंक्स |
    आपको धन्यवाद

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  11. Himanshu mohan ji ka nidhan bahut dukhad samachar hai...Ishvar se prarthana hai ki unki pavitr atma ko apni sharn me lekar unhe shanti pradan karen.
    Charcha manch har bar ki tarah is bar bhi behtareen links ke sath achchhi lagi.
    Poonam

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  12. बहुत अच्छा लिंक का संकलन | हर लिंक में जाना चाहुँगा | धन्यवाद शास्त्री जी |

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  13. बेहद जानदार चर्चा!! और खूबसूरत भी!!

    सज्जन अच्छे विचारों के प्रसार में इसी तरह योगदान करते है।

    बहुत बहुत आभार, शास्त्री जी!!

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  14. बहुत अच्चे लिंकस का संकलन... नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  15. सारे लिंक बहुत सुन्दर है , थोडा हिमांशु मोहन जी का देहासवान सुन के बुरा लगा , भगवान उनकी आत्मा शांति दें ...

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  16. बहुरंगी चर्चा
    मेरी अग़ज़ल को जगह देने के लिए आभार

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  17. अच्छे व स्तरीय सूत्र पढ़वाने को आभार, बस मन उदास है।

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  18. सारे लिंक बहुत सुन्दर है...
    चर्चा मंच पर त्रिवेणी की पोस्ट की चर्चा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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  19. बेहतरीन और सार्थक चर्चा ..

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  20. बेहतरीन और सार्थक चर्चा ..

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  21. महत्वपूर्ण चर्चा में मेरे ब्लॉग को भी शामिल करने का धन्यवाद.

    हिमांशु जी को श्रद्धांजलि.

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  22. घोर निराशा से भरा, कुम्हलाया है रूप |

    जिजिविषा प्रणम्य पर, मुखड़ा आज कुरूप|


    मुखड़ा आज कुरूप , सुबह से बहुत कचोटे |

    गुरुजन का अवसाद, बताता चेले खोटे |


    रविकर हों आश्वस्त, लिखे क्यूँ ऐसी भाषा ?

    देखा मुखड़ा-रूप, हुई है घोर निराशा ||

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  23. बहुत सुन्दर तरतीब से सजा है चर्चामंच ...और बहुत सार्थक और बेहतरीन चर्चाएँ... शास्त्री जी आपको सादर धन्यवाद इस सुन्दर चर्चा के लिए...हालाँकि मेरा आना देर से हुवा .... मेरी रचना को यहाँ स्थान मिला...पुनः आपका.आभार ..

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  24. अच्‍छी चर्चा। अच्‍छे पोस्‍ट।
    आभार.....

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  25. bahut bahut dhanywad aapne meri rachna ko yaha sthaan de kar sammanit kiya.

    links bahut acchhe the. kuchh hi links par ja payi kyuki aajkal power-cut ki samasya bahut hai.

    aabhar.

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  26. सुन्दर चर्चा। हिमांशु मोहन जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

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  27. सर , सबसे पहले मै माफ़ी चाहता हु की मै देर से यहाँ पर आ सका हु .." माता " के दर्शन के लिए ३ दिन से बहार गया हुवा था |
    " बहुत ही बढ़िया और रोचक चर्चा ..आपका बहुत बहुत सुक्रिया की आपने मेरी पोस्ट को यहाँ स्थान दिया .. | "

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  28. thanks a lot, Mayank ji for including my post...

    Team's dedication is appreciable..

    Pravin bhai ka latest post dekhkar man bahut udas ho gaya...

    ReplyDelete

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