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Tuesday, August 07, 2012

मंगलवारीय चर्चामंच (964)------- खाकी में इंसान

आज की मंगलवारीय  चर्चा में राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते ,सुप्रभात ,गुड मार्निंग |आप सब का दिन मंगलमय हो |अब घूमने चलते हैं आप सब के प्यारे प्यारे ब्लोग्स पर |
 पंकज सुबीर at सुबीर संवाद सेवा
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 by DR. ANWER JAMAL at Blog News
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सलाम! ख़ुर्शीद ख़ान! -डॉ. सुशील कुमार शुक्ल
मेरा फोटो
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 (पुरुषोत्तम पाण्डेय) at जाले -
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 मनोज कुमार at मनोज -
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 जाटदेवता संदीप पवाँर at जाट देवता का सफर - 5 
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पीड़ा मौन रही ( माहिया ) - *शशि पाधा ** ,**नार्थ 
रे बरगद ....!!! - उलझी निगाहें 
जिन्दगी,,,, - जिन्दगी... 
बिन दोस्ती - क्या होता शमा ये क्या बताऊँ यारों
"चल भ्रम उड़ जा " - अब शोर बीच यूँ कुछ तो बोलो


भगवान् राम की सहोदरा (बहन) : भगवती शांता परम-10 - सर्ग-3 भाग-1 भगिनी शांता *शान्ता के 
मुझे रश्क है .. - मुझे रश्क है .
******************** .......देश के अवाम की बेहतरी के लिए पर्याप्त 
आज तुम मेरे लिए हो
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किताबों की दुनिया -72posted by नीरज गोस्वामी at नीरज 
छोटे गाँ



 (प्रवीण पाण्डेय) at न दैन्यं न पलायनम् 
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अब अंत में मेरे ब्लॉग पर भी घूम आइये 
इसी के साथ आज की चर्चा समाप्त करती हूँ अगले मंगलवार फिर मिलूंगी इसी जगह तब तक के लिए बाय -बाय शुभविदा|

30 comments:

  1. सभी लिंक पठनीय है!
    बहुत अच्छी प्रस्तुति!

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    Replies
    1. कुछ लोगों की टिप्पणियाँ स्पैम में चली जाती हैं जिन्हें मैं यथासम्भव देखते ही प्रकाशित कर देता हूँ।
      अभी सुनीता जी का मेल आया है कि चर्चा मंच उनकी टिप्पणी नहीं ले रहा है।

      sunita opinions82@gmail.com
      7:47 am (4 घंटे पहले)

      मुझे
      मेरी टिप्पणी पता नहीं क्यों चर्चा मंच ले नहीं रहा है...
      सादर...!
      सुनीता जी !
      आप टिप्पणी तो दीजिए। बाकी हम देख लेंगें कि टिप्पणी कहाँ जाती हैं?

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  2. मिली नहीं रोटी दो जून की
    मनोज कुमार at मनोज -



    पांचो वक्त नमाज के, आरत सुबहो-शाम |
    न रहीम से रोटियां, न ही देते राम |
    न ही देते राम, भूख से व्याकुल काया |
    हो जाती है शाम, चाँद पर नून धराया |
    जरा चढ़ा जो मांस, घूरते जालिम कैसे |
    पाय अध-जली लाश, घाट पर कुक्कुर जैसे ||

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  3. SADA
    चुटकी का बजना सार्थक होता है !!! - नियमों में बंधकर

    बहुत सुन्दर भाव-
    बधाई ||
    एक विचार आया ||

    उड़ा चुटकियों पर रहा, चालू चुटकी बाज |
    करूँ चुटकियों में ख़तम, तेरी यह आवाज |
    तेरी यह आवाज, चुटकना चुटकी भरना |
    समझौते का साज, तोड़ के व्यर्थ अकड़ना |
    है मेरा यह स्नेह, गेह रूपी यह नौका |
    खेती बिन संदेह, कहो जब दूँगी चौका |

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  4. "ग़ज़ल-खेल समय का बहुत अजब" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

    पहली बार -
    क्षमा करियेगा गुरु जी -
    इस नादान शिष्य की यह गुस्ताखी ||

    अजब-गजब अंदाज है, दिल तो है बेचैन |
    चैन सजा के होंठ पर, सजा सजा सा सैन |
    सजा सजा सा सैन, कहाँ रक्खी बत्तीसी |
    हास्य-व्यंग पर कसक, कसक निकलेगी खीसी |
    माना उम्रदराज, देह घेरे बीमारी |
    फिर भी करिए नाज, अभी भी बची खुमारी ||

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  5. काव्यान्जलि ...
    जिन्दगी,,,, - जिन्दगी...

    जियो जिन्दगी धीर धर, नीति-नियम से युक्त |
    परहितकारी कर्म शुभ, हंसों ठठा उन्मुक्त ||

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    Replies
    1. बहुत सुंदर !
      रंग भरिये खुद जिंदगी में और देखिये जिंदगी के रंग उसके साथ वो कैसे भरती है !

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  6. Albelakhatri.com
    मित्रता दिवस को समर्पित छह

    शुभकामनायें-
    मित्रवर ||

    फ्रेंड बड़ा सा शिप लिए, रहे सुरक्षित खेय |
    चलें नहीं पर शीप सा, यही ट्रेंड है गेय |
    यही ट्रेंड है गेय, बिलासी बुद्धि नाखुश |
    गलत राह पर जाय, लगाए रविकर अंकुश |
    दुःख सुख का नित साथ, संयमित स्नेही भाषा |
    एक जान दो देह, यही है फ्रेंड-पिपासा ||

    टाँय-टाँय फिस फ्रेड शिप, टैटेनिक दो टूक |
    अहम्-शिला से बर्फ की, टकराए हो चूक |
    टकराए हो चूक, हूक हिरदय में उठती |
    रह जाये गर मूक, सदा मन ही मन कुढती |
    इसीलिए हों रोज, सभी विषयों पर चर्चे |
    गलती अपनी खोज, गाँठ पड़ जाय अगरचे ||

    मित्र सेक्स विपरीत गर, रखो हमेशा ख्याल |
    बनों भेड़िया न कभी, नहीं बनो वह व्याल |
    नहीं बनो वह व्याल, जहर-जीवन का पी लो |
    हो अटूट विश्वास, मित्र बन जीवन जी लो |
    एक घरी का स्वार्थ, घरौंदा नहीं उजाड़ो |
    बृहन्नला बन पार्थ, वहां मौका मत ताड़ो ||

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  7. खरी-खरी
    अन्ना की "हिंद स्वराज पार्टी" कांग्रेस की बी टीम - *किशन


    राहुल की खातिर करे, रस्ता अन्ना टीम ।
    टीम-टाम होता ख़तम, जागे नीम हकीम ।

    जागे नीम-हकीम, दवा भ्रष्टों को दे दी ।
    पॉलिटिक्स की थीम, जलाए लंका भेदी ।

    ग्यारह प्रतिशत वोट, काट कर अन्ना शातिर ।
    एन डी ए को चोट, लगाएं राहुल खातिर ।।



    राष्ट्र कार्य करने चले, किन्तु मृत्यु भय साथ |
    लगा नहीं सकते गले, फिर ओखल क्यूँ माथ ?

    फिर ओखल क्यूँ माथ, माथ पर हम बैठाए |
    देते पूरा साथ, हाथ हर समय बढाए |

    आन्दोलन की मौत, निराशा घर घर छाई |
    लोकपाल की करें, आज सब पूर्ण विदाई ||

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  8. बड़ा अनूठा खेला है

    (प्रवीण पाण्डेय) at न दैन्यं न पलायनम् -
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    क्या प्रवाह क्या भाव अनोखे, क्या शब्दों का मेला है |
    करूँ कहे मन, दिल न माने, सचमुच बड़ा झमेला है |
    बूंद लम्बवत चली तरंगे, रिमझिम रिमझिम रेला है |
    चले जिन्दगी इसी तरह से, रविकर ठेलिम-ठेला है ||

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  9. अब अंत में मेरे ब्लॉग (Rajesh Kumari) पर भी घूम आइये
    खाकी में इंसान


    खाकी के प्रति नजरिया, सकते बदल अशोक |
    शोक हरें निर्बलों का, दें दुष्टों को ठोक |
    दें दुष्टों को ठोक, नोक पर इक चाक़ू के |
    हरें शील, धन, स्वर्ण, हमेशा खाकी चूके |
    सज्जन में भय व्याप्त, बढे दुर्जन की ताकत |
    पुलिस सुधर गर जाय, मिले रविकर को राहत |

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  10. बहुत सुन्दर links
    बधाई ||

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  11. चर्चा मंच में मुझे भी शामिल करने केलिए हार्दिक धन्यवाद.

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  12. बहुत अच्छी प्रस्तुति!

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  13. शास्त्री जी की पोस्ट पर,,,,

    दिल ने जब मान लिया,आ ही गया बुढापा
    गले में कंठी हाथ माला,शुरू करे अब जापा,,,,,,

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  14. सुंदर लिंक्स के साथ सार्थक रचना | मेरी रचना को शामिल करने के लिए आभार |

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  15. rajesh ji hardikaabhar charcha manch me meri rachna shamil ki ........aur sare links bhi kafi achhe hain jinme kuchh padh payi hun kuchh chhut gaye hain......

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  16. बिजली विभाग वाले
    लगता है बहुत हैं नाराज
    कुछ तो वैसे ही कट रही है
    बाकी वो दे रहे हैं काट !!!

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  17. अच्छा संकलन, धन्यवाद

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  18. बहुत सुंदर समीक्षा की है। हर सिक्के के दो पहलू हैं । और दोनो खोटे नहीं होते हैं !

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  19. रविकर जी की पोस्ट पर,,,,

    कुण्डलियों में बाँधा समा,मुख पर चैन लगाय
    रविकरजी है टीपते,पढकर सबका मन भरमाय,,,,,

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  20. अलबेला जी की पोस्ट पर,,,,

    दोस्ती ऐसी हो सदा,जो अपने मन को भाय
    कष्ट पड़े में दुःख हरे, सुख में साथ निभाय,,,,

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  21. बड़ा अनूठा खेला है

    (प्रवीण पाण्डेय) at न दैन्यं न पलायनम् -
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    बहुत खूब !

    ReplyDelete
  22. राजेश कुमारी जी के लिए,,

    मेरी रचना"जिंदगी",मंच में दिया स्थान
    आभारी हूँ आपका,जो मेरा रक्खा ध्यान,,,,

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  23. तुम्हें सलाम! सलाम तुम्हें!
    बार-बार सलाम!
    ख़ुर्शीद ख़ान!

    हमारा भी ले लो सलाम !

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  24. सभी लिंक पठनीय है

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  25. आप सब मित्रों का हार्दिक आभार

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  26. आ0 राजेश कुमारी जी
    आप का प्रयास सराहनीय है मेरी रचना को शामिल करने हेतु साधुवाद
    अच्छा होता कि कुछ रचनाओं के गुण-दोष पर चर्चा
    भी हो जाती
    सादर
    आनन्द.पाठक

    ReplyDelete

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