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Wednesday, August 08, 2012

ईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर : चर्चा मंच 965

(0)

 छपते-छापते 

यादों की इस बारिश में .....

Dr (Miss) Sharad Singh
Sharad Singh  

  1

दो दो हरिणी हारती, हरियाणा में दांव -रविकर

भारतीय नारी

शठ शोषक सुख-शांत से, पर पोषक गमगीन |
आखिर तुझको क्या मिला, स्वयं जिन्दगी छीन |
स्वयं जिन्दगी छीन, खून के आंसू रोते |
देखो घर की सीन, हितैषी धीरज खोते |

दोषी रहे दहाड़, दहाड़ें माता मारे |
ले कानूनी आड़, बचें अपराधी सारे ||
  Former air hostess kills herself; Haryana minister booked for abetment to suicide

2

विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी

रचना ईश्वर ने रची, तन मन मति अति-भिन्न |
प्राकृत के विपरीत गर, करे खिन्न खुद खिन्न |
करे खिन्न खुद खिन्न, व्यवस्था खुद से करता |
करे भरे वह स्वयं, बुढापा बड़ा अखरता  |
नाड़ी में है ताब, आबरू की क्या चिंता |
अंत घड़ी जब पास, शुरू की गलती गिनता ||

3

खुदा की इबादत क्यों करना ?

कुछ जुगाड़ कर दो प्रभू, होवे बेडा पार |
नेता से मंत्री बनू, पैदल को दे कार |
पैदल को दे कार, खजाना सदा बढ़ाना |
कर दे मेरा काम, चढ़ावा पूरा माना |
ढकोसले ये छोड़, नित्य आभार प्रगट कर |
पाया प्रभू अपार, स्वार्थ अब छोडो रविकर ||

4

ईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर

नई पार्टी बन रही, हुवे पुराने फेल |
अन्ना से चालू करें, राजनीति का खेल |

राजनीति का खेल, समर्पण पूर्ण चाहिए |
सच्चा खरा इमान, प्रमाणित किये आइये |

एफ़ी-डेविट आज, कराकर ले आया हूँ |
दो सौ रुपये खर्च, कष्ट से भर-पाया हूँ ||

5
My Image

6

  7

यमुनानगर के ब्‍लॉगरों ने बनाई पहचान 

नुक्कड़...


  8

कन्हैया

Sadhana Vaid
Unmanaa  









17-अ 

"रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')




  17-ब

"मधुर रक्त को, कौन राक्षस चाट रहा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का एक गीत)


आज देश में उथल-पुथल क्यों,
क्यों हैं भारतवासी आरत?
कहाँ खो गया रामराज्य,
और गाँधी के सपनों का भारत?

18

भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

ram ram bhai



19

पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा

Maheshwari kaneri 

वक्त वक्त की बात है, बढ़िया था वह दौर |
समय बदलता जा रहा, कुछ बदलेगा और |
कुछ बदलेगा और, आग से राख हुई जो |
पानी धूप बयार, प्यार से तनिक छुई जो  |
मिट जायेगा दर्द, सर्द सी सिसकारी में |
ढक जाएगा गर्द, और फिर लाचारी में |


20

पंडित श्री लालकृष्ण आडवाणी!!

अड़-डंडा झुकता गया,  अड़-वाणी की नाव ।
हिचकोले खाने लगी, ठगी खड़ी इस गाँव ।
ठगी खड़ी इस गाँव, *अड़डपोपो अड़ियल की |
पी एम् होगा वहीँ , पार्टी जो मरियल सी |
*शुभाशुभ बताने वाला |
कांग्रेस दो अंक, किन्तु चुप्पी भाजप पर  |
पाए ना दो सीट, आस अन्ना की बेहतर ||

45 comments:

  1. रविकर जी अच्छी चर्चा है और बहुत से लिंक्स पढने के लिए
    जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

    ReplyDelete
  2. बड़ी आंत के सबसे लम्बे भाग (बृहद अंत्र यानी कोलन ) और मलद्वार दोनों से ताल्लुक रखने वाले कोलोरेक्टल-कैंसर के सर्वाधिक मामले इंग्लैण्ड में है जिसकी बड़ी वजह वहां रेड मीट का ज्यादा सेवन बना हुआ है . सींक कबाब ,शामी कबाब लज़ीज़ है लेकिन किस कीमत पर ?

    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    ReplyDelete
  3. बहुत सुन्दर चर्चा!
    आभार रविकर जी आपका!

    ReplyDelete
  4. आखिर अपने गिरहबान में झाँकने में और उसे जनता (ब्लॉग )के सामने रखने में हर्ज़ क्या है पार्टी नींद से तो जागे खुश फ़हम कब तक बनी रहे .जबकि लालू जैसे छद्म सेकुलर घात लगाए बैठें हैं .इसमें पंडताई कहाँ से आ गई कयास तो सभी लगातें हैं .बिंदास बोले तो सही कोई .जो भी कुछ कहा है सोच समझ के कहा है .
    20
    पंडित श्री लालकृष्ण आडवाणी!!
    Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA -


    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर चर्चा! और बहुत से लिंक्स पढने के लिए
    जन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
    अन्ना टीम: वहीँ नज़र आएगी

    ReplyDelete
  6. वेदना और करुणा घोल दीं हैं आपने कविता में .मानसिक अवरोध न आये बस ,फिर जो आये सो आये ..हौसले से जिए हारता हौसला है आदमी कभी हारा है .
    19
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
    Maheshwari kaneri
    अभिव्यंजना

    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    ReplyDelete
  7. राष्ट्र भावना से पल्लवित गीत जिसे आज लालू ब्रांड सेकुलर पलीता लगा रहें हैं .संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए लालुओं से ...
    17-ब
    "मधुर रक्त को, कौन राक्षस चाट रहा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का एक गीत)
    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

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  8. हेवी रैन शावर पर,आकस्मिक एकाएक मूसलाधार वर्षा पर संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली प्रस्तुति .
    15
    क्या होता है बादल फटना ?
    DR. ANWER JAMAL
    Blog News
    ram ram bhai

    मंगलवार, 7 अगस्त 2012

    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से

    ReplyDelete
  9. सुन्दर चर्चा.

    ReplyDelete
  10. ईश्वर द्वारा बताए गए नियमों के अनुसार दुनिया में व्यवहार करना ही सच्ची दीनदारी है .
    सुन्दर चर्चा के लिए शुक्रिया.

    I have read "भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से"

    आनन्द आ गया .

    ReplyDelete
  11. बहुत ही रोचक और पठनीय सूत्र..

    ReplyDelete
  12. (0)
    छपते-छापते
    यादों और ख्वाबों की
    बारिश हो गयी सुंदर !

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    Replies
    1. तन-मन को अच्छी लगें, यादों की बरसात।
      दिन ढलने के बाद ही, आ जाती है रात।।

      Delete
  13. 1
    दो दो हरिणी हारती, हरियाणा में दांव -रविकर
    भारतीय नारी

    सटीक!

    ReplyDelete
  14. अच्छे लिंक्स !
    आभार !

    ReplyDelete
  15. लिंक - ०

    खूबशूरत है जिंदगी ख़्वाब की तरह
    जाने कब टूट जाए कांच की तरह
    मुझे न भूलना किसी बात की तरह
    दिल में रखना मीठी याद की तरह,,,,,

    ReplyDelete
  16. विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी
    'DR. ANWER JAMAL',
    'कांग्रेसी नेता एन. डी. तिवारी और उज्जवला'

    इन ‘कुछ‘ लोगों के कारण पूरे समाज की सही-ग़लत की तमीज़ को विकृत नहीं किया जा सकता।

    आज के समाज के लिये हर पहलू पर यही लागू कीजिये फिर देखिये घोड़े कैसे भागते हैं !

    ReplyDelete
  17. लिंक - १०

    बच्चों की भोली सूरत में,बसते है भगवान
    उनके भावो को समझते नही,हम नादाँ इंसान,,

    ReplyDelete
  18. 3
    खुदा की इबादत क्यों करना ?
    Hindi Topics...

    मगर हम भूल जाते हैं
    गौड दिखा नहीं कहीं
    माँगना शुरू हो जाते हैं !!

    ReplyDelete
  19. लिंक - १२

    मीट-मटन को त्याग कर,खायें शब्जी करे फलाहार
    भय मुक्त हमेशा रहेगा जीवन,आये न कोई विकार,,,,,

    ReplyDelete
  20. 4
    ईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर

    कुछ अन्ना वहाँ हैं
    कुछ अन्ना यहाँ है
    बाकी अन्ना पता नहीं
    कहाँ कहाँ हैं ?

    ReplyDelete
  21. लिंक - १३

    होड इतनी भरी दिलों में,शक्तिमान बनने को इंसान
    ऐसा दिन भी आएगा जब,श्मशान करेगा ये विज्ञान

    ReplyDelete
  22. आभारी हूँ रविकर जी आपने 'उन्मना' से मेरी माँ की रचना 'कन्हैया' को आज के चर्चामंच में सम्मिलित किया ! शेष अन्य सूत्र भी सुन्दर व पठनीय हैं ! सधन्यवाद !

    ReplyDelete
  23. बहुत सुंदर !!

    19
    पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
    Maheshwari kaneri
    अभिव्यंजना

    बहुत सुंदर !!

    ये नामुराद वक्त भी
    पता नहीं
    क्या क्या करवायेगा
    वैसे आदमी का वक्त है
    आदमी ही की तरह
    तो पेश आयेगा !

    ReplyDelete
  24. 18
    भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
    ram ram bhai

    बहुत खूबसूरती से समझाया है जनाब ने !

    ReplyDelete
  25. बधाई हो रविकर जी, जो इतने में लायर को मना लिया,
    दो सौ रूपये देकर ही ईमानदारी का एफीडेविट पा लिया !
    मैं भी झख मार रहा हूँ इसे पाने को, आप तो बस अब ऐश करो,
    मेरा वकील कहता है दस्तखत हेतु दो ईमानदार गवाह पेश करो !
    पाँव में छाले पड़ गए , जब से शुरू हुए ये एफीडेविट के सिलसिले,
    शहर कचहरी सब छान मारे हैं, मगर दो ईमानदार गवाह नहीं मिले !

    ReplyDelete
  26. लिंक - १७-अ

    मूछें हो नत्थूलाल सी, वो कहलाये मर्द
    बिन मूछों के मर्द का,चेहरा दिखता जर्द,

    ReplyDelete
  27. 17-अ
    "रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
    उच्चारण
    मूँछें बहुत सुंदर हैं !

    ReplyDelete
  28. लिंक - १९

    वक्त बदल रहा तेजी से,फिर न लौट के आएगा
    जो भी पैदा हुआ यहाँ,एक दिन वो मिट जाएगा,,,

    ReplyDelete
  29. 17-अ
    "रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
    उच्चारण
    बहुत सुंदर भाव !

    हम खुद ही अब राक्षस हो गये हैं
    पडो़सी के घर में राक्षस ढूँड रहे हैं !!

    ReplyDelete
  30. मुई बिजली फिर चली गयी
    लालटेन जला लो कह गयी
    शाम को अगर आ जायेगी
    टिप्पणी भी तभी की जायेगी !!



    7
    यमुनानगर के ब्‍लॉगरों ने बनाई पहचान
    नुक्कड़...

    बना रहे हैं बनाने वाले बहुत कुछ
    पका रहे हैं पकाने वाले बहुत कुछ
    खाने वाले नहीं पर आ रहे हैं
    खाना देख तो रहे हैं पर नहीं
    कुछ भी खा रहे हैं नक्शे दिखा रहे हैं !!
    अविनाश वाचस्पति

    ReplyDelete
  31. लिंक - ४

    नामुमकिन लगता है,अन्ना का ये खेल
    डिब्बे वही जुड जायेगें, चले पुरानी रेल,,,,,

    ReplyDelete
    Replies
    1. कब तक बीनोंगे इसे, पूरी काली दाल।
      बिस्तर बाँध निकल गये, अन्ना जी तत्काल।।

      Delete
  32. बहुत सुन्दर चर्चा पठनीय सूत्र

    ReplyDelete
  33. बहुत सुन्दर चर्चा.. मेरी रचना को मान देने केलिए...रविकर जी आप का अभार

    ReplyDelete
  34. golu ki drowing dekhkar,yamunanagar ke bloggers se milkar ,vani ji ki kavita aur maheshwari ji ki vedna padhkar accha laga aur bhi links padh rahi hu aabhar

    ReplyDelete
  35. मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
    बहुत ही प्रभावशाली, सतरंगी और सार्थक चर्चा है आज की .....

    ReplyDelete
  36. व्यस्तताओं के कारण इन दिनों पूरी तरह सक्रिय नहीं हूं। ऐसे में इन रेडीमेड लिंकों का ही सहारा है।

    ReplyDelete
  37. बहुत बढिया चर्चा
    क्या बात

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  38. लिंक-1

    हरियाणा में लुट गई, बालाओं की लाज।
    राजनीति की चाल में, बन्धक आज समाज।।

    ReplyDelete
  39. लिंक-8
    योगिराज के नाम का, मनवा करले जाप।
    इक दिन धुल ही जायेंगे, मन के सारे पाप।।

    ReplyDelete
  40. लिंक-10
    चित्र देखकर आ गई, बालकपन की याद।
    लौट रहा फिर बचपना, अब पचपन के बाद।।

    ReplyDelete
  41. सुंदर चर्चा... सार्थक लिंक्स...
    सादर आभार।

    ReplyDelete
  42. बहुत बढिया चर्चा
    सार्थक लिंक्स

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