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छपते-छापते
यादों की इस बारिश में .....
Sharad Singh
1दो दो हरिणी हारती, हरियाणा में दांव -रविकरभारतीय नारी
शठ शोषक सुख-शांत से, पर पोषक गमगीन |
आखिर तुझको क्या मिला, स्वयं जिन्दगी छीन | स्वयं जिन्दगी छीन, खून के आंसू रोते | देखो घर की सीन, हितैषी धीरज खोते |
दोषी रहे दहाड़, दहाड़ें माता मारे |
ले कानूनी आड़, बचें अपराधी सारे ||
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2विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी
रचना ईश्वर ने रची, तन मन मति अति-भिन्न |
प्राकृत के विपरीत गर, करे खिन्न खुद खिन्न | करे खिन्न खुद खिन्न, व्यवस्था खुद से करता | करे भरे वह स्वयं, बुढापा बड़ा अखरता | नाड़ी में है ताब, आबरू की क्या चिंता | अंत घड़ी जब पास, शुरू की गलती गिनता || |
3खुदा की इबादत क्यों करना ?
कुछ जुगाड़ कर दो प्रभू, होवे बेडा पार |
नेता से मंत्री बनू, पैदल को दे कार | पैदल को दे कार, खजाना सदा बढ़ाना | कर दे मेरा काम, चढ़ावा पूरा माना | ढकोसले ये छोड़, नित्य आभार प्रगट कर | पाया प्रभू अपार, स्वार्थ अब छोडो रविकर || |
4ईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर
नई पार्टी बन रही, हुवे पुराने फेल |
अन्ना से चालू करें, राजनीति का खेल | राजनीति का खेल, समर्पण पूर्ण चाहिए | सच्चा खरा इमान, प्रमाणित किये आइये | एफ़ी-डेविट आज, कराकर ले आया हूँ | दो सौ रुपये खर्च, कष्ट से भर-पाया हूँ || |
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7यमुनानगर के ब्लॉगरों ने बनाई पहचाननुक्कड़... |
17-अ"रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')17-ब"मधुर रक्त को, कौन राक्षस चाट रहा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का एक गीत) आज देश में उथल-पुथल क्यों,
क्यों हैं भारतवासी आरत?
कहाँ खो गया रामराज्य,
और गाँधी के सपनों का भारत? |
18भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ सेram ram bhai |
19पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
Maheshwari kaneri
वक्त वक्त की बात है, बढ़िया था वह दौर | समय बदलता जा रहा, कुछ बदलेगा और | कुछ बदलेगा और, आग से राख हुई जो | पानी धूप बयार, प्यार से तनिक छुई जो | मिट जायेगा दर्द, सर्द सी सिसकारी में | ढक जाएगा गर्द, और फिर लाचारी में | |
20पंडित श्री लालकृष्ण आडवाणी!!
अड़-डंडा झुकता गया, अड़-वाणी की नाव ।
हिचकोले खाने लगी, ठगी खड़ी इस गाँव ।
ठगी खड़ी इस गाँव, *अड़डपोपो अड़ियल की |
पी एम् होगा वहीँ , पार्टी जो मरियल सी |
*शुभाशुभ बताने वाला |
कांग्रेस दो अंक, किन्तु चुप्पी भाजप पर | पाए ना दो सीट, आस अन्ना की बेहतर || |



रविकर जी अच्छी चर्चा है और बहुत से लिंक्स पढने के लिए
ReplyDeleteजन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
आशा
बड़ी आंत के सबसे लम्बे भाग (बृहद अंत्र यानी कोलन ) और मलद्वार दोनों से ताल्लुक रखने वाले कोलोरेक्टल-कैंसर के सर्वाधिक मामले इंग्लैण्ड में है जिसकी बड़ी वजह वहां रेड मीट का ज्यादा सेवन बना हुआ है . सींक कबाब ,शामी कबाब लज़ीज़ है लेकिन किस कीमत पर ?
ReplyDeleteram ram bhai
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
बहुत सुन्दर चर्चा!
ReplyDeleteआभार रविकर जी आपका!
आखिर अपने गिरहबान में झाँकने में और उसे जनता (ब्लॉग )के सामने रखने में हर्ज़ क्या है पार्टी नींद से तो जागे खुश फ़हम कब तक बनी रहे .जबकि लालू जैसे छद्म सेकुलर घात लगाए बैठें हैं .इसमें पंडताई कहाँ से आ गई कयास तो सभी लगातें हैं .बिंदास बोले तो सही कोई .जो भी कुछ कहा है सोच समझ के कहा है .
ReplyDelete20
पंडित श्री लालकृष्ण आडवाणी!!
Cartoon, Hindi Cartoon, Indian Cartoon, Cartoon on Indian Politcs: BAMULAHIJA -
ram ram bhai
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
बहुत सुन्दर चर्चा! और बहुत से लिंक्स पढने के लिए
ReplyDeleteजन्म अष्टमी पर शुभकामनाएं |
अन्ना टीम: वहीँ नज़र आएगी
वेदना और करुणा घोल दीं हैं आपने कविता में .मानसिक अवरोध न आये बस ,फिर जो आये सो आये ..हौसले से जिए हारता हौसला है आदमी कभी हारा है .
ReplyDelete19
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
Maheshwari kaneri
अभिव्यंजना
ram ram bhai
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
राष्ट्र भावना से पल्लवित गीत जिसे आज लालू ब्रांड सेकुलर पलीता लगा रहें हैं .संभल के रहना अपने घर में छिपे हुए लालुओं से ...
ReplyDelete17-ब
"मधुर रक्त को, कौन राक्षस चाट रहा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' का एक गीत)
ram ram bhai
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
हेवी रैन शावर पर,आकस्मिक एकाएक मूसलाधार वर्षा पर संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली प्रस्तुति .
ReplyDelete15
क्या होता है बादल फटना ?
DR. ANWER JAMAL
Blog News
ram ram bhai
मंगलवार, 7 अगस्त 2012
भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
सुन्दर चर्चा.
ReplyDeleteईश्वर द्वारा बताए गए नियमों के अनुसार दुनिया में व्यवहार करना ही सच्ची दीनदारी है .
ReplyDeleteसुन्दर चर्चा के लिए शुक्रिया.
I have read "भौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से"
आनन्द आ गया .
बहुत ही रोचक और पठनीय सूत्र..
ReplyDelete(0)
ReplyDeleteछपते-छापते
यादों और ख्वाबों की
बारिश हो गयी सुंदर !
तन-मन को अच्छी लगें, यादों की बरसात।
Deleteदिन ढलने के बाद ही, आ जाती है रात।।
1
ReplyDeleteदो दो हरिणी हारती, हरियाणा में दांव -रविकर
भारतीय नारी
सटीक!
अच्छे लिंक्स !
ReplyDeleteआभार !
लिंक - ०
ReplyDeleteखूबशूरत है जिंदगी ख़्वाब की तरह
जाने कब टूट जाए कांच की तरह
मुझे न भूलना किसी बात की तरह
दिल में रखना मीठी याद की तरह,,,,,
विवाह पूर्व यौन सम्बंध की त्रासदी
ReplyDelete'DR. ANWER JAMAL',
'कांग्रेसी नेता एन. डी. तिवारी और उज्जवला'
इन ‘कुछ‘ लोगों के कारण पूरे समाज की सही-ग़लत की तमीज़ को विकृत नहीं किया जा सकता।
आज के समाज के लिये हर पहलू पर यही लागू कीजिये फिर देखिये घोड़े कैसे भागते हैं !
लिंक - १०
ReplyDeleteबच्चों की भोली सूरत में,बसते है भगवान
उनके भावो को समझते नही,हम नादाँ इंसान,,
3
ReplyDeleteखुदा की इबादत क्यों करना ?
Hindi Topics...
मगर हम भूल जाते हैं
गौड दिखा नहीं कहीं
माँगना शुरू हो जाते हैं !!
लिंक - १२
ReplyDeleteमीट-मटन को त्याग कर,खायें शब्जी करे फलाहार
भय मुक्त हमेशा रहेगा जीवन,आये न कोई विकार,,,,,
4
ReplyDeleteईमानदारी का एफ़ी-डेविट:अन्नापार्टी -रविकर
कुछ अन्ना वहाँ हैं
कुछ अन्ना यहाँ है
बाकी अन्ना पता नहीं
कहाँ कहाँ हैं ?
लिंक - १३
ReplyDeleteहोड इतनी भरी दिलों में,शक्तिमान बनने को इंसान
ऐसा दिन भी आएगा जब,श्मशान करेगा ये विज्ञान
आभारी हूँ रविकर जी आपने 'उन्मना' से मेरी माँ की रचना 'कन्हैया' को आज के चर्चामंच में सम्मिलित किया ! शेष अन्य सूत्र भी सुन्दर व पठनीय हैं ! सधन्यवाद !
ReplyDeleteबहुत सुंदर !!
ReplyDelete19
पता न था वक्त ऐसे बदल जाएगा
Maheshwari kaneri
अभिव्यंजना
बहुत सुंदर !!
ये नामुराद वक्त भी
पता नहीं
क्या क्या करवायेगा
वैसे आदमी का वक्त है
आदमी ही की तरह
तो पेश आयेगा !
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ReplyDeleteभौतिक और भावजगत(मनो -शरीर ) की सेहत भी जुडी है आपकी रीढ़ से
ram ram bhai
बहुत खूबसूरती से समझाया है जनाब ने !
बधाई हो रविकर जी, जो इतने में लायर को मना लिया,
ReplyDeleteदो सौ रूपये देकर ही ईमानदारी का एफीडेविट पा लिया !
मैं भी झख मार रहा हूँ इसे पाने को, आप तो बस अब ऐश करो,
मेरा वकील कहता है दस्तखत हेतु दो ईमानदार गवाह पेश करो !
पाँव में छाले पड़ गए , जब से शुरू हुए ये एफीडेविट के सिलसिले,
शहर कचहरी सब छान मारे हैं, मगर दो ईमानदार गवाह नहीं मिले !
लिंक - १७-अ
ReplyDeleteमूछें हो नत्थूलाल सी, वो कहलाये मर्द
बिन मूछों के मर्द का,चेहरा दिखता जर्द,
17-अ
ReplyDelete"रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
उच्चारण
मूँछें बहुत सुंदर हैं !
लिंक - १९
ReplyDeleteवक्त बदल रहा तेजी से,फिर न लौट के आएगा
जो भी पैदा हुआ यहाँ,एक दिन वो मिट जाएगा,,,
17-अ
ReplyDelete"रक्खो मूछ सँवार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
उच्चारण
बहुत सुंदर भाव !
हम खुद ही अब राक्षस हो गये हैं
पडो़सी के घर में राक्षस ढूँड रहे हैं !!
मुई बिजली फिर चली गयी
ReplyDeleteलालटेन जला लो कह गयी
शाम को अगर आ जायेगी
टिप्पणी भी तभी की जायेगी !!
7
यमुनानगर के ब्लॉगरों ने बनाई पहचान
नुक्कड़...
बना रहे हैं बनाने वाले बहुत कुछ
पका रहे हैं पकाने वाले बहुत कुछ
खाने वाले नहीं पर आ रहे हैं
खाना देख तो रहे हैं पर नहीं
कुछ भी खा रहे हैं नक्शे दिखा रहे हैं !!
अविनाश वाचस्पति
लिंक - ४
ReplyDeleteनामुमकिन लगता है,अन्ना का ये खेल
डिब्बे वही जुड जायेगें, चले पुरानी रेल,,,,,
कब तक बीनोंगे इसे, पूरी काली दाल।
Deleteबिस्तर बाँध निकल गये, अन्ना जी तत्काल।।
बहुत सुन्दर चर्चा पठनीय सूत्र
ReplyDeleteबहुत सुन्दर चर्चा.. मेरी रचना को मान देने केलिए...रविकर जी आप का अभार
ReplyDeletegolu ki drowing dekhkar,yamunanagar ke bloggers se milkar ,vani ji ki kavita aur maheshwari ji ki vedna padhkar accha laga aur bhi links padh rahi hu aabhar
ReplyDeleteमेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हार्दिक धन्यवाद!
ReplyDeleteबहुत ही प्रभावशाली, सतरंगी और सार्थक चर्चा है आज की .....
व्यस्तताओं के कारण इन दिनों पूरी तरह सक्रिय नहीं हूं। ऐसे में इन रेडीमेड लिंकों का ही सहारा है।
ReplyDeleteबहुत बढिया चर्चा
ReplyDeleteक्या बात
good job.
ReplyDeleteलिंक-1
ReplyDeleteहरियाणा में लुट गई, बालाओं की लाज।
राजनीति की चाल में, बन्धक आज समाज।।
लिंक-8
ReplyDeleteयोगिराज के नाम का, मनवा करले जाप।
इक दिन धुल ही जायेंगे, मन के सारे पाप।।
लिंक-10
ReplyDeleteचित्र देखकर आ गई, बालकपन की याद।
लौट रहा फिर बचपना, अब पचपन के बाद।।
सुंदर चर्चा... सार्थक लिंक्स...
ReplyDeleteसादर आभार।
बहुत बढिया चर्चा
ReplyDeleteसार्थक लिंक्स