Friday, December 07, 2018

"भवसागर भयभीत हो गया" (चर्चा अंक-3178)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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दिल में दीवारें लकड़ी की 

सड़क पर पहुँचने के लिये  
पगडंडी छोड़नी पड़ी  
पेड़ ,नदी, नाले और खेतों में फूलती  
सरसों छोड़नी पड़ी  
तितलियों के रंग और  
भौरों की गुंजन छोड़नी पड़ी  
मधुमक्खी का शहद  
और अमराई छोड़नी पड़ी  
हवा में ठंड की खनक  
और धूप की चमक छोड़नी पड़ी,,,,,  
Mera avyakta पर  
राम किशोर उपाध्याय 
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आमीन 

मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा. 
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595.  

अर्थ ढूँढ़ता  

(10 हाइकु)  

1.   

मन सोचता -   
जीवन है क्या ?   
अर्थ ढूँढता।   
2.   
बसंत आया   
रिश्तों में रंग भरा   
मिठास लाया... 
लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम 
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आँखों के मैख़ाने से पिला दे जाम साक़िया 

आँखों के मैख़ाने से पिला दे जाम साक़िया
मैंने कर दी है ज़िंदगी तेरे नाम साक़िया।

तू बदनाम लूटने के लिएमैं लुटने आया हूँ
मेरी वफ़ा कब माँगेकोई इनाम साक़िया... 
Sahitya Surbhi पर Dilbag Virk 
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पड़ोसी का घर जलाकर लौटे हो.... 

मन्दिरो-मस्जिद की बात पर रमें हो  
सियासत का नया मुद्दा मालूम होते हो।  
साज़िश है तुम्हारे लहू का रंग बदलने की  
और तुम बहुत बीमार मालूम होते हो... 
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शहनाई 

Akanksha पर 
Asha Saxena  
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आत्म मंथन 

मस्तिष्क शून्य चेतना लुप्त  
रूह नदारद ख़ुदा विचारत  
जग मिथ्या मृगतृष्णा बिसारत... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL  
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भारत का भ्रमित लोकतंत्र 

भारत के लोकतंत्र की उम्र अभी 71 साल है | अभी यह बचपन में है ? जवानी में है ? या वयस्क है ? इंसान के लिहाज से वयस्क तो होना चाहिए, देश के हिसाब से यह जवान है | जवानी में जोश होता है, नई सोच होती है, नया कुछ करने का जज्बा होता है | किंतु भारत जवानी में सठिया गया है... 
कालीपद "प्रसाद"  
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5 comments:

  1. शुभ प्रभात आदरणीय
    बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति, बेहतरीन रचनाएँ 👌
    गूँगी गुड़िया को स्थान देने के लिए सह्रदय आभार
    सादर

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  2. सुन्दर शुक्रवारीय अंक। आभार आदरणीय पागल 'उलूक' के पन्ने को भी जगह देने के लिये।

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  3. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  4. बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति, बेहतरीन रचनाएँ
    कुंभकर्ण जुबान फिसलासन को स्थान देने के लिए आभार

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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