Friday, April 12, 2019

"फिर से चौकीदार" (चर्चा अंक-3303)

शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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मैं धर्म हूँ 

मैं धर्म हूँ  
शाश्वत पदार्थ में  सार्वभौमिक मानव धर्म सार्वभौमिकता हुआ न कभी बदलाव मुझ में  फ़िर भी  तलाश रहा हूँ अपना अस्तित्व ख़ोज रहा हूँ पहचान अपनी धारण किया मैंने कर्म को ... 
Anita saini  
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बइठ राफ़ेल अब उड़ो अकासा 

बइठ राफ़ेल अब उड़ो अकासा  
इहां नहीं अब वोट के आसा... 
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आज का मुक्तक 

टर्र - टर्र मेढ़क खूब टर्राएं  
कुत्ते भी खूब भौकत जाएं  
मौसमवा है खूब निरालो रे  
सब हीं अपनों रंग दिखाए... 
आवाज पर Akib javed 
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Tum yaad aati ho. 

Nitish Tiwary  
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ठूंठ पेड़ से क्या मांगे 

बरगद जैसे फैले बरसों जीते  
चन्दन रहते और विष पीते --  
मौसम गहनों जैसा करता मक्कारी  
पूरे जंगल की बनी परसी तरकारी  
नंगे मन का भेष धरें जीवन जीते... 
Jyoti khare 
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देख कोशिशें हमारी, दूरियाँ मिटाने की 

इश्क़ की राहों पर क़िस्मत आज़माने की 
बुरा क्या है, गर चाहत है तुझे पाने की। 

फ़ासिले कितने हैं दरम्यां, ये न देख 
देख कोशिशें हमारी, दूरियाँ मिटाने की... 

Sahitya Surbhi पर 
dilbag virk  

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4 comments:

  1. गाजियाबाद को छोड़ अपने उत्तर प्रदेश में प्रथम चरण में मतदान 60 प्रतिशत से ऊपर रहा। औसत 63℅ तक.
    लेकिन , यह प्रयाप्त नहीं है। प्रयास हो कि सहारनपुर की तरह ही हर सीट पर 70 % मतदान हो। इसमें प्रबुद्ध वर्ग की भी भूमिका है। आज के चर्चा मंच का शीर्षक भी यही है।
    मज़हब पर मेरी रचना को प्रमुखता देने के लिये शास्त्री सर आपको धन्यवाद, प्रणाम।

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  2. सुंदर संयोजन

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  3. सुंदर संयोजन
    सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मलित करने का आभार
    सादर

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