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Monday, April 01, 2019

"वो फर्स्ट अप्रैल" (चर्चा अंक-3292)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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वाकया 2013 का है।  
उस समय मेरे पिता श्री घासीराम जी की आयु 90 वर्ष की थी।  
90 साल की उम्र में भी वे अपने दैनिक कार्य स्वयं ही करते.. 
उच्चारण पर रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

समय धार पर चलता जीवन 

मोह माया में फंसा है जीवन इस की यही कहानी  
सिसकता रहा हृदय नही मिटती बेईमानी... 
Anita saini  
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शीर्षकहीन 

Leena Malhotra  
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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की  

दो कविताएँ 

Image result for उठ मेरी बेटी सुबह हो गई / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
पेड़ों के झुनझुने,
बजने लगे;
लुढ़कती आ रही है
सूरज की लाल गेंद।
उठ मेरी बेटी सुबह हो गई... 
रवीन्द्र भारद्वाज 
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ग़ज़ल 

शिक्षा नसीब होती, कहना जरूर आता  
गर धूर्तता भी’ होती, छलना जरूर आता... 
कालीपद "प्रसाद" 
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6 comments:

  1. विविध विषयों का समायोजन बड़ी खूबसूरती से इस मंच पर किया गया है। पिता जी का संस्मरण वाला आलेख का लिंक खुल नहीं पा रहा था।
    पथिक के संस्मरणों को स्थान देने के लिये हृदय से आभार शास्त्री सर, प्रणाम।

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  2. सुप्रभात आदरणीय 🙏
    बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति 👌
    शानदार रचनाएँ ,मुझे स्थान देने के लिए सहृदय आभार
    सादर

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  3. बहुत सुंदर चर्चा।

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  4. बहुत सुन्दर मूर्ख दिवस चर्चा।

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  5. सुंदर सूत्रों की खबर देता चर्चा मंच, आभार !

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  6. सुन्दर लिंक्स। मेरी रचना शामिल की. शुक्रिया

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