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Friday, April 05, 2019

"दिल पर रखकर पत्थर" (चर्चा अंक-3296)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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जीना सीख रहा हूँ,  

दिल पर रखकर पत्थर 

Sahitya Surbhi पर 
dilbag virk 
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मन वीणा यूँ बजी आज 

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फैला उम्मीद का दामन 
मन  वीणा  यूँ  बजी  आज 
उमंग  के   साज  सजे   दिशाओं  में
 पिया  के  रंग  में   रंगी  आज... 
Anita saini  
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उनको प्रणाम -  

नागार्जुन Image result for उनको प्रणाम / नागार्जुन

रवीन्द्र भारद्वाज  
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जीवन-मृत्यु 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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भेड़िये ने खाल उतार दी है 

कल कांग्रेस का घोषणा पत्र घोषित हुआ, बहुत आलोचना हो रही है लेकिन मुझे नया कुछ नहीं लग रहा है। कांग्रेस की राजनीति स्पष्ट है, उनके समर्थक भी भलीभांति समझते हैं इसलिये ही दृढ़ता के साथ उनके पीछे खड़े रहते हैं। राजनीति का अर्थ होता है राज करने की नीति। एक राजनीति होती है – जनता को सुखी और सुरक्षित करने की और दूसरी होती है – स्वयं को सुखी और सुरक्षित करने की। पहली राजनीति लोकतांत्रिक होती है तो दूसरी राजाशाही की ओर इंगित करती है। कांग्रेस की राजनीति दूसरे प्रकार की रही है, स्वयं को सुखी और सुरक्षित करने की... 
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प्रेमाश्रु 

मेरे अंतर्मन के देवालय में
चंद कलश बड़े प्यार से
सहेज कर रखे हैं मैंने !
जानते हैं क्या है उनमें ?
उनमें बड़े कीमती मोती हैं
प्रेमाश्रुओं के मोती... 

Sudhinama पर 
Sadhana Vaid 

8 comments:

  1. सुप्रभात आदरणीय 🙏
    बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति 👌
    शानदार रचनाएँ,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें , मुझे स्थान देने के लिए सहृदय आभार
    सादर

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  2. आज चर्चा तुलनात्मक रूप से कुछ संक्षिप्त ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  3. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |
    आशा

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  4. मेरी रचना को "चर्चा मंच" में स्थान देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  5. बहुत सुंदर संकलन | मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए बहुत शुक्रिया |

    ReplyDelete

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