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Monday, April 08, 2019

"भाषण हैं घनघोर" (चर्चा अंक-3299)

सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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चुनाव परिणाम से पूर्व  

मातृ-पुत्र संवाद 

अपनी 20 साल पुरानी कविता –  
‘उत्तराखंड की लोरी’ को  
नए सांचे में ढालने की  एक गुस्ताख़ कोशिश -
चुनाव परिणाम से पूर्व का मातृ-पुत्र संवाद –
बेटे का प्रश्न -
शपथ-ग्रहण के बाद बता मां ! क्या अच्छे दिन आएँगे?
या पंजे की अनुकम्पा से, कष्ट सभी मिट जाएंगे?
गठबंधन के नेता क्या, भारत को स्वर्ग बनाएँगे?
सेहरा में भी फूल खिलेंगे, वन-उपवन मुस्काएंगे... 
गोपेश मोहन जैसवाल 
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यदि प्यार चाहिए 

प्यार एकतरफा न हो यदि  
प्यार चाहिए प्यार दो बदले में  भरपूर  
है यही दस्तूर |  
नहीं दुलार किसी दया का मोहताज  
दिल से दिल की बातें कहना चाहिए... 
akanksha पर akanksha 
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तन्हाईयाँ 

कभी अपनी तन्हाईयों में  
हमें याद करना तुम  
गल मिल रोयेंगे दोनों  
खूब उदासी के उस आलम में... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL  
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नफ़रत 

नफ़रत की गंध इस तरह फैल गई फूलों की गंध भी उसमे नहीं मिल पाई ड़ेंगू मलेरिया या हो चिकनगुनिया केंसर पार्किनसन या हो एड्स इनसे तो डॉक्टर मुक्त करा देंग पर आपसी स्पर्धा में मुक्त कर नफरत। बढ़ा देंगे... 
Rajeev Sharma  
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यह तेरी गली यह मेरी गली 

यह तेरी गली यह मेरी गली, सौ बार आएंगे जाएंगे।  
लाख करेंगे कोशिशें, पर कभी न कभी टकराएंगे... 
जयन्ती प्रसाद शर्मा  
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6 comments:

  1. सुन्दर सोमवारीय चर्चा अंक। आभार आदरणीय चर्चा में 'उलूक' के तीस मार खान को जगह देने के लिये।

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  2. सुंदर प्रस्तुति

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  3. सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय,
    सभी रचनकारों को हार्दिक शुभकामनायें
    सादर

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  4. सुन्दर अंक ..हार्दिक आभार.

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  5. सुंदर प्रस्तुती आदरणीय सर | लिंक सभी लाजवाब हैं पर सबसे ज्यादा आभार शरारती बचपन तक पहुँचाने के लिए | मेरी रचना को शामिल किया गया उसके लिए शुक्रिया और आभार | सभी रचनाकारों को सस्नेह शुभकामनायें |

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