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Wednesday, October 05, 2011

"प्रभु का संवाद" (चर्चा मंच-658)

मित्रो बुधवासरीय चर्चा में आपका स्वागत है। हाल फ़िलहाल के लिये चर्चा मंच पर मेरी यह अंतिम चर्चा है।  वह इसलिये कि काम का और व्यंग्यकारी के टेढ़े धंधे का बोझ कुछ ज्यादा ही हो गया है। खैर साहब चर्चामंच पर आने के पहले मैं ब्लाग चर्चा  के बारे में कुछ जानता ही नही था,  शास्त्री जी ने ही मार्गदर्शन दिया।  उस पर तुर्रा यह कि मेरी चर्चा का अंदाज कुछ चलपुर्जा किस्म का है।  लेकिन फ़िर भी शास्त्री जी ने हर वक्त न केवल मेरी गलतियों को दुरूस्त किया बल्कि मेरे द्वारा चुने गये लेखो मे कभी कोई परिवर्तन नही किया। सो मेरी कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द मैं वापस आप सब के साथ जुड़ जाउं। चलिये अब चर्चा को आगे बढ़ाते हैं
सबसे पहले नवरात्री के शुभ अवसर पर  प्रिय बहन वन्दना जी के द्वारा  दे दो मां बस यही वरदान     
 से मामला शुरू कर चलते हैं विद्या जी के पास और जानते हैं कि   आरती में कर्पूर का उपयोग क्यों   ।
इसके बाद धर्म को समझने की कवायद में केवल जी का धर्म और अध्यात्म... बहुत ही शानदार प्रस्तुती है। बात केवल इतनी है कि धर्म निज धारण की वस्तु है और अगर हम किसी और से हमारे धर्म का पालन करने की उम्मीद करें तो वहां से ही समाज में विघटन की शुरूवात होती है।  प्रभु से विनोद भी हो ही सकता है मेरा और प्रभु का संवाद - भाग दो         मे नारद जी  का बिग बास के घर रूकने का एप्लीकेशन  है।
इसके बाद चर्चा आज के हालत पर सद्भावना टोपी मे  धनंजय जी जैसे वरिष्ठ और गहरी राजनैतिक दखल रखने वाले व्यक्ति ने क्या कहा है,  आपने न देखा तो समझिये मोदी पर बना जबर्दस्त पर विवादित कार्टून के साथ उसकी मीमांसा से आप वंचित रह जायेंगे।  उसके बाद कर्ज और अफ़गानिस्तान के बोझ से लड़खड़ाता अमेरिका   पर बात हो सकती है। पर उसके साथ  अंतर्विरोधों से घिरा पाकिस्तान  में   प्रमोद जोशी साहब का लेख भी देखना उपयुक्त ही होगा।
गांधी जयंती पर बापू! न आना इस देश में...  संजय शर्मा हबीब साहब की रचना शानदार है। और इससे अलग लेटर टू बापू ऑन हिस बर्थडे    तो अजब गजब है। जिसे लिखा है दंतेवाड़ा के एक अनजान से बंधु ने। 
चलिये इससे आगे बढ़ें तो भ्रष्टाचार - कारण और निवारण मे पद्म सिंग पूरा फ़ार्मूला लेकर आये हैं तो आनंद प्रधान साहब कही और जलते तेलंगाना की आग से और मत खेलिए व्यस्त हैं। पर बात साफ़ है कमजोर होती केन्द्र सरकार के साथ देश की समस्याएं सिर उठायें यह लाजिमी ही है ।पर कांग्रेस करे क्या कहती है ये भाजपा मुझे आत्महत्या नही करने देती     अब बताईये कि पल्लवी जी खामखा दुखी हैं कि  जलाकर मार देने की घटनाओं में वृद्धि....  अब साहब कोई राजनैतिक पार्टी मरना चाहे और विरोधी मरने न दे तो जलाने का सहारा ही बचता है न।
चलिये चलते चलते  डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक साहब का गम कि "वो दूर हो गये हैं..."   और हमारे जैसे उनके अपनो का प्रतिकार  मुझ पर यकीं नहीं  ।   हा हा हा चलिये यह तो हास्य हो गया,  जाते जाते श्रीमती अजीत गुप्ता जी की दिल को छू जाने वाली रचना  वनांचल कितने सुन्‍दर और कितने दर्द भरे?  और ब्लाग जगत के नामवर जाकिर भाई की ओर से सूचना भीलवाड़ा में सम्‍पन्‍न हुआ दो दिवसीय बाल साहित्‍य समारोह।

22 comments:

  1. sach mein vyktigat jumedaari ke saath-saath charcha prastut karne ke liye samay nikalna dushkar kaarya hai...aapki aaj tak ki aur aaj ki bhaktimayee aur samyik charcha prastuti ke liye aabhar.. dhanyavaad..

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  2. बढ़िया चर्चा --
    सुन्दर लिंक्स ||

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  3. सुन्दर लिंक्स|

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  4. बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स के साथ बेहतरीन चर्चा ।

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  5. आपके बताए लिंक अभी टटोलते हैं। आभार।

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  6. ब्लोंगिंग का मेरा शौक अभी ताज़ा ताज़ा है,पर चर्चा मंच से ढेर सारी रचनाओं तक पहुँचने का मौका मिलता है.दवे जी कह रहे हैं की उनकी अंतिम चर्चा है,मुझे निराशा हुई.क्योंकि इस खुले बाज़ार में उनके जैसे दिलदार ने मेरा स्वागत किया.
    पर जाते जाते मुझे गरिष्ठ -- गहरा न जाने क्या क्या कह गए,बाल समय से पहले उड़ जाने से बहुत लोग गफलत में पड़ जाते हैं.

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  7. आपका चर्चा का तरीका और सभी को अवसर देने का तरीक अच्छा लगता है फिर अचानक अंतिम
    चर्चा की बात कहाँ से आई |
    आशा

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  8. चर्चा अच्छी है,
    लेकिन इसे अंतिम कह कर आपने थोडा असहज कर दिया।

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  9. अच्छे लिंक्स ...
    दशहरे की बहुत शुभकामनायें!

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  10. अच्‍छी चर्चा
    आभार

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  11. सार्थक चर्चाएँ ..सुन्दर लिंक ..आभार

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  12. बहुत सुन्दर लिंक संयोजन्……………सार्थक चर्चा।

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  13. बढ़िया चर्चा....अच्छे लिंक्स

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  14. सार्थक और काफी रोचक लिंक्स ...दशहरा की शुभकामनाएँ

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  15. अंतिम काहे ??? अभी न जाओ छोड़ के कि दिल अभी भरा नहीं , ... और भरेगा भी नहीं !!

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  16. अंतिम काहे ??? अभी न जाओ छोड़ के कि दिल अभी भरा नहीं , ... और भरेगा भी नहीं !!

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  17. अंतिम काहे ??? अभी न जाओ छोड़ के कि दिल अभी भरा नहीं , ... और भरेगा भी नहीं !!

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  18. आपको क्या कहू कहते नही बनता
    आपको क्या लिखू लिखते नही बनता
    क्या खूब संयोंजन कर सुन्दर लिकों का,
    चर्चा मंच,से दूर जाने का मन नहीं करता.

    विजयादशमी की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ....

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  19. bahut shandar charcha.
    mobile par hu.
    net nahi chal raha hai.
    aasha hi nahi vishvas bhi hai ki mere charcha manch ke sathi yogdan dete rahenge.
    --
    bhai AUNESH C DAVE JI.
    AAPSE HAME LAGAV HAI.
    AAPKO HAM MUKT NAHI KRENGE.

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