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Tuesday, November 22, 2011

"बस तुम नहीं हो" (चर्चा मंच-706)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में
आपके अवलोकनार्थ कुछ लिंक प्रस्तुत हैं।
वक्त ने हमको चुना चोट खाने के लिये
मंज़िलें और भी हैं राह दिखाने के लिये
कौन जीता है भला गम उठाने के लिये
वक़्त आड़ा ही सही साथ बिताने के लिये
सिर्फ इस लिए पी ली
मैंने सारी उम्र की कडवाहट
क्योंकि तेरी आँखों की नमी में
अपने दर्द के अक्स की झलक और तेरे प्यार की ...
दुःख दर्दों की दवा बताएँ खुद में बैठे रोगी.
आज एक रुचिकर इ-मेल शेयर कर रहा हूं यहाँ...
किताबों से किसी को क्या मिलता है,
जो वो करवाते हैं,
किताबों में तो वही किस्से लिखे जाते हैं,
राज-ए-राज को जान जाता है
चू रहा मकरंद फूलों से,
उठ रही है गंध कूलों से...
(संजय द्वारा धृतराष्ट्र के प्रति विश्वरूप का वर्णन )
संजय उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्‌।।
इस वर्ष हम नई दिल्ली की शताब्दी मना रहे हैं । नई दिल्ली का निर्माण कार्य १९११ में आरम्भ हुआ था । वैसे तो दिल्ली का इतिहास ५००० साल से भी ज्यादा पुराना है ।
अष्टावक्र त्रेता युग के महान आत्मज्ञानी सन्त हुये ।
जिन्होंने जनक को कुछ ही क्षणों में
आत्म साक्षात्कार कराया ।


आप भी इस दुर्लभ गूढ रहस्य को....
*1*
*सपने लाख / जतन से पालना / टूट जाते हैं***
*प्यार करते / जान से ज्यादा भी / रूठ जाते हैं **।
*गांधी और गांधीवाद-
**प्रिटोरिया पर यूनियन जैक फहराया*
आज शाम से मुझे दो सवालों से रूबरू होना पड़ा.सवाल गहन हैं.....कुछ दर्दनाक भी.रात साढ़े दस बजे मेरी छोटी बहन का फोन आया. मोबाईल के स्क्रीन पे ...कोई कुछ तो कहे!
आजकल जो हाहाकार मचा हुआ है
गूगल खाता बंद होते जाने के कारण,
उसी कड़ी में दो दिन पहले गुरूवार की रात ढाई बजे
मोबाइल द्वारा हुई एक पुकार पर मुझे गहरी नींद से...
पुष्प जीते हैं उल्लास से
अपनी क्षणभंगुरता को नहीं जानते
जीना है कितना
फिर भी बांटते हैं रंग की उमंग को
गंध के गौरव को......
दुनिया के सैकड़ों-हजारों जीव- जंतुओं मे
कुछ ऐसे प्राणी हैं
जिनके अस्तित्व पर मनुष्य ने रहस्य
और ड़र का कोहरा फैला रखा है।
इनमे दो प्रमुख हैं।
पहला है बिल्ली ...
रहस्य के कोहरे में लिपटे दो जीव
मन में दबी आग जब भी धधकती है
बाहर निकलती है थर्रा देती सारी कायनात |
मन ही मन जलता आया सारा अवसाद छिपाया
सारी सीमा प़र हों गयी सहनशक्ति जबाब दे गयी |
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार
भोर हुआ पंछी वन बोले ,
किरणों ने घूँघट पट खोले ,
सूर्य कलश ले पूजन हित
मंदिर में ऊषा दौड़ पड़ी !
सूने में प्रतिमा बोल पड़ी !
मांग मत आराम के दो पल ।
और बन सूरज दमकता चल ।1।
आप अपनी ताकतें पहचां,
कौन फिर तुझको सकेगा छल
- *क्यों मौन है ये ताश के पत्ते सी घर की चारदीवारी * आँख खुली तो अन्याय को तांडव करते हुए पाया अवतरण के वक़्त मुसीबतों ने ही अमंगल गीत था गाया अन्याय का दर्द ...
आज हाजिर हूँ आप सबके सामने...
रविवार का दिन है.. फुर्सत ही फुर्सत है...
कुछ ही देर पहले सोकर उठा हूँ...
रात १ बजे सोया था और ठीक आधे घंटे बाद
एक बुरी खबर ...
अपनेमुख से कुछ तो बोलो
हिलना-डुलनाक्यों बन्द हुआ
तन-मनक्यों ब्रह्मानन्द हुआ
सबढला आज सिंगार-साज
चलतीधारा क्यों रुकी आज
क्या यही मौत का लक्षण है!
और अन्त में देखिए!

28 comments:

  1. बहुत बढ़िया लिनक्स ...सधी हुई चर्चा

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  2. बेहतरीन सार्थक उत्कृष्ट चर्चा आभार

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  3. सार्थक और कुछ नई जानकारी देती लिंक्स से सजी चर्चा बहुत अच्छी लगी |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  4. बेहतरीन, सार्थक और उत्कृष्ट चर्चा .
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

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  5. शानदार लिंक्स ...
    आभार !

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  6. ढेर सारे लिंक्स के साथ बहुत सुन्दर चर्चा रहा! शानदार प्रस्तुती !

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  7. मेरी पोस्ट शामिल करने का बहुत बहुत शुक्रिया ..निसंदेह कुछ ज्यादा लोग पढ़ पायेंगे ...

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  8. बेहतरीन चर्चा के लिए आभार,शास्त्री जी ! किन्ही वजहों से मैंने अपनी पोस्ट हटा ली थी, असुविधा के लिए क्षमा !

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  9. बहुत उम्दा चर्चा है आज ...

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  10. बहुत ही अच्‍छा चर्चा मंच सजाया है आपने ...

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  11. खुबसूरत चर्चा.... बढ़िया लिंक्स...
    सादर आभार....

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  12. आराम से बैठकर पढ़ते हैं।

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  13. विस्तृत चर्चा आभार.

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  14. सार्थक व उत्कृष्ट चर्चा …………………आभार

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  15. बहुत बहुत शुक्रिया मेरी रचना को चर्चा मंच में लेने का सभी लिनक्स पढने को मिले ..शुक्रिया

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  16. Bahut achhe links....hameshakee tarah! Meree rachana shamil kee.....tahe dil se shukriya.

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  17. उम्दा लिंक्स के साथ सजाया है आपने इस बार का चर्चा मंच मेरी रचना को भी यहाँ स्थान देने के लिए आभार ...

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  18. चर्चा अच्छी लगी और नीचे का कर्टून तो लाजवाब है।

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  19. दुख के क्षणों में भी कार्य
    आपकी निष्ठा को सलाम

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  20. आप सब का धन्यवाद ,मुझे उत्साह देने के लिए

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  21. बेहतरीन चर्चा ! 'उन्मना' से मेरी माँ की रचना के चयन के लिये आपका आभार एवं धन्यवाद !

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  22. चर्चा मंच पर स्थान देने के लिए शुक्रिया

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  23. शुक्रिया शास्त्री जी ।

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