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Wednesday, February 22, 2012

चर्चा मंच ७९६: रासायनिक साबुन

सबसे पहले सबको प्रणाम के साथ गउरा सिव बियाह की हार्दिक शुभकामनाएँ!  
      अति व्यस्तता ने चर्चामंच का संबोधन तक भूल चुका था, अबकी मैंने व्यस्तता को छुट्टी दे दी है,    
दवेजी  के अटरिया  वाले एक गुंडा   दोस्त की  आत्मकथा  से पता चला की, रासायनिक  साबुन के प्रयोग से उनको संक्रमण  हो चूका है इसलिए उनकी   पढाई -लिखाई भी छूट चुकी है. "आदरणीय “रविकर” जी को समर्पित किये हैं डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने पाँच दोहे" !
     २७ फरवरी शाम का सूरज ढलते ही  इस बसंती फुहार में अंजू चौधरी जी का पुस्तक विमोचन  है, सभी आत्मा  सहित उपस्थित रहे  इसी बहाने  सभी   खुश  होंगे . जल्द ही एक और जीवन  के   दृष्टिकोण  पर दृष्टि  डालने  की ललक  बिना  पैसा  खर्च किये पूरी होने वाली है . फेसबुक, आपको भी धन्यवाद और विदा से पहले यह कार्टून-
चुनाव (आयोग) सुधार 
आज के लिए इतना ही ,
बाकी अगले हफ्ते ,
सादर .
कमल 

17 comments:

  1. बहुत सुन्दर और संक्षिप्त चर्चा!
    आभार!

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  2. कमाल सिंह जी की यह चर्चा खास अलग अंदाज में ...अच्छी लगी... लिक्स में अब जाना होगा ..सादर

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  3. सुन्दर और संक्षिप्त चर्चा.

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा। मेरे ब्लॉग को स्थान देने के लिए धन्यवाद।

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  5. आज का चर्चा मंच

    उत्कृष्ट रचनाओं से भरपूर है ।।

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  6. संक्षिप्त, सार्थक और गहन..

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  7. बहुत ही बढि़या लिंक्‍स का वयन किया है आपने ।

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  8. अच्छी और संक्षिप्त चर्चा |
    आशा

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  9. अच्छी चर्चा , हमेशा की तरह.

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  10. अच्छी रचनाये बढ़िया प्रस्तुति,.....

    MY NEW POST...काव्यान्जलि...आज के नेता...

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  11. संक्षिप्त,बढ़िया चर्चा!

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  12. बहुत बढ़िया चर्चा

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  13. बहुत सुन्दर प्रस्तुति,
    धन्यवाद मेरे लेख को सम्मान देने के लिए

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  14. Badhiya .

    Charchamanch ka charcha -

    http://drayazahmad.blogspot.in/2012/02/blog-post_23.html

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"सब कुछ अभी ही लिख देगा क्या" (चर्चा अंक-2819)

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