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Friday, February 17, 2012

छलछंदी छितिपाल, छकाते छोरी-छोरा--चर्चा मंच 792

टिप्पणी; बुधवार की शाम से ही 'जबलपुर/छिंदवाड़ा' प्रवास पर हूँ -

छलछंदी छितिपाल, छकाते छोरी-छोरा-

छोरा होरा भूनता, खूब बजावे गाल ।
हाथी के आगे नहीं, गले हाथ की दाल ।

गले हाथ की दाल, गले तक हाथी डूबा ।
कमल-नाल लिपटाय, बना वो आज अजूबा ।

चले साइकिल छीप, हुलकता यू पी मोरा ।
छलछंदी छितिपाल, छकाते छोरी-छोरा ।।
-----रविकर

"सबके मन को भाई रेल"

धक्का-मुक्की रेलम-पेल।
आयी रेल-आयी रेल।।...
*मन की गगरी कभी तो छलकेगी
जब तन हिंडोले खायेगा
नैनो की सगरी कभी तो छलकेगी
जब मुख 'बरबस' मुस्काएगा ...

तम श्याम तट पर शर्वरी ने जो रचे थे चित्र सुन्दर
मिट गये वे चंद्र तारे प्रात के आने को सुनकर.
सब कह दिया था प्रेयसी ने
प्रथम मिलने पर हमारे अब न जायेंगे .
जन्म: १६ अगस्त, नीमच (म प्र) में शिक्षा:
सिविल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर
सम्प्रति: अनुसन्धान...
सतत हरे भरे का ग्रास कर
अपनों के लिए बनाया
एक रेशम का घर....?
कराहती रही शहतूत की कोमलता
और बना हमारा कोकून....?
ओह श्याम क्यूँ आज ये छवि बनाई है
लगता है तुझे भी मोहब्बत की पीर समझ आई है
ओह !दृग बिंदु कैसे बरस रहे हैं
आज श्याम भी तरस रहे हैं ...
तुम्हारे लिए मुश्किलें बढ़ाती-बढ़ाती
ख़ुद के लिए मुश्किलें पैदा कर ली हूँ,
पल-पल करीब आते-आते ज़िन्दगी से ही
करीबी ख़त्म ...
हर बार की तरह इस बार भी भारत से आते समय
मेरे सामान में सबसे भारी चीज़ें किताबें थीं.
उन्हीं किताबों में थी *नरेन्द्र कोहली* की *
"पूत अनोखो जायो*",
जो कि *...
बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे !
बात तब की है जब मैं कुंभ के अवसर पर
हरिद्वार गंगास्नान करने गया था।
हम भी कुंभ नहा आ...
हर वृहस्पतिवार की तरह आज
आप सभी *पाठकों को सादर प्रणाम करते हुए
**अनामिका *फिर हाज़िर है इस ब्रहस्पतिवार
अपनी *कथासरित्सागर का पिटारा लेकर...
इश्क
हर पल आने वाले ख़यालों की तरह
एक ख़याल आज भी आया दिल में..
यूँ ही...
कि मैं आखिर तुमसे प्यार क्यूँ करती हूँ???
और इस सवाल के साथ जवाब भी आया... तुमको मैंने च...

(प्रवीण पाण्डेय)
सागर से साक्षात्कार उसकी लहरों के माध्यम से ही होता है। किनारे पर खड़े हो विस्तृत जलसिन्धु में लुप्त हो जाती आपकी दृष्टि, कुछ कुछ कल्पनालोक में विचरने जैसा भाव उत्पन्न करती है, पर इस प्रक्रिया में आप सागर...

दिनेशराय द्विवेदी
कल की पोस्ट में मैं ने वायदा किया था कि आज ईरान के बादशाह के साथ घटी घटना जिस का वर्णन फ्रेंक्विस बर्नियर ने अपनी किताब में किया है आप को बताउंगा। लेकिन कल की पोस्ट पर नीरज रोहिल्ला की बहुत सच्ची टिप्प..

*अनवरत गड्ड-मड्ड समय है * *जिसमें तुम्हारा होना भर रह गया है शेष * *सब कुछ भूल चुकी हूँ * *यहाँ तक कि भाषा भी * *सिर्फ मौन है * *और तुम हो * *तुम्हे बटोरती हूँ * *जैसे हरसिंगार के फूल * *और उनकी महक से * *भ...

कुछ इस तरह उस का जवाब आयेगा। वो हाथों में ले कर गुलाब आयेगा।१। वो करने लगी है निगाहों से बात। बहुत जल्द उस पर शबाब आयेगा।२। परिन्दे घरौंदों में दाख़िल हुये। दरीचे में अब माहताब आयेगा।३। अगर सर उठायेंगे ब...

*प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।* *मैं तो कवि हूँ मुझ पर क्या है , * *कविता गीतों की झंकार ।* *प्रिय तुमको दूं क्या उपहार ।। * * * *कवि के पास यही कुछ होता ,* *कवि का धन तो बस यह ही है; ...

प्रेम, एक दिव्य ऊर्जा है प्रेम है, चेतना का आगार. प्रेम है, लहरों का आवेग. प्रेम तो है, एक तीव्र संवेग. प्रेम भी है, क्या एक आवेश? आकर्षण और प्रतिकर्षण का? राग-विराग औ ईर्ष्या-द्वेष का? मूल्यों-चिंतन- मानव...

विदेशों के स्विस बैंकों आदि, 'Tax heaven' में सबसे ज्यादा पैसा भारत से पहुँचता है। हमको अईसा-वयिसा न समझो हम "भारत" हैं। हम कोई मामूली नहीं हैं ,हमने पांच सौ बिलियन डॉलर जमा कर रखा है विदेशों में। सीबीआई ड...

पंखुडी
कभी यहाँ लुटाते,कभी वहाँ लिटाते, लुट जाते एक दिन प्यार लुटाते-लुटाते. लूटकर जब उन्हें सब चले जाते तब हारकर वे प्रभु की शरण में आते. न कुछ बचा होता लुटाने को न कोई लूटनेवाले ही रह जाते. झोली खाली,जीवन भी ख...

आशा जोगळेकर
कोच्चि या कोचीन – दिन आंठवा – आज जब हमारा भ्रमण परिवार कमरे से बाहर आया तो सामान लॉबी में रखा हुवा था जो कि पूर्व से दो तीन गुना ज्यादा था और आज कोच्चि में तो शॉपिंग ही शॉपिंग थी । आज अगर सिक्यूरिटी वाले...

यशवन्त माथुर
जो कह सके न कोई वो तीखी बात हूँ मैं जो सह सके न कोई वो जज़्बात हूँ मैं मैं प्रेम भी हूँ विरह भी हूँ राजनीति भी हूँ कूटनीति भी हूँ मैं वोट भी हूँ चोट भी हूँ मैं खारा भी हूँ मीठा भी हूँ मैं आग हूँ तूफान हूँ ...

*प्रेम दिवस पर लीजिए**, *व्रत जीवन में धार। *पल-पल**,**हर पल कीजिए**, **सच्चा-सच्चा प्यार।‍‍‍१।* *चहक रहे हैं बाग में**, **कलियाँ-सुमन अनेक।* *धीरज और विवेक से**, **चुनना केवल एक।२।* *जब विचार का मेल हो*...

प्रिय मित्रों प्रेमी -प्रेमिका दिवस मुबारक हो , आप सब के प्रेम की बगिया में हरियाली खुशहाली भरी रहे गुल गुलशन खुश्बू से भरपूर हो बुलबुल और अपनी अपनी कोयलें चहकती रहें पवित्र प्रेम दिल में बसा सदा के लिए छ...

स्मृति शिखर से ...7 : गाँधीगिरी

*स्मृति शिखर से ...7* *गाँधीगिरी *** करण समस्तीपुरी*
एक साल हो गए थे बंगलोर में रहते हुए।
कपड़ों का सलिका आ गया था, आफ़िस-मैनर्स भी सीखे, अंगरेजी

DR. ANWER JAMAL
पंचतत्वों के रथ पर सवार निर्मल धवल आत्मा तेरी लाया जग में पालनहार वह पल क़ियामत होगा पूरा होगा तेरा जो विचार
See : http://vedquran.blogspot.in/2012/02/sun-spirit.html -------------------------
यह कमेंट हमने ...

दूध का दूध पानी का पानी

कुमार राधारमण
फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की हाल में आई रिपोर्ट ने लोगों के कान खड़े कर दिए। लोग सोचने को मजबूर हैं कि जब देश भर में लिए गए 1791 सैंपलों की जांच में 68.4 फीसदी दूध मिलावटी पकड़ा गया..
*आजकल मेरे यहाँ (कैलगरी , कनाडा ) में कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है.... ऐसे में इतने सुंदर Ice Sculptures देखकर बड़ा मज़ा आया .... आप सबको कैसे लगे... :)*

babanpandey
जबसे मैंने .... तुम्हारे खिलखिलाते सुर्ख कपोलों पर अपने अधरों का स्पर्श किया है ... तबसे न जाने क्यों ये भवरे मेरे अधरों के पीछे पड़े हैं कई बार तुमसे पूछा इसका राज ज़वाब में तुम मुस्कुरा देती हो एक बात बताओ..

केवल राम
सृजन मानव का स्वभाव है . यही उसकी चेतना का प्रतिबिम्ब भी है . मानव मन - मस्तिष्क में चलने वाली हलचल, भावनाओं और विचारों का अनवरत प्रवाह सृजन के माध्यम से बाहर की दुनिया में प्रवेश करता है . जब तक सब कुछ ...
ऋता शेखर मधु
कैलाश सी शर्मा सर के हाइकुओं पर आधारित हाइगा

"छुक-छुक करती आयी रेल" (शास्त्री "मयंक")

बच्चों को यह बहुत सुहाती।
नानी के घर तक ले जाती।।

सबके मन को भाई रेल।
आओ मिल कर खेलें खेल।।...

17 comments:

  1. रूपचन्द्र जी, अपनी चर्चा में जगह दे कर प्रतिष्ठा देने के लिए धन्यवाद

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  2. बहुत बेहतरीन....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  3. अच्छी चर्चा...
    विस्तृत लिंक्स....
    मेरी रचना "इश्क" को स्थान देने के लिया आपका बहुत आभार सर.
    शुक्रिया.

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  4. आपका यह प्रयास सराहनीय है ...आभार ।

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  5. बहुत ही अच्छे लिनक्स...'कलमदान ' को स्थान देने के लिए धन्यवाद..
    kalamdaan.blogspot.in

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  6. अच्छे लिंक्स के साथ सुंदर प्रस्तुति|
    हिन्दी हाइगा को शामिल करने के लिए आभार|

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  7. 'हमारी वाणी' नामक एग्रीगेटर अब निष्पक्ष नहीं रहा। मेरी पोस्टों को हटा देता है! पोस्ट लगाने के थोड़ी देर बाद उसे वहाँ से हटा दिया जाता है। कसूर मेरा है अथवा उनके मन में डर पैदा हो गया है ?----जो भी हो , हमने इन्हें माफ़ किया, क्योंकि जो डर गया वो खुद-बखुद ही मर गया।

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  8. बहुत बहुत धन्यवाद सर मुझे शामिल करने के लिए।

    सादर

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  9. सुन्दर चर्चा। उपयोगी लिंक।

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  10. वार्ता बहुत अच्छी रही |कई अच्छी लिंक्स |
    आशा

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  11. charcha mein meri rachna ko shaamil karne ke liye aabhar.

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चर्चा - 2817

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है  चलते हैं चर्चा की ओर सबका हाड़ कँपाया है मौत का मंतर न फेंक सरसी छन्द आधारित गीत   ...