Followers

Friday, July 27, 2012

हिंदी तो अंग्रेजों का कुत्ता भी लिख लेता है -रविकर चर्चा मंच 953

Sushil Kumar Joshi
6:42 PM (10 hours ago)

to me
Hindi
English
   
Translate message
Turn off for: Hindi
प्रश्न 1 चर्चा मंच में लाकर आप लोगों के ब्लाग के बारे में बताते हैं आप का उद्देश्य क्या है ?
         लोग अपना अपना ब्लाग देखते हैं आभार कहते हैं चले जाते हैं उनका इतना ही उद्देश्य है क्या?
         चर्चा मंच आप क्यों लगा रहे हैं? किस के लिये लगा रहे हैं?
          मेरा प्रश्न क्या आप कल की चर्चा में लगा रहे हैं?
नए सदस्य 
खुशियों की बरसात सदा हो, नव-विहान मंगलमय होवे |
समय-माल में यह विहान नित, उपलब्धि के पुष्प पिरोवे ||

प्रथम जन्म-दिन आज मनाकर, ब्लॉगर सभी ख़ुशी से फूले-
चिरंजीव आनंद बांटता, अभ्युदय भाई में खोवे ||

हिंदी तो उनका कुत्ता भी लिख लेता है .,

फ़ेसबुक .....चेहरों के अफ़साने

 हिंदी को दी गालियाँ, उर्दू पर क्या ख्याल ।
लिपि का अंतर है मियाँ, करते अगर  बवाल ।
करते अगर बवाल, भूल जाते मक्कारी ।
रहते ना महफूज,  डूब जाती  मुख्तारी ?
अंग्रेजी में छपो, हमेशा फेरो माला ।
तन-मन का ये मैल, निगल खुद बना निवाला  ।।

स्मृति शिखर से – 18 : सावन

करण समस्तीपुरी 
विवरण मनभावन लगा, सावन दगा अबूझ |
नाटक नौटंकी ख़तम, ख़तम पुरानी सूझ |
ख़तम पुरानी सूझ, उलझ कर जिए जिंदगी |
अपने घर सब कैद, ख़तम अब दुआ बंदगी |
गुड़िया झूला ख़त्म, बची है राखी बहना |
मेंहदी भी बस रस्म, अभी तक गर्मी सहना ||

अनशन: टीम अन्ना का टीवी प्रेम ...

महेन्द्र श्रीवास्तव 
 
 मुखिया की निंदा करें, तोड़े  घर परिवार ।
ऐसे लोंगों की यहाँ, हर घर में भरमार ।
हर घर में भरमार, मार दम भर अब इनको ।
पूज राष्ट्रपति रूप,  नहीं अब ज्यादा बहको ।
करो  देश बदनाम , आज दे दे के गाली ।
मर्यादायें भूल,  सड़क के बने मवाली ।।
अब वे हमारे राष्ट्रपति हैं ।।

उपहार कहाँ से लाऊँ ?

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)  

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 6 : 

राकेश कुमार ‘अयोध्‍या’ की कहानी - आहुति

image

पती पुरोहित पाप को, वह स्त्री नादान ।
कायर सा क्यूँ  भोगती,  यह सारा अपमान  ।
यह सारा अपमान, जुबाँ पर जड़ के ताले ।
सह ली धुर अपमान, पका  के पाप निवाले ।
द्रुपद-सुता तो द्यूत, भागवत का यह मसला ।
पापी पंडित दुष्ट, पती शंकालू पगला ।।
काव्य मंजूषा
चाह संग हमराह जहाँ, हैं वहीँ निकलती राहें  |
डाह मगर गुमराह करे, बस बरबस बाहर आहें ||
प्रतिस्पर्धी नही युगल ये, पूरक अपने सपने के-
पले परस्पर प्रीति पावनी, नित आगे बढ़ें सराहें ||
 
तुम कभी तो प्यार से बोला करो।
राज़ दिल के तो कभी खोला करो।।

हम तुम्हारे वास्ते घर आये हैं,
मत तराजू में हमें तोला करो।

 यह भी जाने 

चीज़ें दस चीज़ों को खा जाती हैं (नेक नसीहत)


हज़रत सय्यदना अली हिजवेरी दाता गंज बख्श रहमतुल्लाह अलैह
ने फ़रमाया है कि दस चीज़ें दस चीज़ों को खा जाती हैं-

1. तौबा गुनाहों को खा जाती है।
2. ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई) नेक आमाल को खा जाती है।
3. ग़म उम्र को खा जाता है।
4. सदक़ा (दान) बलाओं को खा जाता है।
5. पशेमानी सख़ावत को खा जाती है।
6. नेकी बदी को खा जाती है।
7. झूठ रिज़क़ को खा जाता है।
8. ग़ुस्सा अक्ल को खा जाता है।
9. तकब्बुर (घमंड) इल्म को खा जाता है।
10. अद्ल (न्याय) ज़ुल्म को खा जाता है।

45 comments:

  1. अच्छी लिंक्स अच्छी चर्चा |नसीहत सबसे अच्छी |
    आशा

    ReplyDelete
  2. चलिए हिंदी तो अंग्रेजों का कुत्ता भी लिख लेता है इससे हिंदी की बोध क्षमता सारल्य का ही बोध होता है .सबकी अपनी अपनी समझ है थरूर साहब ने भी केटिल क्लास इकोनोमी क्लास में सफर करने वालों के लिए कहा था .सबका अपना अपना कोम्प्लेक्स है आप क्या करिएगा ?
    महफूज़ अली साहब बस इतना जान लीजे हिंदी की सहोदरी उर्दू और उसका साहित्य अपनी रूमानियत में अंग्रेजी साहित्य से कहीं आगे है .भाषा को लेकर कैसा कोम्प्लेक्स ये तो अनुराग का विषय है जितनी भाषाएँ आप सीख लें ,उतनी ही कम आपकी सोच का दायरा सूचना का मुहावरों का दायरा विकसित ही होगा -
    चलिए दो हलके फुलके शैर सुन लीजिए -
    इतने शहरी हो गए लोगों के ज़ज्बात ,
    हिंदी भी करने लगी अंग्रेजी में बात .

    और बस एक और -
    एक गज़ल कुछ ऐसी हो ,बिलकुल तेरे जैसी हो ,

    मेरा चाहे जो भी हो ,तेरी ऐसी तैसी हो .
    रही बात पारिश्रमिक की तो ज़नाब हमने तो रेडिओ से बतौर वार्ताकार २५ रूपये लेकर भी बोला है (१९७० -७१ )में २५० और ५०० भी १९९० के दशक में .ये संस्थान हमारा प्रशिक्षण स्थल थे पारिश्रमिक मानद ही रहा है हमारे लिए लक्ष्य नहीं ,(हाँ हिंदी पत्रकारिता दारिद्र्य लिए हुए है ,हिंदी गुलामों की भाषा है ऐसा आज भी कुछ लोग सोचते हैं .)चाहे वह अखबार में छपे लेख रहें हों या रेडिओ से वार्ताएं .लक्ष्य निज भाषा में खुद को अभिव्यक्त करना रहा है जन -जन, जन मन तक पहुंचना रहा है न की पैसा .हिन्दुस्तान के हर हिंदी रिसाले के लिए लोकप्रिय विज्ञान लेख लिखें हैं .पैसे के लिए नहीं एक सनक को एक मिशन को पूरा करने को .अली साहब का पाना ख्याल है .ख्याल अपना अपना पसंद अपनी अपनी .

    ReplyDelete
    Replies
    1. कुत्ते हो तो लिखकर दिखाइए।
      हम इंसान हैं इसीलिए लिख लेते हैं।

      Delete
    2. पता है हमको सीख लिये हैं
      बहुत से हिन्दी लिखना
      पर उनको मजा आता है
      आता है अंग्रेजी में भौंकना
      अंग्रेजी में ही भौकवाइये
      लिखने लगेंगे कुत्ते भी अगर
      पढ़ने वाले कुत्ते तो पहले
      कहीं से और ढूंड के लाइये ।

      Delete
  3. महफूज़ अली साहब को पढवाया आपने बड़ा एहसान किया है हम पे .बौद्धिक भकुए एक ढूंढोगे हज़ार मिलेंगे .

    ReplyDelete
  4. महफूज़ अली साहब को पढवाया आपने बड़ा एहसान किया है हम पे .बौद्धिक भकुए एक ढूंढोगे हज़ार मिलेंगे .और फिर अपनी ही माँ को गाली देना तो हमारी राष्ट्रीय परम्परा है .दिल पे न ले यार .ये मेरा इंडिया ,आई लुव माई इंडिया ...

    ReplyDelete
  5. हर हिन्दुस्तानी एक दूसरे की हिंदी करता है ,डेमोक्रेसी करता है महफूज़ साहब ने कौन नया काम कर दिया ,आम आदमी हो गए अब हिन्दुस्तान के .

    ReplyDelete
  6. "“रूप” को छूकर नहीं मैला करो" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
    उच्चारण

    वाह ! सलाह अच्छी है !

    आँख से देखो-सराहो दूर से,
    “रूप” को छूकर नहीं मैला करो।

    करने वाले अगर मान लेंगे
    छूकर नहीं फिर देख कर
    आँख से भी मैला करेंगे !

    ReplyDelete
  7. मनजौकी भौजी और गुछून परसाद
    (सतीश पंचम)
    सफ़ेद घर

    बहुत सुंदर अभी पूरी होनी है तब कुछ कहा जाये !!

    ReplyDelete
  8. ब्लागर साथियों से हर संभव मदद चाहिए -सतीश सक्सेना
    मेरे गीत !
    सरवत जमाल जी की सलामती के लिये दुआ करेंगे !

    ReplyDelete
  9. विहान का उदय हुआ, सदन में हर्ष छा गया।
    समेट लो बधाइयाँ, खुशी का वर्ष आ गया।।
    विहान को उसके जनमदिन की ढेरों बधाइयाँ और आप सभी परिजनों को शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  10. लिंक-3
    सावन आया झूम के, पड़ती सुखद फुहार।
    तन-मन को शीतल करे, बहती हुई बयार।।

    ReplyDelete
  11. लिंक-4
    पढ़े लिखों को ठग रहे, युक्ति करत हजार।
    जालजगत पर हो रहा, माया का व्यापार।।

    ReplyDelete
  12. काव्य मंजूषा
    शादी की शर्त

    सम्बल साथ का
    जितना मजबूत होगा
    आदमी तेरा तभी तो
    कुछ वजूद होगा !

    ReplyDelete
  13. लिंक-5
    ऐ शहीदों तुम्हें कोटि-कोटि नमन।
    प्राण देकर बचाया तुम्हीं ने चमन।।
    देश-रक्षा की खातिर जो ली थी कसम,.
    कारगिल हो या पंजाब या हो असम,.
    तुमने लौटा दिया वादियों का अमन।
    ऐ शहीदों तुम्हें कोटि-कोटि नमन।।

    ReplyDelete
  14. लिंक-6
    टीवी और बीबी से सभी को प्रेम होता है।
    फिर अन्ना की तो बीबी भी नहीं है,
    टाइमपास तो टीवी से ही करेंगे न।

    ReplyDelete
    Replies
    1. आधा सच,,,,

      बेईमानी की नीव,बात इमानदारी की होय
      अन्ना टीम बिगाड़ती, अपना आपा खोय
      अपना आपा खोय,मंच से दे रहे है गाली
      तभी जनता नदारत, और मैदान है खाली
      संसद की अपनी गरिमा,देश का है क़ानून
      जबरन बात मनवाने का,चढ़ा हुआ जूनून,,,,,

      Delete
  15. (159) राह बनाते रहिये
    S.N SHUKLA
    MERI KAVITAYEN

    अच्छी कविताऎं !!

    ReplyDelete
  16. कतय स्वतंत्रता-दिवस गेल........
    mridula pradhan
    mridula's blog

    सुंदर स्टाईल है !

    ReplyDelete
  17. उपहार कहाँ से लाऊँ ?
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)
    Mushayera

    कुछ लिखकर चुप बैठूँ, या अन्तर्मन में कुछ गाऊँ!
    अपनी व्यथा-कथा को, कैसे जग को आज सुनाऊँ!!

    बहुत ही सुंदर !

    ReplyDelete
  18. प्राचीन भारत में गणित विज्ञान की प्रगति
    हिन्दू - हिंदी - हिन्दुस्थान...

    भारतीय गणित पर एक सारगर्भित लेख !

    ReplyDelete
  19. रोज़े का महत्वपूर्ण उद्देश्य आत्म प्रशिक्षण है |
    S.M.MAasum
    हक और बातिल...
    रोजे रखने के उद्देश्य बताता एक अच्छा लेख !

    ReplyDelete
  20. मेजर चंद्रभूषण द्विवेदी एवं
    अन्य शहीदों को सलाम
    haresh Kumar
    information2media

    आज का दिन, 26 जुलाई, कारगिल विजय दिवस

    बहुत सुंदर
    किसी को तो याद
    आती है शहीदों की
    इस देश में !

    ReplyDelete
  21. timesjobs.com का गोरख धंधा
    Alok Mohan
    युवा पहल
    ठगी को कानूनी मान्यता मिले
    इस देश के संविधान में पारित हो
    ठगों को भारत रत्न सबसे पहले मिले
    ठगी एक उद्योग बनकर खड़ा हो जाये
    फिर ठग रहें और ठगी करते चले जायें!

    ReplyDelete
  22. स्मृति शिखर से – 18 : सावन
    करण समस्तीपुरी
    मनोज
    प्रस्तुति जानदार है
    अब किकेटवा होता तो कुछ होता
    बाँसुरी की तान में का रखा है?

    ReplyDelete
  23. हिंदी तो उनका कुत्ता भी लिख लेता है .,
    फ़ेसबुक .....चेहरों के अफ़साने

    चलिये कुत्तों पर लिखते हैं कुत्ता मंच बनाते हैं
    काहे फालतू में कुत्तों को चर्चा मंच में लाते हैं ?

    ReplyDelete
  24. उत्तर नहीं दिया प्रश्न लटका दिया
    रविकर अरे अरे ये तूने क्या किया?
    आभार ! है उत्तर का इंतजार है

    और अंत में :

    विहान के जन्मदिन पर
    Kailash Sharma
    बच्चों का कोना

    चिरंजीव विहान को
    आशीर्वाद और शुभकामनाएँ!!!
    नाना -नानी को बधाई !!
    कहाँ है मिठाई !!!

    ReplyDelete
  25. dhanybad.......bahut achche links.

    ReplyDelete
  26. रविकर फैजाबादी जी !
    प्रस्तुति जानदार है.
    सरवत जमाल जी की सलामती के लिये दुआ करेंगे !

    ReplyDelete
  27. अच्छी यादों को सदा, दुहराते हम लोग |
    हंसी ख़ुशी उत्साह का, सर्वोत्तम उद्योग ||

    ReplyDelete
  28. बहुत शानदार लिंक्स और प्रस्तुति आभार रविकर भाई जी

    ReplyDelete
  29. मन को भाती सुन्दर चर्चा ....

    ReplyDelete
  30. बलिहारी हम हिंदी पर
    जो कुत्तों को भी अपनाए
    पर उसी थाली में छेद करें
    जिस थाली में स्वान खाय
    बहुत अच्छे लिंक..
    मेरी प्रविष्टी को शामिल किया, आपका आभार..!

    ReplyDelete
  31. ravikar ji mere mail par aap apna mobile no. de,urgent hai, ya fcbk par contact kare

    ReplyDelete
  32. बहुत अच्छे लिंक..
    शानदार चर्चा.....

    ReplyDelete
  33. बेहतरीन प्रस्‍तुति।

    ReplyDelete
  34. रविकर जी,ने खूब सजाई,आज की चर्चामंच
    खोज खोज कर लिंक है,लाये २४ कैरेट टंच,,,,,

    ReplyDelete
  35. सन्नाट व्यंग मारा है..

    ReplyDelete
  36. 1. तौबा गुनाहों को खा जाती है।
    2. ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई) नेक आमाल को खा जाती है।
    3. ग़म उम्र को खा जाता है।
    4. सदक़ा (दान) बलाओं को खा जाता है।
    5. पशेमानी सख़ावत को खा जाती है।
    6. नेकी बदी को खा जाती है।
    7. झूठ रिज़क़ को खा जाता है।
    8. ग़ुस्सा अक्ल को खा जाता है।
    9. तकब्बुर (घमंड) इल्म को खा जाता है।
    10. अद्ल (न्याय) ज़ुल्म को खा जाता है।

    नेक नसीहतों का यहां शामिल करने के लिए शुक्रिया !
    इन नसीहतों पर अमल किया जाए तो ख़याल और ज़ुबान क़ाबू में रहेंगे।

    जानवर अपनी बोली बोलते हैं। उनकी बोली को कोई नाम देना नादानी महज़ है।

    ReplyDelete
  37. अच्छे लिक्स
    कल बाहर था, मंच पर आ नही सका

    ReplyDelete
  38. कलरफुल बैकग्राउंड और फॉण्ट में सजी बढ़िया चर्चा ...

    ReplyDelete
  39. Sanskrit Men Prachalit Svaron Ki Sankhyaa Kul 13 Hai..,
    Hindi Men Prachlit Svaron Ki Sankhyaa Kul 11 Hai..,
    Urdu men Svaron Ki Sankhyaa Kul 1O Hai..,
    English Men Svaron Ki Sankhyaa Kul 5 Hai..,
    Snskrit Ka Vyaakaran Samriddh
    Hindi Ka Vyaakaran Ati Vikasit
    Urdu Ka Vyaakaran Vikasit
    Va Engalish Ka Vyaakaran Vikaasshil Hai....

    ReplyDelete
  40. Saath Hi Do Ayogavaah, Anusvaaar Va Visarg Ka Prayog
    Hindi va Sanskrit Dono Men Hi Hotaa Hai..,

    English Bhaashaa Men Maatraa Ka Abhaav Hai Jabaki
    Sanskrit Va Hindi Bhaashaa Maatraatmak Hai

    Urdu men Maatraa Avikasit Rup Men Hai.....

    ReplyDelete
  41. खरगोश का संगीत राग रागेश्री पर आधारित है जो कि खमाज थाट का सांध्यकालीन राग है,
    स्वरों में कोमल
    निशाद और बाकी स्वर शुद्ध लगते हैं, पंचम
    इसमें वर्जित है,
    पर हमने इसमें अंत में
    पंचम का प्रयोग भी किया है, जिससे इसमें राग बागेश्री
    भी झलकता है...

    हमारी फिल्म का संगीत
    वेद नायेर ने दिया है.
    .. वेद जी को अपने संगीत कि प्रेरणा जंगल में
    चिड़ियों कि चहचाहट से मिलती है.
    ..
    Here is my web site खरगोश

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

चर्चा - 2817

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है  चलते हैं चर्चा की ओर सबका हाड़ कँपाया है मौत का मंतर न फेंक सरसी छन्द आधारित गीत   ...